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Tag: Dilip Kumar

व्यंग्य : यक्ष इन पुस्तक मेला

दिल्ली का पुस्तक मेला समाप्त हो चुका था, धर्मराज युधिष्ठिर हस्तिनापुर के अलावा इंद्रप्रस्थ के भी सम्राट थे। अचानक यक्ष प्रकट हुए, उन्होंने सोचा कि चलकर देखा जाये कि धर्मराज अभी भी वैसे हैं या बदल गए जैसे कि मेरे सरोवर का जल पीने के समय थे। युधिष्ठिर से मिले, कुशल क्षेम हुई, उन्होंने यक्ष […]

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व्यंग्य : विश्व पुस्तक मेले के बहाने

देवांशु तेरे कितने नाम…. मैं लगभग आश्वस्त हो चुका हूं कि लिखने वालों में से अधिकांश बहुत स्वार्थी, बेईमान और पिलपिले किस्म के भावुक हैं। इन्हें शब्दों के जाल में लोगों को फांसना आता है। इनका एकमात्र मंतव्य अपना प्रचार और लोकप्रियता हासिल करना है। खासकर, पुरुष को स्त्री का आकर्षण और स्त्री को पुरुष […]

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