मेकिंग इंडिया साप्ताहिकी

जीवन के सप्त रंग, मेकिंग इंडिया के संग
बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाए कांसे, पीतल की थाली

कॉलोनी में एक बुज़ुर्ग आंटी से मुलाक़ात हुई, पुरानी जीवन शैली पर जब बात छिड़ी, तो मुझे देखकर बहुत खुश हुई, कहने लगीं, हम तो अपनी बहुओं को कह कह कर थक गए, स्टील और प्लास्टिक में खा खाकर क्यों कैंसर कर रही हो, गरम गरम खाना कांसे की थाली में खाओ, शरीर को कोई रोग न होगा. बस उसे मिट्टी के बर्तन जैसे ही संभाल कर रखना, बहुत नाज़ुक होते हैं, लेकिन वह सोने से अधिक कीमती होते हैं. बेटियों को कांसे की थाली विवाह में देने का रिवाज़ था ताकि वह ससुराल में सबके स्वास्थ्य की रक्षा करें, अब तो नॉन स्टिक देकर हम ही उन्हें बीमारियाँ तोहफे में दे रहे…

मैं बस सुनती रही, उनसे कहा, यह सब बातें आप खुद बताइयेगा लोगों को. मैं वीडियो बनाऊँगी आप पर… कहने लगी कुछ दिनों बाद आना अभी पर्युषण चल रहे हैं, शाम को मंदिर जाना होता है.
मैंने कहाँ हाँ अवश्य, जब आपके पास समय हो…

उन्हें अपने वीडियो से अधिक उन परम्पराओं को ख्याल है जिनकी वजह से उनका जीवन है, वह चिंतित हैं आज की पीढ़ी के लिए, लेकिन लाचार है, सिर्फ प्रार्थना कर सकती हैं. लेकिन आप तो लाचार नहीं, कांसे की थाली खरीद सकते हैं या पीतल की… मिट्टी की मिल जाए तो सबसे बढ़िया, मैं अपने लिए वही सोच रही हूँ, खुद तो खरीदती नहीं अपने लिए कुछ, बस इच्छा कर देती हूँ, देखते हैं इस आर यह जादू कहाँ से प्रकट होता है…

आपको जादू के लिए बहुत “ध्यान” करना होता है, और यह ध्यान सिर्फ आँख बंद करके प्रभु का नाम लेने से नहीं होता. यह ध्यान होता है हर काम प्रभु की इच्छा समझ कर, चाहे वह घर का छोटा सा काम हो या देश के लिए किये जाने वाला बड़ा काम.

जब व्यक्ति इस भाव से अपना काम करे जैसे कोई भक्त प्रार्थना करता है तो उसके जीवन में घटित होते हैं जादू, और फिर वह जादू अपने तक सीमित नहीं रखता उसे अपने दोनों हाथों से संसार को लुटाता है मेरी तरह…

आइये सनातन जीवन शैली को अपनाएं और इस आध्यात्मिक पुण्य भूमि पर जन्म लेने के लिए ईश्वर को धन्यवाद दें, जहाँ सिर्फ सच्चे ह्रदय से नि:स्वार्थ भाव से प्रार्थना कर देने भर से ईश्वर सुन लेता है. और मैं इसी भाव से आप लोगों के लिए कुछ वस्तु अपने हाथों से बना रही हूँ, ताकि हम वैश्वीकरण के नाम पर केमिकल युक्त उत्पाद और पैकेट बंद खाने के मायाजाल से मुक्त हो सके. और मुक्त हो सके उससे होने वाले रोग से.

आप सभी से अनुरोध है, आप सब भी छोटी छोटी वस्तुएं जो घर में बना सकते हैं, घर में ही बनाएं, और बच्चों का पिज्ज़ा, बर्गर और नूडल्स से ध्यान हटाकर देसी गाय के शुद्ध घी में बने हलवा पूड़ी, लड्डू और मूंगफली के तेल में तली नमकीन वस्तुएं और सरसों के तेल में बने विभिन्न तरह के अचार का स्वाद उनकी ज़ुबान पर चढ़ाएं.

आपके पास कांसा, पीतल या मिट्टी की थाली नहीं है तब तक बच्चों को थाली में पत्तल बिछाकर भोजन कराएं, या कांच की प्लेट में खिला लें लेकिन स्टील और प्लास्टिक का बहिष्कार करें. बच्चों के टिफिन में रोटी परांठा मलमल के कपड़े में बांधकर दें.

कुछ आवश्यक बातें

कांसा और ताम्बे का उपयोग रविवार को वर्जित होता है, उस दिन पीतल या पत्तल का उपयोग करें.
पीतल के बर्तन में खट्टी वस्तुएं न पकाएं न खाएं, थाली पीतल की है तो अचार वगैरह खट्टी वस्तु कांच की छोटी कटोरी या पीपल, पलाश के पत्ते पर रखें.
खाना पकाने के लिए पीतल के बर्तनों में कलई आवश्यक है, पानी बिना कलई के बर्तनों में भर रखा जा सकता है और पीया भी जा सकता है.
बच्चों को गरम खाना कांसे के बर्तन में खिलाने से उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है.
पानी ताम्बे के लोटे में, या पीतल या मिट्टी के ग्लास में पिएँ. पूरे समय ताम्बे में पी रहे हैं तो तीन महीने के बाद 15 दिन के लिए छोड़ दें.
पानी हमेशा घूँट घूँट पिएँ, और बैठकर पिएँ, कभी पथरी नहीं होगी, ना ही बुढ़ापे में घुटने का दर्द होगा.
पानी के बर्तन में सहजन की फली (मुनगा) का छोटा सा टुकड़ा डालेंगे तो पानी शुद्ध हो जाएगा. या घर में ही एंजाइम बनाकर उसका उपयोग करें.
खाने में सहजन की पत्तियाँ धनिया पत्ती की तरह बुरककर खाने से कैल्शियम के कमी नहीं होगी.
दाल में एक चम्मच चूने का पानी या एक चने की दाल बराबर चूना खाने से भी कैल्शियम की पूर्ति होती है. (जिन्हें पथरी हैं, वे छूना न खाएं)
कैल्शियम की पूर्ति के लिए आप नियमित बिना कत्थे का चूना लगा पान खाएं.
गेहूं की रोटी मिट्टी के तवे पर सेंककर बनाएं, बीच बीच में मौसम के अनुसार ज्वार, बाजरा और मक्के का उपयोग भी करें.
बुखार आने पर एक चम्मच शहद में तुलसी का रस दो तीन बार लें.
सर्दी ज़ुकाम में एक चमच शहद में चुटकी भर दालचीनी और कालीमिर्च पाउडर दिन में तीन बार लें.
बच्चों को शहद सीपी (शंखवाली) में देने से जल्दी लाभ होता है.
खुद भी सूती कपड़े पहनें और अपने बच्चों को भी हमेशा ढीले सूती कपड़े पहनाएं.

कुछ भी खाएं पीएं तो कम से का पांच सेकंड तक उसे प्रार्थना भरी दृष्टि से देखकर उसे धन्यवाद दें, आपको जीवन में कभी कोई रोग नहीं होगा.

धन्यवाद
माँ जीवन शैफाली (9109283508 For Order)


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