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वैद्य राजेश कपूर से जानिये किस दिन क्या खाना और करना वर्जित है

 

आचार्य राजेश कपूर से जानिये पंद्रह दिन के चौदह नियम –

1. प्रतिपदा – कूष्मांड पेठा और कद्दू खाना वर्जित है.
2. दूज – बृहती (छोटा बैंगन) खाना वर्जित है.
3. तृतीया – परवल खाने से शत्रु वृद्धि होती है.
4. चतुर्थी- मूली खाने से धन का नाश होता है.
5. पंचमी – बेल खाना वर्जित है – कलंक लगता है.
6. छठ – नीम खाना वर्जित है – घटिया योनी में जन्म होता है.
7. सप्तमी – ताड़ खाना वर्जित है – रोग होते हैं.
8. अष्टमी – नारियल, तिल का तेल खाना वर्जित है, यौन सम्बन्ध वर्जित है – बुद्धि का नाश होता है.
9. नवमी – लौकी खाना वर्जित है… इस तिथि को लौकी खाना गौमांस खाने के बराबर मन जाता है.
11. एकादशी – चावल, साबूदाना, तिल, सेम फली खाना वर्जित है –
इस तिथि को यौन सम्बन्ध वर्जित है, कहते हैं पुत्र का नाश होता है.
इस तिथि को आंवले के जल से नहाने से होता है लाभ, पाप नष्ट होते हैं और बिगड़े काम बनते हैं….

विधि – एक रात पहले कांच की कटोरी में आंवला भिगो दें, और अगले दिन नहाने के पानी में मिला दें.
इस तिथि को ना तुलसी तोड़ना, न तुलसी को जल चढ़ाना. कहते हैं इस दिन तुलसी का निर्जला व्रत होता है.

12. द्वादशी – पोई खाने से पुत्र का नाश होता है.
13. त्रयोदशी – बड़ा बैंगन खाने से पुत्र नाश होता है.
14. चतुर्दशी – तिल खाना और यौन सम्बन्ध वर्जित है.
15. (अमावस) – इस तिथि को पीपल की पूजा और सरसों के तेल का दिया लगाने, जल चढ़ाने, पीपल के वृक्ष की परिक्रमा करने से पाप नष्ट होता है और कुल में श्रेष्ठ संतान का जन्म होता है. शनिवार को भी यही प्रक्रिया दोहराएं.

रविवार –
1. रविवार को बिल्व के वृक्ष की पूजा करने से पाप नष्ट होता है. (ब्रह्म हत्या का पाप तक नष्ट होता है).
2. रविवार को कांसा, ताम्बे का उपयोग वर्जित है, तुलसी तोड़ना भी वर्जित है, पहले से टूटी तलसी का उपयोग कर सकते हैं, इस दिन लाल साग नहीं खाना चाहिए.

तिल वर्जित –
रविवार, अष्टमी, एकादशी, अमावस, पूर्णिमा, व्रत वाले सारे दिन, सूरज ढलने के बाद तिल का प्रयोग नहीं करना चाहिए.

तुलसी –

रविवार, बुधवार, एकादशी को तोड़ना वर्जित है.

 

विशेष नोट – दशमी के लिए कोई नियम नहीं है.

– साभार वैद्य राजेश कपूर

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