मेकिंग इंडिया साप्ताहिकी

जीवन के सप्त रंग, मेकिंग इंडिया के संग
Polythene Ban : आधुनिक से सनातन जीवन शैली की ओर यात्रा

एक बहुत सुन्दर यात्रा का वर्णन करती हूँ आज…

जब मिट्टी के साबुन बनाना शुरू किये थे और उससे लोगों की त्वचा की समस्याएँ जड़ से ख़त्म होना शुरू हो गयी तो सबने कहा आप इसे बड़े पैमाने पर शुरू कर दीजिये…

फिर बारिश के कारण और कुछ लोगों को झाग वाले साबुन चाहिए थे, क्योंकि मिट्टी वाले साबुन झाग नहीं देते, तो मैंने कुछ हर्बल साबुन सोप बेस में बनाना शुरू किये.

वो साबुन भी लोगों को इतने पसंद आये कि सबने कहा आप तो साबुन की फैक्ट्री डाल लीजिये…

इस बीच अपना थाइरॉइड मैंने जिस मुखवास से ठीक किया था, वो कुछ लोगों को बनाकर दिया साथ में हर्बल टी दी जिससे कई लोगों का थाइरॉइड नॉर्मल होने लगा, तो कई लोगों का वज़न मेरी तरह कम हुआ… तो सबने मुझे आयुर्वेद ज्ञाता समझ लिया… मैं कितनी अज्ञानी हूँ यह बात आपसे छुपी तो नहीं है… बस कुछ घरेलू वस्तुओं से भी, बिना एलोपेथिक दवाई के रोग ठीक कर सकते हैं यह सन्देश मुझे देना था…

अब मुद्दा यह कि मैंने तो कोई योजना बनाई नहीं थी कि मैं कभी यह सब वस्तुएं बनाउंगी… वो तो अस्तित्व मेरे सामने जो योजना प्रस्तुत करता गया मैंने उसे ईश्वर का आदेश मानकर पालन किया और उसी योजना के तहत गुरुदेव वैद्य राजेश कपूर का जीवन में आगमन हुआ, और जब उन्हें पता चला कि जो दो वेबसाइट हम चलाते हैं, उससे कोई आमदनी नहीं हो रही, बस राष्ट्र की सेवा और लोगों को जागरूक रखने के लिए चला रहे हैं तो उन्होंने आशीर्वाद दिया कि आप किसी और के विज्ञापन क्यों लगाते हैं वेबसाइट में, आप अपने प्रोडक्ट्स बनाइये देखिएगा लोग ऐसे जुड़ेंगे आपसे कि आपको समय ही नहीं मिलेगा… बस फिर क्या था, हम तो जन्म से ही शिष्या हैं, तो गुरुदेव का आशीर्वाद ऐसे फलित हुआ कि सच में सांस लेने की फुर्सत नहीं मिलती…

इस बीच सूती सेनेटरी पैड्स भी बनाए और अब पॉलिथीन ban के लिए लोगों को जागरूक करने कॉटन बैग्स बना रही हूँ…

यह सारा काम मैं अपने हाथ से कर रही हूँ और कई मित्र जो मेरे शुभ चिन्तक भी हैं, कहते हैं आप स्टार्ट अप योजना के तहत इसे बड़े पैमाने पर कीजिये….

कैसे करूं… क्या साबुन बनाने की योजना मेरी थी? क्या मुखवास या हर्बल टी बनाने की योजना मेरी थी? क्या कॉटन बैग्स बनाने की योजना मेरी है? तो मैं किस आधार पर इसे बड़े पैमाने पर करूं… और ईश्वर की यही योजना होगी तो वह कर भी देगा… लेकिन मैं जानती हूँ … इससे बड़ी योजना के लिए उसने मुझे चुना है… लेकिन उस योजना तक पहुँचने के लिए ये छोटी छोटी सीढियां तो चढ़ना ही पड़ेगी ना…
कई लोगों की नज़र में यह काम जो मैं कर रही हूँ बहुत छोटा है , लेकिन मुझे यही दिखाना है कि जीवन में जब आप छोटे से छोटा काम भी पूरे आनंद के साथ राष्ट्र के प्रति और समाज के प्रति सेवा भाव से करते हैं… तो ईश्वर आपको किसी बड़ी योजना के लिए तैयार कर रहा होता है…

यह सब मैं आपके लिए ही कर रही हूँ, यह बात बताने के लिए कि कोई काम छोटा नहीं होता… दूसरा जिस सनातन जीवन शैली को हम भूलते जा रहे थे उसे याद दिलाने का काम मैंने कर दिया है… अब आप लौट चलिए घर… बहुत जी चुके विदेशी संस्कृति में और बहुत रोगों को आमंत्रण दे दिया… अब स्वास्थ्य को वापस लाना है… देश के स्वास्थ्य को.. तभी तो भारत फिर से विश्वगुरु बनेगा ना…

और हाँ यह तरह तरह के बैग्स बनाकर आप मुझे कोई बैग की फैक्ट्री खोलने की सलाह मत दीजिएगा… थोड़ी बहुत रचनात्मकता ईश्वर ने किसी जन्म के पुण्य कर्मों के फल स्वरूप दी है बस उसी को भुनाती फिरती हूँ… ख़ास जिस उद्देश्य के लिए यह कॉटन बैग्स का अभियान शुरू किया था वो था सब्ज़ी और राशन के लिए उपयोग आने वाली पॉलिथीन को बंद करना… तो आइये अब छोटे सूती सब्ज़ी बैग का चलन बढ़ाएं, जो बहुत सस्ते होते हैं.. मैं तो बना ही रही हूँ, आपके पास सुविधा हो तो आप भी घर में ही शुरू कर दीजिये बनाना या आपके आसपास कोई ऐसी ज़रूरतमंद महिला हो जो सिलाई करके घर परिवार चलाती हो उससे बनवाइए… जैसे मैं कभी कभी मेरे आसपास रह रही ऐसी महिलाओं की मदद लेती रहती हूँ ताकि उनको भी रोज़गार मिले…

तो यात्रा अभी ख़त्म नहीं हुई है… ये सफ़र बहुत है कठिन मगर इसे हम सब साथ मिलकर इतना आसान बना देंगे कि आपको पता ही नहीं चलेगा भारत कब अपनी पुरानी संस्कृति में लौट आया है…

माँ जीवन शैफाली (9109283508)
सूती थैलियाँ, झोले, सब्ज़ी के थैले और ऑफिस बैग्स उपलब्ध हैं

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