मेकिंग इंडिया साप्ताहिकी

जीवन के सप्त रंग, मेकिंग इंडिया के संग
पंचगव्य और आयुर्वेद के ज्ञाता ऋषि तुल्य वैद्य राजेश कपूर से मुलाक़ात

“अब तो चाय बिना शक्कर और बिना दूध वाली पीता हूँ”, मेरे इस कथन पर लोगों की अब तक प्रशंसात्मक या विस्मयपूर्ण प्रतिक्रियाएं ही मिली हैं.

पर वो गुरु ही क्या जो चोट न करे! उन्होंने छूटते ही कहा कि इस पेय में चाय पत्ती तो है… नहीं पीना चाहिए.

मेरे प्रतिवाद पर उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा, आप सुबह से मुझे ‘गुरु’ कह कर संबोधित कर रहे हैं, अंत:करण से ऐसा मानते भी हों, तो गुरु दक्षिणा स्वरुप चाय का सेवन बंद कर दीजिए.

पुराने सभी मित्र मेरे चाय-प्रेम से परिचित हैं, सो समझ गए होंगे मेरी दशा 😀

लाखों अनुयायियों को स्वस्थ जीवन शैली प्रदान करने वाले ऋषितुल्य आचार्य राजेश कपूर जी से एक सुखद आश्चर्य के रूप में फाल्गुन कृष्ण द्वितीया को अनायास भेंट हुई.

मिलकर उनके आगामी कार्यक्रम को जान, मैंने उनका अपहरण कर लिया.

इसके बाद घरभर में जो धूम मची उसका क्या वर्णन करूं… अगले 21 घंटे, मिनटों में नहीं सेकेंडों में बीत गए.

कॉलोनी भर के लोगों ने घर पर अड्डा जमा लिया, गुरूजी की थकान का अनुभव कर बड़ी मुश्किल से उन लोगों को उनके घरों को रवाना किया, फिर भी एक दंपति देर रात गुरूजी के शयनकक्ष में जाकर मिलने का हठ करने लगा, उन्हें समझा-बुझा कर सुबह आने के लिए मनाया.

पानी की स्मरणशक्ति के प्रयोग, हमारे द्वारा साधारणतया उपयोग की जाने वाली अगरबत्ती/ साबुन/ शैम्पू के हानिकारक प्रभाव का प्रदर्शन, स्टील और एल्युमीनियम के दुष्प्रभावों का प्रदर्शन गुरुजी की सौम्य वाणी, सरल शब्दों और सहज भंगिमाओं से आसानी से ही सबको समझ आ गया.

उपाय के रूप में पानी और उसके भंडारण के स्थान व पात्र की शुद्धता का ध्यान रखना… और उससे भी बड़ी बात पानी के साथ हमारा व्यवहार और भाव का ध्यान रखने का निर्देश उन्होंने दिया. पानी में स्मरणशक्ति होती है, ये प्रमाणित कर चुके थे वे 🙂

इसके अतिरिक्त स्टील व एल्युमीनियम (कुकर व कढ़ाही) के बर्तनों के स्थान पर पीतल, कांसा, तांबे के बर्तन और लोहे की कड़ाही प्रयोग करने की सलाह दी. वैसे, मिट्टी के बर्तन में खाना पकाना और भोजन करना सर्वोत्तम है.

संलग्न वीडियो की शुरुआत में चर्चा मिट्टी के बर्तनों पर हो रही है. उसके पश्चात पानी की स्मरणशक्ति जांचने का प्रयोग है.

उनकी कही सारी बातें लिखना मेरे लिए संभव नहीं, क्योंकि स्वभावानुसार मैं उन्हें देख-सुन नहीं रहा था वरन उन्हें जी रहा था, पी रहा था 🙂

अच्छा तो ये रहेगा कि उत्सुक मित्र यू-ट्यूब पर उनके वीडियो वैसे ही खोज लें जैसे मैंने उन्हें खोज निकाला. मेरे इस डायलॉग पर गुरुजी ने ठहाका लगाते हुए कहा था, “मुझे पता ही नहीं कि मेरी खोज विनयजी ने की थी.”

सरल, सहज, सौम्य… घर के किसी आत्मीय बुज़ुर्ग सरीखे आचार्य वैद्य राजेश कपूर जी को सादर नमन.

– स्वामी ध्यान विनय

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