मेकिंग इंडिया साप्ताहिकी

जीवन के सप्त रंग, मेकिंग इंडिया के संग
‘पंछी’ से सीखिए आसमान में उड़ने का हुनर और शऊर

दूरदर्शन पर एक सीरियल आया करता था “दादी माँ जागी” … बीस तीस साल तक मूर्छा में रही दादी माँ एक दिन अचानक जाग जाती है… बाहर की दुनिया पूरी तरह से बदल चुकी होती है लेकिन उनके लिए दुनिया वही बीस तीस साल पुरानी ही है… नए समय के साथ सामंजस्य बिठाने में दादी माँ और घरवालों दोनों के लिए कभी बड़े अजीब ओ गरीब, तो कभी मनोरंजक किस्सों और घटनाओं से गुज़रना पड़ता है, जो कभी दर्शकों का मनोरंजन करता है तो कभी बहुत मार्मिक कहानियाँ भी बन जाती है.

मुझे अपना जीवन कभी कभी ऐसा ही लगता है, जीवन में कई घटनाएं इतनी पुरानी है कि लगता है पिछले किसी जन्म की बात कर रही हूँ, कुछ मेरे अपने लिए इतनी नई और अचम्भित करने वाली होती हैं लगता है जैसे भविष्य में होने वाली किसी घटना का Flash Back देख रही हूँ…

इन दो समय में पेंडुलम की तरह हिलते हुए वर्तमान के किसी एक क्षण में ये दोनों समय खण्ड विलुप्त हो जाते हैं… लेकिन वह इतने कम समय के लिए होता है कि जब तक उसको अनुभव कर उसका आनंद ले सके पेंडुलम फिर अपना स्थान छोड़ देता है…

साधना किसे कहते हैं मैं नहीं जानती, लेकिन इस मध्य की स्थिति में अधिक से अधिक समय तक बने रहना सबसे कठिन तपस्या है… जो भी है बस यही एक पल है… जो इस पल को जी गया वह समझो जीत गया…

सारी कहानियों का अंत बस इस एक पल में ही है… वर्ना हमेशा की तरह अतीत और भविष्य की कल्पनाओं में पेंडुलम की तरह डोलते रहिये….

इस वर्तमान के पल को अपनी सम्पूर्णता से जीने वाले विनीत पंछी  को जब पहली बार अपने अनुभवों को साझा करते हुए सुना, तो लगा अरे हाँ यही तो मैं भी जीती और कहती आई हूँ, लेकिन मेरी बात किसी को समझ क्यों नहीं आती!!!

उसका सीधा सा जवाब जो निकलकर आया कि बड़ी बड़ी आध्यात्मिक लफ्फाज़ियों में साक्षी भाव, आध्यात्मिक यात्रा, फलाना ढिमका हर किसी को सुनना पसंद नहीं आता… सीधी सच्ची बात एक पंछी बना व्यक्ति ही बोल सकता है, जिसे आसमान में उड़ने का हुनर और शऊर पता है…

मैं यहाँ उनके बारे में अधिक लिखूं तो उनकी कही बात दोहराना हो जाएगा, और वह जादुई माहौल न बन पाएगा जो उनकी आवाज़, उनके व्यक्तित्व और प्रस्तुतिकरण के नायाब तरीके से बनता है… इसलिए मैं उनका वीडियो साझा कर रही हूँ ताकि आप सीधे उनसे मुख़ातिब हो सकें.

और मुझे यह कहने में भी कोई गुरेज़ नहीं, कि उनसे संपर्क यदि नहीं भी हो पाता है तो भी मैं एकलव्य की भांति बस उनके वीडियो देखते हुए बहुत कुछ सीख रही हूँ…

वज़न कम करने के मेरे तमाम लेख के माध्यम से मैं यही कहती आई हूँ कि मेरा मुख्य उद्देश्य सिर्फ देह पर पड़े अतिरिक्त बोझ कम करना नहीं है, वास्तविक रूप से पहले आत्मा पर पड़े बोझ कम करना है. और उसी श्रृंखला में वैद्य राजेश कपूर, डॉ विपिन गुप्ता, डॉ हेगड़े के बाद अब मैं विनीत पंछी का वीडियो साझा कर रही हूँ…. यदि इनको नहीं सुना तो जीवन में जो कुछ सुना वह व्यर्थ है…

– माँ जीवन शैफाली

माँ की रसोई से : गिलकी की झिलमिल रेसिपी

पग घुँघरू बाँध मीरा नाची रे…

जीवन-रेखा : पहुंचेली

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