मेकिंग इंडिया साप्ताहिकी

जीवन के सप्त रंग, मेकिंग इंडिया के संग
जीवन की रेसिपी : आणंद ना गोटा

यह एक गुजराती रेसिपी है, और चूंकि गुजरात में हर खाने की चीज़ में शक्कर या मीठे का उपयोग होता ही है इसलिए शायद उनकी बोली भी इतनी ही मीठी लगती है.

तो गुजरात में रहने वालों के लिए गोटा कोई नई चीज़ नहीं, लेकिन जो गुजरात के बाहर रहते हैं, और उन्होंने गुजरात तरफ यात्रा की होगी तो गोटा शब्द अवश्य सुना होगा और नई चीज़ खाने में परहेज़ न करने वालों ने इसे खाकर भी देखा होगा.

आपको पता है, मैंने ऐसे बहुत से लोग देखे हैं, जो बचपन से बुढ़ापे तक एक जैसा खाना खाते आ रहे हैं, वे नई चीज़ पकाने और चखने में बड़ा हिचकते हैं. नई चीज़ को खाने और पकाने के लिए भी आपका स्वभाव ऐसा होना चाहिए कि आप रिस्क लेने में डरते न हो. जो लोग इस स्तर का रिस्क लेने में बिंदास हों, वे जीवन में भी बड़े बड़े रिस्क लेते देखे जा सकते हैं.

अब आप सोच रहे होंगे खाने और जीने में क्या समानता? लेकिन आप अपने आसपास के लोगों को गौर से देखिये, जो लोग जीवन भर एक जैसा जीवन जीते आए हैं, उनके जीवन की एकरसता आप उनके खानपान ही नहीं, हेयर स्टाइल से भी पहचान सकते हैं. बहुत सीधा सा फंडा है जो लोग अपने बालों की स्टाइल बदलने जैसी छोटी सी बात में झिझकते हों, वे जीवन में बड़ी रिस्क कैसे ले सकेंगे.

इसलिए जब भी मेरे पास कोई अपनी समस्या लेकर आता है तो मुझे निर्मल बाबा याद आते हैं, उनका व्यक्तिगत लाभ क्या था या उन पर क्या आरोप प्रत्यारोप लगा उसमें बहुत गहराई से न जाया जाए तो उनका तरीका मुझे बहुत पसंद है.

कोई उनके पास अपनी व्यक्तिगत समस्या लेकर आया है, कि मैं फलानी परीक्षा में पास हो जाऊं, या फलाना व्यवसाय मेरा सफल हो जाए, या किसी रिश्ते को लेकर कोई उलझन है तो वो कहते हैं… ठीक है आप रसगुल्ला खाइए, या आप समोसा खाइए…

अब सामने वाला सोचेगा मेरी समस्या का समोसे क्या लेना देना… जैसे आप सोच रहे होंगे कि आणंद के गोटा की रेसिपी के बीच ये निर्मल बाबा क्या कर रहे हैं… सोच रहे हैं ना? तो सोचिये आपने एक रेसिपी जानने की मानसिक स्थिति से यह लेख पढ़ना या सुनना शुरू किया और आपको पढ़ने को मिल रहे हैं निर्मल बाबा, हेयर स्टाइल और जीवन में रिस्क लेने की बातें…

यानी आपकी सोच जिस दिशा में बढ़ रही थी उसमें अचानक से एक ट्विस्ट आता है और आप पढ़ते पढ़ते किसी और विषय या धरातल पर पहुँच जाते हैं.

बस निर्मल बाबा वही करते हैं आपके दिमाग़ में जो एक ही समस्या को लेकर उथल पुथल चल रही थी उसमें एक समोसा डालकर समस्या को थोड़ा कुरकुरा और स्वादिष्ट बना देते हैं… यानी आपका ध्यान आपकी मूल समस्या से हटा दिया जाता है और सारा ध्यान चला जाता है समोसे पर…

बस यही वो बारीक सा सूत्र है, जो ऐसे बहुत से बाबा और मेरे जैसी बेबी ने पकड़ा लिया है और जब मैं किसी की समस्या सुनने के बाद कहती हूँ कभी अकेले में कमरा बंद करके डांस किया है? सामने वाला कहता है नहीं.. बस तो यहीं है आपकी समस्या का समाधान… अपनी पसंद का कोई भी संगीत चाहे तो भजन, चाहे ग़ज़ल, चाहे क्लासिकल, चाहे वेस्टर्न, रैप म्यूजिक जो पसंद हो उसको सुनिए और शुरू हो जाइए … आप डांसर नहीं है तो यह तरीका आप पर अधिक कारगर होगा…

और यह नहीं तो अपनी हेयर स्टाइल बदल लीजिये, आप जो बरसों से एक जैसी ड्रेस पहनते आ रहे हैं, उसे बदल दीजिये और अंतिम बात जहाँ से बात शुरू की थी कि इनमें से कुछ भी पसंद नहीं तो यह आणंद का गोटा बनाइये और खाइए… फिर देखिये आपके जीवन में कैसा बदलाव आता है…

अरे अरे जा कहाँ रहे हैं रेसिपी तो नोट कर लीजिये जो मेरी सखी नीतू कुमावत ने सीधे गुजरात से ख़ास आपके लिए भेजी है…

बेसन का मोटा आटा एक कटोरी और गेंहू बाजरा का मिक्स आटा आधी कटोरी (optional) और अगर ये मिक्स आटा न लेना चाहें तो बेसन दो कटोरी ले लें.

एक जुड़ी हरी मेथी बारीक कटी हुई, आधी जुड़ी हरा धनिया बारीक कटा हुआ,

लहसुन और हरी मिर्च का पेस्ट जितना तीखा पसंद हो,उस अनुसार, नमक, एक पका केला, चीनी एक चमच्च, तेल एक चमच्च, तिल एक चमच्च.

सब सामग्री मिला लें अच्छे से.

अब एक पैन में तेल एक चमच्च, आधी कटोरी पानी, और 1/4 चमच्च मीठा सोडा मिला कर उबाल लें.

तलने से ठीक पहले इस मिश्रण को भी घोल में मिलाएं और अगर मिश्रण ज्यादा tight लगे तो थोड़ा पानी मिला कर दाल पकोड़ी के जैसा घोल बनाएं.

हाथ पर हल्का तेल लगा कर गोल या लम्बा आकार दे कर मध्यम आंच पर सुनहरा होने तक तल लें.

कढ़ी, हरी चटनी या लहसुन चटनी के साथ मेथी के गोटे का मज़ा लें.

(मेथी के स्थान पर पालक, गाजर के पत्ते, प्याज पत्ती भी इस्तमाल कर सकते हैं)

– माँ जीवन शैफाली

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