मानो या ना मानो – 3 : मुक्ति के यज्ञ में पिता ने दी आहुति

पिछले वर्ष जीवन एक चिलक हो गया था… चिलक जानते हो ना, पीठ की अकड़न से उठने वाली पीड़ा… भयंकर दर्द… असहनीय… ऐसा कि बस मुंह से अंतिम शब्द जो निकला था … पापा मुझे अपने पास बुला लो… बस अब नहीं जीना मुझे… मैं जीना नहीं चाहती… अपने पास … Continue reading मानो या ना मानो – 3 : मुक्ति के यज्ञ में पिता ने दी आहुति