मेकिंग इंडिया साप्ताहिकी

जीवन के सप्त रंग, मेकिंग इंडिया के संग
मोटापे और थाइरॉइड से मुक्ति के लिए हर्बल टी और मुखवास

मैंने पिछले चार पांच महीने में अपना वज़न 15 किलो कम कर लिया है. मेरा वज़न कम हो जाने पर कुछ शुभ चिन्तक चिंतित अवश्य हुए हैं, परन्तु मेरे लिए अपना वज़न कम करना आवश्यक था उन लोगों को एक उदाहरण प्रस्तुत करने के लिए जो थाइरॉइड से ग्रसित हैं और जिनका वज़न बढ़ रहा है या यूं भी बिना किसी रोग के गलत जीवन शैली के कारण अपना वज़न बढ़ाए बैठे हैं.

उन शुभ चिंतकों में से कुछ ऐसे भी हैं जो मधुमेह के रोगी हैं या जो बीपी की रोज़ गोलियां खा रहे हैं, या किसी न किसी रोग से ग्रसित होकर किसी न किसी एलोपैथिक दवाई के गुलाम हो चुके हैं. लेकिन चाहते हैं कि मेरा वज़न कम न हों.

बस मेरा एक ही अनुरोध है रोग कोई भी हो, उपाय एक है और वह है अपनी जीवन शैली और आहार विहार के तरीकों में बदलाव करके देह के अतिरिक्त बोझ को कम करना.

कुछ बातें साझा करना चाहती हूँ जो आपका वज़न कम करने में सहायक होगी, थाइरॉइड, बीपी, शुगर और गलत जीवन शैली से उत्पन्न समस्याओं से मुक्ति देगी, बावजूद इसके कि आपको अपनी जीवन शैली गलत नहीं लगती और आप खाओ पीओ ऐश करो के उसूल पर चलते हैं. फिर भी आपका मन जानता है आप दुबले होना चाहते हैं, रोजमर्रा की सेहत की समस्याओं से मुक्ति चाहते हैं, और मेरी तरह इस पारंपरिक जीवन शैली में रहते हुए भी सबकुछ खाने पीने की स्वतंत्रता चाहते हैं, तो कुछ दिनों के लिए इन बातों का अवश्य पालन करके देखें.

  1. सूरजमुखी हो जाओ
    सबसे पहले सूर्योदय के समय उठने की आदत डालिए, आधे रोग तो आपके ऐसे ही भाग जाएँगे जब आप सुबह जल्दी उठने की वजह से जल्दी मल त्यागने के नियम में बंध जाएंगे तो देर से उठने के कारण मल के विष को शरीर के लहू में मिल जाने से रोक सकेंगे.
    सुबह 11 बार ॐ का ज़ोर से उच्चारण करें, जब आप अस्तित्व की ध्वनि के साथ एकाकार होते हैं तो अस्तित्व आपको जीवन रस प्रदान करता है, और आप स्वस्थ जीवन शैली की ओर कदम बढ़ाते हैं.
    उज्जायी प्राणायाम सबको करना चाहिए, उससे थाइरोइड पर तो नियंत्रण होता ही है साथ ही आपकी वाणी मधुर होती है.
    बस शर्त यही है उपरोक्त सभी उपाय यांत्रिक न होकर प्रार्थना स्वरूप हो, कृतज्ञता पूर्वक.
  2. चीनी कम
    चीनी कम ही नहीं बल्कि बंद ही करना है, उसकी जगह लाना है गुड़, देसी खांड. उससे आप चीनी में डलने वाले उन जहरनुमा केमिकल से बचेंगे जो आपको तरह तरह के रोग दे रहे हैं और आप यह मीठा ज़हर पीते हुए जान भी नहीं पाते कि न सिर्फ आपके बाल लगातार झड़ रहे हैं, बल्कि जीवन रस ख़त्म हो रहा है. यह चीनी आपकी जीभ को मीठा लेकिन शरीर को तिक्त बना रही है, चीनी से अधिक कटु आपके लिए कुछ नहीं.
    गुड़ से न सिर्फ आपका हीमोग्लोबिन बढ़ेगा, बल्कि झुर्रियां कम होगी, बाल मज़बूत होंगे.
  3. दूध वाली चाय नहीं, पीजिये हर्बल टी और वज़न करें कम

जी हाँ मेरा वज़न कम हुआ है तो उसका मुख्य कारण है हर्बल टी जो मैं खुद बनाती हूँ और आपको उपलब्ध करवाती हूँ, बस शर्त यही है कि आपको दूधवाली चाय नहीं पीना है.
ऐसा नहीं है कि मैंने बिलकुल ही कसम खा ली है कि जीवन में कभी दूधवाली चाय नहीं पिऊँगी. देखिये लोगों को जब भी परहेज़ के लिए कहती हूँ वे डर जाते हैं, उन्हें लगता है, उन्हें जीवन भर के लिए परहेज़ करना होगा. नहीं, किसी वस्तु का परहेज़ आपके संयम की परीक्षा होती है. संयम अपने आप में एक तरह का ध्यान है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता आप किस वस्तु पर संयम रख रहे हैं. इसलिए जब मैं किसी विशेष प्रक्रिया में उतरती हूँ तो उसका सबसे पहला कदम होता है “संयम”.

क्या होता है संयम
जब मैंने 15 दिन के लिए रसाहर किया था तब मैं संयम के भाव में थी, और यह मेरी संकल्प शक्ति की परीक्षा भी थी. जब मैंने मिट्टी, पीतल, ताम्बे के बर्तनों का उपयोग शुरू किया तब भी मेरे संयम और धैर्य की परिक्षा थी क्योंकि मुझे पिछले 44 साल से चल रही जीवन शैली को बदलने का संकल्प पूरा करना था, वह भी शांति पूर्वक, किसी को नाराज़ किये बिना.
यह प्रक्रियाएं बहुत धीमी लेकिन कारगर होती हैं. आप एकदम से सबकुछ बदल देंगे तो न आप खुद उसके साथ सामंजस्य बिठा सकेंगे न दूसरों को राज़ी कर सकेंगे. ठीक एलोपैथिक दवाई की तरह, जो आपको एकदम से राहत तो दे देती हैं, लेकिन न वो आपको रोगमुक्त कर पाती है बल्कि लम्बे समय तक उसके दुष्प्रभाव झेलना पड़ते हैं.

और हमारी पारंपरिक उपचार शैली धीमे होते हुए भी इतनी कारगर होती है कि उसका प्रभाव लम्बे समय तक बना रहता है. यही कारण है कि मैं विशेष प्रयोग छोड़ भी दूं तब भी उसका सकारात्मक प्रभाव मुझ पर हमेशा बना रहता है. और व्यस्तता के चलते या इमरजेंसी में आधुनिक खान पान या जीवन शैली अपनाना भी पड़े तो वह उतनी दुष्प्रभावी नहीं होती.

क्योंकि यहाँ मैं जिस भाव में जीती हूँ वह सबसे अधिक महत्वपूर्ण हो जाते हैं. और यह तो आपका विज्ञान भी सिद्ध कर चुका है कि आपके शरीर की कोशिकाओं की स्मरण शक्ति इतनी तीव्र होती है कि वह पिछली कई पीढ़ी के गुण तक याद रखकर आपकी आने वाले पीढ़ी को पहुंचा देती है. तो यदि मैं सकारात्मक भाव के साथ अपनी कोशिकाओं को याद दिलाती रहूँ कि उनके अन्दर इतनी प्रबल रोगहारिणी शक्ति का वास है कि वह किसी भी भयानक रोग को स्वयं की ताकत से बिना किसी दवाई के ठीक कर सकती है. तो फिर मेरी जीवन शैली अस्त व्यस्त होने पर भी वह मुझे स्वस्थ रखेगी. और मैं डेंगू, चिकनगुनिया जैसे रोग से भी बिना किसी दवाई के ठीक हो जाती हूँ.

क्या सिर्फ हर्बल टी पीने से मोटापा दूर हो जाएगा या सिर्फ अलसी मुखवास खाने से थाइरॉइड ठीक हो जाएगा?

हाँ क्योंकि मैंने इससे अपना थाइरॉइड 13 से सामान्य किया है. जब आप उपरोक्त जीवन शैली के साथ खाली पेट हर्बल टी लेते हैं और साथ में खाना खाने के बाद थाइरोइड के लिए बनया गया मुखवास खाते हैं तो यह दोनों मिलकर आपका हार्मोनल बैलेंस बनाते हैं.
आधा चम्मच यह हर्बल टी एक कप के लिए काफी होता है, जिसमें आप उबालते समय थोड़ा सा गुड़ डाल देंगे तो यह और स्वादिष्ट और पौष्टिक हो जाएगी. इसे छानकर सुबह की कच्ची धूप में बैठकर धीमे-धीमे पीजिये. यह आपके स्वास्थ्य को पकाएगी. और हाँ, जो छानन बचता है वह आप चबाकर खा भी सकते हैं और न खाना हो तो किसी गमले में डाल दीजिये यह खाद का काम करेगा.
खाना खाने के बाद अलसी का मुखवास आपके खाने को पचाएगा, और जो भोजन पहले पचने के बजाय शरीर में सड़ता था, उस भोजन से वह आवश्यक तत्व शोषित कर लेगा और जो आपने अनावश्यक खाया है उसे बाहर निकाल देगा.
और साथ ही बेर का मिरचन भी आप खा सकते हैं, जो कैल्शियम और आयरन से भरपूर है. यह न सिर्फ पेट साफ करता है बल्कि बच्चों की भूख भी बढ़ाता है.
और यदि खाना मिट्टी के बर्तन, लोहे या कलई लगे पीतल के बर्तनों में पका है तो फिर कहना ही क्या सोने पर सुहागा है. और यदि आपके पास यह बर्तन उपलब्ध नहीं है या पकाने में झंझट लगती है तो अप अपने स्टील और एल्यूमिनियम के बर्तनों में पकाकर मिट्टी की हांडी में निकाल दीजिये. पीतल और कांसे के बर्तन में खाइए. और कुछ नहीं है तो पत्तल में खाइए या फिर कांच की प्लेट में. स्टील और प्लास्टिक का उपयोग जहाँ तक हो सके न करें.

मैं जानती हूँ उपरोक्त सभी बातें आपको इस समय पढने में बहुत कठिन लग रही होगी, लेकिन एक बार आप इस जीवन शैली में उतरने का संकल्प ले लेते हैं तो यह सब बहुत आसन हो जाता है. और आपकी संकल्प शक्ति के आगे अस्तित्व भी आपकी सेवा में हाज़िर हो जाता है आपकी मदद के लिए.
फिर भी आप कुछ न करके सिर्फ दूध वाली चाय और शक्कर के परहेज़ के साथ इस हर्बल टी और मुखवास को लगातार तीन महीने तक लेते हैं तो आपकी शरीर की कोशिकाओं को आपके पूर्वजों की जीवन शैली एक बार फिर याद आ जाएगी, जो दिन भर श्रम (व्यायाम नहीं, शारीरिक श्रम) करके प्राकृतिक जीवन शैली अपनाते हुए स्वस्थ रहते थे, और वह आपको भी उसी जीवन शैली को अपनाने के लिए प्रेरित करेंगी. सबसे पहले यही ना कहा था कि आपकी कोशिकाओं को हर बात याद है, पिछली कई पीढ़ियों की.

आप यदि यह सोच रहे हैं यह सब करने से तो हम मोटे ही अच्छे या थाइरॉइड की एक गोली ले लेना अधिक आसान है तो आपको चेतावनी दे दूं, यह मोटापा और यह एक गोली सिर्फ शुरुआत है आपके शरीर के नष्ट होने की, उसके दुष्प्रभाव आपको तब दिखाई देंगे जब आपके पास यह अफ़सोस करने के अलावा कुछ नहीं बचेगा कि काश मेरी बात पहले मान ली होती.

अगले लेख में बालों का झड़ना और उसे मज़बूत बनाए रखने पर विस्तार से लिखूँगी. साथ ही बच्चों की इम्युनिटी पॉवर और भूख बढ़ने के उपाय.
तब तक स्वस्थ रहिये मस्त रहिये.
जीवन शुभ हो

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