कहानी : सोलह साँसें, द्वार दूसरी दुनिया का

बिस्तर पर चढ़ने के बाद पहले चार साँसें चित्त अवस्था में लो, फिर आठ साँसें दाईं करवट से, फिर सोलह साँसें बाईं करवट से…. आपका यह सोलह साँसों वाला कंसेप्ट सुनकर तो मुझे वह गीत याद आता है… एक सौ सोलह चाँद की रातें और एक तुम्हारे काँधे का तिल??? … Continue reading कहानी : सोलह साँसें, द्वार दूसरी दुनिया का