मेकिंग इंडिया साप्ताहिकी

जीवन के सप्त रंग, मेकिंग इंडिया के संग
Herbal Tea : छोटा काम बड़ा उद्देश्य, देश के स्वास्थ्य के लिए

सिर्फ दूध वाली चाय छोड़ने को बोला है वो भी चीनी वाली, बदले में स्वादिष्ट हर्बल टी दी है, लेकिन हम चाय के इतने गुलाम हो चुके हैं कि एक हफ्ते के लिए भी छोड़ने को तैयार नहीं, स्वास्थ्य की शर्त पर भी नहीं… एक चाय से मुक्त होने के लिए इतना संघर्ष, तो जीवन से कैसे मुक्त होओगे?

थाइरोइड हो, शुगर हो या बीपी, सारी माया सिर्फ जीवन से मुक्त होने के लिए हैं… और पता है ना मेरा नाम जीवन है… मुझसे मुक्त होना है तो बस एक ही शर्त है… जीवन में हास्य, प्रेम और करुणा लौटा लाइए, स्वास्थ्य अपने आप लौट आएगा… फिर मुझसे मुक्त हो जाएंगे… मेरी ज़िम्मेदारी ख़त्म हो जाएगी… फिर मैं किसी अन्य उद्देश्य की ओर बढूँ…

एक सखी को यह हर्बल टी दी, वह थाइरोइड से ग्रसित है, चाय छोड़ने को तैयार नहीं… कहती हैं मैं नहीं जी सकूंगी चाय के बिना…
मैंने कहा ठीक है दिन में एक बार दूध वाली चाय पीने की आज़ादी ले लो लेकिन बदले में मेरी एक बात मानना होगी….
उसने पूछा क्या…
या तो दिन भर में एक बार खूब नृत्य करो अपने पसंद के संगीत पर, या कम से कम दिन में दस बार जोर से हंसो…
कहने लगी दिन भर में मौका ही नहीं आता हंसने का…

मुझे कारण समझ आया, मैंने बहुत सहमते हुए अपना अगला कदम बढ़ाया…

ठीक है चाय पी सकती हो बस मेरी एक बात मानना होगी… बहुत व्यक्तिगत है लेकिन बुरा मत मानना…
उसने पूछा क्या?
मैंने कहा- कल से अपने बाल अपने पतिदेव से बनवाना और मुझे फोटो भेजना…

पूरे संवाद में पहली बार उसके अन्दर मैंने प्रेम और मुस्कान का सम्रिश्रण पाया…

मैं नहीं जानती वो दूध वाली चाय पिएगी या नहीं, मैं नहीं जानती वो मेरा बनाया मुखवास खाएगी या नहीं, मैं नहीं जानती वो मेरी बनाई हर्बल टी पिएगी या नहीं, मैं बस यह जानती हूँ आज उसके चेहरे पर सोलह साल की लड़की के अन्दर उमड़ता प्रेम है, जो अपने बालों में प्रियतम का प्रेम पूर्ण स्पर्श की कल्पना में जी रही है.

और कल वह अपने बाल सुगंध से भरपूर मेरे हर्बल शैम्पू से धोएगी जिसमें कोई ऐसा रसायन नहीं जो मस्तिष्क की कोशिकाओं को नष्ट करे और साथ में जीवन को भी…

मोगरे के इत्र से भरा प्राकृतिक वस्तुओं से बना शैम्पू कल उसके धुले बालों को महका रहा होगा, लेकिन क्या बस इतना काफी है? आपको यह संवाद मेरे हर्बल उत्पादों के विज्ञापन सा लग रहा है, है ना? तो आइये इसका वास्तविक स्वरूप दिखाऊँ, हर्बल शैपू का क्या है वो तो आप यूट्यूब पर देखकर खुद भी बना सकते हैं, मुझसे लेने की आवश्यकता भी नहीं.

लेकिन यह बताइये ये रोग क्यों आते हैं जीवन में?
क्योंकि हम प्रेम देना और प्रेम लेना भूल गए हैं, जीवन को रोज़ एक जैसा जीते हुए हम रिश्तेदारों, दोस्तों, और आसपास के लोगों के प्रति इतने आग्रहशील बन जाते हैं कि क्षमा का भाव ही भूल गए हैं, सिर्फ अपेक्षाएं, अपेक्षाएं और अपेक्षाएं, उसने ऐसा क्यों कहा उसने ऐसा क्यों किया, और उसे ऐसा नहीं कहना या करना चाहिए था… चाहे वह विवाह के बाद की परिस्थिति हो या आजकल के युवाओं में बढ़ते ब्रेक अप के फलस्वरूप, चाहे सास बहू का रिश्ता हो चाहे पिता पुत्र के बीच संवादहीनता.

अरे रूठना मनाना तो जीवन का रस है, जीवन सिर्फ़ खुशियों से भरा हो तो हम संतुष्ट होकर यहीं रह जाएंगे, यह जो अन्दर की घबराहट है वह कोई सांसारिक परिस्थितियों के कारण नहीं है, इस जीवन से मुक्ति के लिए है. सांसारिक परिस्थितियाँ तो ईश्वर प्रदत्त योजनाएं हैं ताकि यह घबराहट बनी रहे, आप अपनी परमधाम की यात्रा को भूल न जाएं.

अब आपके मन में यह सवाल उठेगा कि फिर इस घबराहट को बने रहने दिया जाए, इन सब वस्तुओं को, प्राकृतिक वस्तुओं को लेने का आग्रह क्यों? तो वह सिर्फ इसलिए कि जब तक आपका शरीर स्वस्थ नहीं रहेगा, आपकी चेतना स्वस्थ नहीं होगी और फिर आप इन परिस्थतियों को साक्षी भाव से स्वीकार नहीं कर सकेंगे और अपने आप से ही लड़ते रहेंगे और इन सब के लिए दूसरों पर आरोप लगाते रहेंगे.

तो पहला काम यह करना है कि जीवन में जो कुछ भी घटित हो रहा है उसमें क्षमा भाव लाइए, किसी और के कारण भी पीड़ा मिल रही है तो उसे धन्यवाद दीजिये कि उसने यह पीड़ा नहीं दी होती तो मेरे अन्दर जो पीड़ा भरी थी वह बाहर न आ पाती और मैं उससे मुक्त न हो पाता, तुमने उसे मेरी चेतना से निकालकर सतह पर लाकर उससे मुक्त होने में मदद की.

एक बार चेतना से पीड़ा निकल जाएगी तो देह को दोबारा स्वस्थ करने के लिए तो मैं हूँ ही. मैं किसी रोग को दूर करने के लिए कोई औषधि नहीं दे सकती क्योंकि मैं कोई आयुर्वेदज्ञाता नहीं हूँ, मैं बस वह वस्तुएं उपलब्ध करवा सकती हूँ जिससे मैंने अपना स्वास्थ्य वापस पाया है.

ऐसा मान लीजिये कि यह हर्बल टी न थाइरॉइड ठीक करती है, न बीपी, न शुगर, ना एसिडिटी, ना ही सिर्फ इससे वज़न कम होता है. लेकिन फिर भी अलग अलग समस्याओं से ग्रस्त लोगों पर इसने अलग अलग तरह से काम किया, किसी का थाइरॉइड नियंत्रण में आया, किसी का वज़न कम हुआ, किसी का बीपी, किसी का शुगर, किसी की एसिडिटी, किसी की हृदय की समस्या, एक मित्र का तो बुखार भी ठीक हुआ. यह चमत्कार कैसे?

क्योंकि मैं भी उन्हीं सारी ईर्ष्या, कुंठा, पीड़ा और प्रेम की यात्रा पार करके यहाँ तक पहुँची हूँ जिनसे आप जूझ रहे हैं इसलिए आपको बेझिझक कह पाती कि मैंने जीवन में बहुत सी भूलें की हैं, कृपया आप वह न करें. और साथ ही मेरी यह प्रार्थना जुड़ी रहती है कि मुझे देश को एलोपैथिक दवाइयों के मायाजाल से मुक्त कर दोबारा घरेलू उपचारों और आयुर्वेद की तरफ लौटाना है.

इस हर्बल टी में ऐसी सामान्य वस्तुएं डली है जो हम रसोई में उपयोग में लाते हैं, लेकिन यही सब वस्तुएं आपके शरीर के विष को बाहर निकालती है. कुछ मामूली आदतों को बदलकर जो हमने गलत जीवन शैली से अपनाई है, कुछ प्राकृतिक वस्तुएं ग्रहण कर अपने स्वास्थ्य को वापस पाइए.
एक बार फिर कहूंगी यह हर्बल टी आपको मुझसे लेने की भी आवश्यकता नहीं, इसकी रेसिपी भी मैंने प्रकाशित की है, आप पढ़कर खुद भी बना सकते हैं, बस शर्त यही है, आप को इस हर्बल टी से लाभ होता है तो कम से कम अपने संपर्क में ऐसी ही परेशानियों से जूझ रहे व्यक्तियों के लिए खुद अपने हाथों से बनाकर दीजिये, किसी भे तरह के लाभ को अपने तक सीमित मत रखिये, इसे अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाइए, अपने देश के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के उद्देश्य से इसे बनाइये तभी यह जादू काम करेगा.

फिर यह जादू सिर्फ हर्बल टी से नहीं हर उस वस्तु से होगा जो आप प्रार्थनापूर्वक दूसरों के लिए बनाएँगे, आइये हाथ बढ़ाएं और देश को स्वस्थ बनाएं.

धन्यवाद
जीवन शुभ हो
माँ जीवन शैफाली (Whatsapp 9109283508)

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