मेकिंग इंडिया

जीवन के सप्त रंग, मेकिंग इंडिया के संग
CORONA : एक प्रेम कहानी

चारों तरफ शंख, डमरू, मंजीरा, थाली और तालियों की गूँज थी और शीतल अपने कमरे में मुंह पर मास्क और कान में ईयर फोन फंसाए कोई अंग्रेज़ी गाना सुन रही थी…

दस मिनट बाद चन्दन कुछ गुनगुनाते हुए शीतल के कमरे में चाय पहुंचाने आता है…. “विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा… “

“प्लीज़ स्टॉप दिस नॉनसेंस, दिख नहीं रहा मैं गाना सुन रही हूँ”

मास्क से ढंके चेहरे से झांकती दो झील सी आँखों में चन्दन जैसे खो-सा जाता है फिर एकदम से होश में आकर कहता है – अरे मेमसाब, जिसे आप नॉनसेंस कह रही है, उसी नॉनसेंस की बदौलत आज तक यह गाँव सुरक्षित है, आज तो घर-घर में यह नॉनसेंस हुआ, सुना नहीं आपने, आप कहाँ से सुनेंगी कान में ये फुंतरू जो फंसा रखा है

“What is this फुंतरू?? it’s ear phone… और उसी शोर से बचने के लिए लगाया है, तुम अनपढ़ लोगों को यह तक नहीं पता जिस बीमारी से चीन तक नहीं जीत पाया उससे ये तुम्हारे घंटे घड़ियाल बचाएंगे, How rubbish”

ये कान में फुंतरू फंसाने के बजाय दोनों कान में ऊँगलिया डालकर भ्रामरी प्राणायाम कर रही होती तो ऐसी बात नहीं कहतीं आप. मेमसाब, जिसे आप शोर कह रही हैं, उसे हम ध्वनि ऊर्जा कहते हैं, और हमारे प्रधानमंत्री ही नहीं हर सनातनी जानता है कि व्यक्तिगत प्रार्थना जब सामूहिक प्रार्थना में बदल जाती है तो वो अवश्य फलीभूत होती है. हम यह तो नहीं जानते कि चीनी लोगों ने जो मायाजाल फैलाया है वो कितना सच और कितना झूठ है लेकिन हम यह जानते हैं कि जिस विषाणु से दुनिया नहीं जीत सकी उससे मेरा भारत ज़रूर जीतेगा क्योंकि यह वह देश है जहाँ एक ओर माँ काली भय जगा कर भयमुक्त करती है, तो माँ दुर्गा प्रेम करुणा और ममत्व से सबको बाँध लेती है.

वैरी फनी, तुम्हें पता भी है दुनिया में क्या चल रहा है, कितने देशों में लोग मर रहे हैं?

मेमसाब हमारी सरकार ने गाँव गाँव बिजली ही नहीं पहुंचाई, बल्कि इतना जागरूक भी कर दिया है कि हम घर बैठे दुनिया की खबर लेते रहें और अपने विवेक अनुसार सही, गलत का निर्णय ले सकें और गलत को सही बनाकर पेश किये जाने वाली चीज़ों से दूर रहकर देश को समृद्ध बनाने में अपना सहयोग देते रहें.

सहयोग माय फुट, दिन भर काऊ शिट लिपे कपड़े में घूमते रहते हो, जब बुलाओ तब मिट्टी से सने हाथ लेके खड़े हो जाते हो, कितनी बार बोला है मेरे पास जब भी आओ बाहर रखे सनिटाइज़र से हाथ धोकर आया करो.

हा हा हा अरे मेमसाब आप भी… काऊ शिट नहीं गोबर है, और यह गोबर नहीं हमारे लिए गौ माता का दिया हुआ वर है… आप यहाँ अपनी फिल्म बनाने आई है तो यहाँ की वास्तविक जीवन शैली से भी परिचित हो जाइए, अब तो आदत डाल ही लीजिये… कम से कम घर में तो यह मास्क लगाकर मत घूमा कीजिये, और कुछ देर छत पर जाकर धूप का सेवन भी किया कीजिये तो हमारी तरह सदैव स्वस्थ रहेंगी… नाक पर से नकली सुगंध वाला रुमाल हटाकर, एक बार गौशाला की वास्तविक सुगंध तो अनुभव कीजिये देखिएगा आप भी यहीं की होकर रह जाएँगी…

यहाँ!!! नो वे, बस ये फिल्म पूरी होने ही वाली है, फिल्म का क्लाइमेक्स भर बचा है, एक दो दिन में वो भी पूरा हो जाएगा और मैं यहाँ से छू मंतर….

क्लाइमेक्स कहीं एंटी क्लाइमेक्स ना हो जाए देखिएगा…. (चन्दन बहुत धीमी आवाज़ में बुदबुदाता है)

एक बात बताओ चन्दन तुम्हारी भाषा इन गाँव वालों की भाषा से बहुत अलग है, मीन्स तुम कुछ अंगरेज़ी शब्दों का उपयोग भी कर लेते हो, मतलब पढ़े लिखे हो फिर इस गाँव में क्यों पड़े हो, शहर में कोई अच्छी नौकरी ढूंढ कर अपना भविष्य संवारो…

चोरी पकड़ी गयी हो वाले भाव छुपाकर चन्दन अचानक से अपनी भाषा बदलते हुए बोलता है – अरे नाही मेमसाब हम कहाँ कछु जानत हैं, वो तो आप जैसन लोग आ जाते हैं तो एक दो अक्छर मुईं अन्ग्रेज्जी के सीख गए हैं… और अब गाँव बचे कहाँ हैं, सरकार सबका तो शहरीकरण कर रही है… हम तो कहते हैं गाँवों के शहरीकरण के बजाय शहरों का गांवीकरण हो जाना चाहिए तो ई मुआं करोना हमरा कच्छु नहीं बिगाड़ सकत… ये पिज्जा, नूडल्स वाली संस्कृति ने ही हमरे देश का कबाड़ा किया धरा है… अंगरेज चले गए अपना खान पान छोड़ गए…

हा हा हा अंगरेज़ नहीं, पता भी है ये नूडल्स भी इन्हीं चीनियों की देन है – शीतल चन्दन की मूर्खता का मज़ाक उड़ाने के अंदाज़ में कहती है.

पता है तभी तो… पहले खान पान बिगाड़ा, फिर करोना दिया, अब सबके पेट में देखना नूडल्स जैसे केंचुएँ निकलेंगे थोड़े साल बाद यदि यह सब बंद नाही किया तो..

हा हा हा कुछ नहीं होता, आजकल के फास्ट ज़माने में इंस्टेंट फ़ूड की ज़रूरत है… काम आसान हो जाता है…

एक बात बताइये मेमसाब यह भागा दौड़ी, ये फास्ट जीवन, इन सब से क्या लाभ… हम क्यों इतना फास्ट जीना चाहते हैं, सहज पके सो मीठा होय की तरह जीवन को भी धीरे धीरे जीकर उसका पूरा आनंद क्यों नहीं लेते…

भाई दुनिया इतनी तेज़ी से आगे बढ़ रही है उसके साथ हमें भी अपना पेस बनाना पड़ता है वर्ना हम पिछड़ जाएंगे, और एक ही तो जीवन मिला है उसको ही तो भरपूर जीने के लिए पैसा चाहिए…

पहली बात हमारा देश विदेशी आर्थिक नीतियों से चल ही नहीं सकता, आप खुद ही देख लीजिये लॉक डाउन के दौरान ये मॉल और सुपर मार्केट बंद भी हो जाए तो ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि हमारे पड़ोस में जो किराने वाला है वो हफ्ते दो हफ्ते के लिए उधारी पर भी राशन दे सकता है और वस्तु विनिमय से भी यह काम चल सकता है, आप मॉल या सुपर मार्केट में उधारी या वस्तु विनिमय नहीं चला सकते… और पैसा आपको सिर्फ इस जीवन के लिए चाहिए ना? उतना पैसा मान लो आपको मिल गया, पूरा जी भी लिया जैसा आप चाहते हो, क्या मरने के बाद उसे साथ लेकर जाएंगे… या अगले जन्म भी ऐसी ही भागा दौड़ी करेंगे “सबकुछ” पाने की चाहत में.

अगला जन्म??? हे सुनो? कैसा अगला जन्म? कभी किसी ने देखा है अगला जन्म, जो है यही है… अच्छा बताओ तुम्हें अपना पिछला जन्म याद है????

यदि हाँ कहूं तो? – इस बार चन्दन गंभीर था…

हा हा हा अरे बकवास है सबकुछ… अच्छा छोड़ो ये बताओ तेज़ चलने से आर्थिक रूप से मज़बूत नहीं होगा क्या भारत… दुनिया की रेस में भारत को भी अपना स्थान बनाना है.

अपनी संस्कृति को भुलाकर स्थान पा भी लिया तो… चन्दन कोई गंभीर बात करते करते रुक जाता है…. अरे छोड़िये ना मेमसाब हम ठहरे गंवार, आप पढ़ी लिखी हैं, हमसे अधिक जानती हैं… आप तो चाय पीजिये ठंडी हो गयी… चाय पीकर आप तैयार हो जाइएगा हमें चौधरी साब के घर जाना है उन्होंने मिलने बुलाया है आपको…

ह्म्म्म okeys…

And please don’t cover your face, let some sun rays fall on it… it will glorify your beauty…

चन्दन तुम अंगरेज़ी जानते हो!!!!! Then why are you…. शीतल अचंभित होकर कुछ कहना चाहती है तभी चन्दन ठहाका मार कर हंस देता है…. अरे नहीं मेमसाब कल हमारे मास्टर साब से ये इकलौता वाक्य सीखकर आया … क्या बोलते हैं उसको… आपको इम्परेस करने… पूरी रात रटते रहे तब जाकर याद हुआ… कहता हुआ चन्दन तुरंत कमरे से बाहर आ जाता है…
शीतल उलझन भरी नज़रों से दरवाज़े को तकती रह जाती है….

***

शीतल जी आशा है आपको हमारा गाँव पसंद आया होगा… चौधरी साहब शीतल का स्वागत करते हुए बोलते हैं…

शीतल चोर नज़रों से चन्दन की तरफ देखती है तो वो इस बात पर हँसता हुआ दिखाई देता है…

वो चन्दन की तरफ आँखें तरेरते हुए जवाब देती है… पूरा गाँव तो नहीं देखा फिल्म की शूटिंग के लिए जिन जगहों की आवश्यकता थी वहीं बस घूमी हूँ, सच कहूं चौधरी साहब उतनी जगह घूम कर ही मन भर गया तो गाँव देखने का मन ही नहीं हुआ…

चौधरी साहब चन्दन को लगभग डांटने के अंदाज़ में कहते हैं – क्यों चन्दन, शीतल बिटिया को गाँव क्यों नहीं घुमाया, बेचारी क्या तस्वीर लेकर जाएगी यहाँ की…

चौधरी साहब इनको गाँवों की दयनीय तस्वीर ही चाहिए थी जिस पर फिल्म बनानी थी, सो वही दिखाया जो इनकी फिल्म बनाने में सहायक हो, सच्ची का गाँव दिखा देते तो फिल्म इनकी अधूरी रह जाती…

शीतल आश्चर्य से चन्दन की तरफ देखती है… देखो आज तो कर्फ्यू लगा है अब कैसे देखेंगे… कल सुबह ले चलना… लेकिन ये कोरोना के चलते कहीं जाना भी तो मुहाल है…

हमारे गाँव को देवी का वरदान प्राप्त है इसलिए यहाँ कुछ नहीं होना है, और वैसे भी आप सबसे मीटर भर की दूरी बनाकर चलती हैं, मना करने के बाद भी पूरा मुंह लपेट कर आई हैं…

क्या कहते हो चन्दन सबको मास्क लगाने का आदेश जारी हो गया है… तुम खुद भी तो मुंह ढंककर आये हो… चौधरी साहब बीच में बोल पड़ते हैं.

हम कहाँ मना कर रहे हैं… खूब पहनों, लेकिन दिन भर कमरे में बंद इंसान के शरीर पर धूप ना पड़े और धूप में भी ये रेशमी या नायलोन का मास्क मुंह पर ओढ़कर चले तो कौन बीमार नहीं होगा… हम तो दिन भर धूप में मेहनत करते हैं और राजा का आदेश हुआ है इसलिए मुंह भी ढांक लिए हैं . और अब तो राजा ने मास्क की जगह गमछा लपेटने को कहा है, देखो हम तो शुरू से ही गमछा लपेट रहे हैं, देखना धीरे धीरे करके ऐसे ही वो सबको सूती धोती पर ले आएँगे… भई राजा हो तो ऐसा… और इनको हम कहते हैं कुछ देर धूप में आ जाया करो तो इनको तो अपने गोरेपन की इतनी चिंता है कि…

अरे बाबा धूप में चेहरे पर रेशेस आ जाते हैं एलर्जी है भाई मुझे इसलिए…

जमाने भर की क्रीम थोपकर रखेंगी मुंह पर तो यह सब तो होना ही है… हमने कहा था हम मिट्टी का उबटन बना देते हैं

छी वो जिसमें काऊ शिट मिलाते हो तुम

मेमसाब गोबर कहिये… इस बार चन्दन की आँखों में आदेश था जैसे

शीतल आगे कुछ बोल न पाई वो तुरंत चौधरी जी की तरफ मुखातिब होकर बोली, चौधरी साहब जिस तरह से कोरोना फ़ैल रहा है सोच रही हूँ कल ही निकल जाऊं यहाँ से, फिल्म का क्लाइमेक्स बचा है वो बाद में आकर पूरा कर लूंगी…

अरे मेमसाब आप तो बुरा मान गयी… जाने की बात सुनकर जैसे चन्दन विचलित हो गया… यहाँ रहेंगी तो सुरक्षित रहेंगी अभी आप यात्रा पर मत निकालिए

चन्दन ठीक कह रहा है आज के कर्फ्यू के बाद प्रधानमंत्री क्या आदेश देते हैं एक बार देख लीजिये फिर चले जाइएगा…

नहीं अब यहाँ दम घुटने लगा है मेरा… दिन भर वही काऊ…. आई मीन गोबर और गायों के बीच रहकर ….

चन्दन ये गलत बात है… मैं थानेदार साहब से विशेष आज्ञा दिलवा देता हूँ बिटिया को पूरा गाँव दिखाओ और वो जाना चाहे तो सुबह उनके जाने की व्यवस्था कर दो…

जो आज्ञा चौधरी जी… चन्दन और शीतल दोनों नमस्ते करके वहां से निकल आते हैं…

आप कल वाकई जाना चाहती हैं? – चन्दन के स्वर में उदासी थी
ह्म्म्म
आप वाकई गाँव देखना चाहती हैं…. ???
ह्म्म्म
तो ये जीप छोड़कर आपको उस बैलगाड़ी में बैठना होगा…

फिर वही गाय???
गाय नहीं बैल
हाँ मतलब एक ही बात है, है तो जानवर ही
आपको गाँव देखना है या नहीं…
हाँ देखना तो है… चलो बैलगाड़ी पर… जाते हुए क्यों तुमको नाराज़ करूं …

चन्दन मुस्कुराते हुए कहता है… बस एक आखरी बात और मान लीजिये…. मैं आपसे एक मीटर की दूरी बनाकर चलूँगा पूरे समय, यदि आप चेहरे से यह नकाब निकालकर चले…

तुम मेरे मास्क के पीछे क्यों पड़े हो, प्रधानमंत्री का आदेश है…

जानता हूँ, आप सबसे दूर रहेंगी, किसी चीज़ को नहीं छुएंगी, और घर जाकर ढेर सारा डेटोल डालकर नहा लीजियेगा लेकिन बस कुछ देर की बात है ये मास्क हटा लीजिये, चेहरे पर थोड़ी धूप भी पड़ने दीजिये…

चलो ठीक है तुम भी क्या याद करोगे… कहकर शीतल मुंह से मास्क हटा देती है…

बैल के गले में घंटी बंधी थी… जिसकी खनकती आवाज़ और बैल के चलने की थाप से जैसे कोई मधुर संगीत निकल रहा था.. और शीतल के चेहरे पर कुछ अजीब भाव थे …

क्या हुआ मेमसाब…

ऐसा लग रहा है जैसे इस गाँव को मैंने पहले भी देखा है और ऐसे ही पहले भी कभी बैलगाड़ी में बैठी हूँ

और ऐसे ही आपने गाना गाया होगा… कितनी दूर अब कितनी दूर है… ए चन्दन तोरा गाँव हो… चन्दन ज़ोर से ठहाका लगाता हुआ बोलता है… मेमसाब अगला पिछला जन्म कुछ नहीं होता ना???

पता नहीं… लेकिन वो शीतला माता का मंदिर … शीतल दूर मंदिर से आती घंटियों की आवाज़ सुनकर कहती है

पुरोहित जी रात की आरती कर रहे हैं, आज कर्फ्यू के चलते अकेले ही है वरना वहां बहुत भीड़ होती है… हमारे यहाँ शीतला सप्तमी को शीतला माता पूजी जाती है, माँ को भोग का प्रसाद भी एक दिन पहले बने बासी भोजन का लगता है और दिन भर यही भोजन खाया जाता है. ब्रह्म मुहूर्त में जब सूर्य देवता भी प्रकट न हुए हो महिलाएं ठन्डे पानी से नहाकर शीतला मंदिर में माँ की पूजा करती हैं. महिलाएं शीतला माता को अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना करने जाती हैं,
पूरे रास्ते उन्हें दंडवत होकर जाना होता है वो भी अप्रेल की तपती सड़क पर. ऐसे में बाकी लोग सड़क को पूरी तरह से भिगोकर ठंडा करते जाते हैं.

और फिर इस पूजा का समापन होता है अग्नि पूजा से… ये विरोधाभास सिर्फ हमारे यहाँ ही मिलेगा कि शीतलता के लिए पूजी जाने वाली माँ के पूजा का समापन हम अग्नि पूजा से कर रहे हैं. क्योंकि ये अग्नि ही शीतलता की वास्तविक परिभाषा सिखाती है. जो इस अग्नि परीक्षा से गुज़रा हो उसे ही शीतला माता का वास्तविक अर्थ समझ आएगा. और समझ आएगा कि क्यों क्रोध की देवी काली माई को शीतलता के लिए भी पूजा जाता है. – यह सब बताते हुए चन्दन की आँखों के किनारों से दो बूँद टपक जाते है…. तभी उसे ख़याल आता है…. लेकिन आपको कैसे पता वो शीतला माता का मंदिर है???

पता नहीं मुझे ऐसा लगा…

मेमसाब अगला पिछला जन्म कुछ नहीं होता… चन्दन एक रहस्यमयी मुस्कान के साथ कहता है…

मुझे घर ले चलो … शीतल तुरंत चेहरे पर मास्क पहन लेती है… बैलगाड़ी घर की तरफ मोड़ दी जाती है, चन्दन लौटते हुए कुछ गुनगुनाता है जिसको सुनकर शीतल और विचलित हो जाती है

ताज़ा शब्द भी उस तक आते आते
इतना बासी हो जाता है
जैसे ज्वालामुखी से फूटा लावा
उसके चरणों तक पहुँचने तक
बन जाता है
ठोस और ठंडा लोहा…

उसके नीम से कड़वे व्यवहार का लेप
ठीक कर देता है आत्मा तक पर पड़े
चेचक के दाग
हाथ में तीखे शब्दों की बुहारी लिए
वो साफ़ कर देती है दिमाग़ का कचरा

अपने ही विचारों के गर्दभ पर सवार
ज्वरासुर, ओलै चंडी बीबी, एवं रक्तवती
को साथ लिए वो देर रात तक जागती है
“जीवन” के रोगी की प्रतीक्षा में

जिनके रोग हरते हुए भी
वो कभी बीमार नहीं होती

क्योंकि प्रेम की अग्नि पर
देवत्व का छिट्टा देकर
उसे इतना ठंडा और पवित्र कर दिया गया है
कि अब वो शीतला देवी के रूप में
पूजी जाती है
जिस पर भोग भी चढ़ता है
तो बासी प्रसाद का…

उस शाम का भ्रमण शीतल के मन में बहुत बड़ी हलचल पैदा कर जाता है, उसके सामने बार बार वो मंदिर और चन्दन का गीत गूंजता है और उसे लगता है वह इस मंदिर और उस गीत को पहले से जानती है….

सुबह शीतल बिना किसी को सूचना दिए अपने आप स्टेशन पहुँच जाती है… ट्रेन में बहुत कम यात्री है और जो हैं वो भी सब मास्क लगाए दूर दूर बैठे हैं…

तभी शीतल के फोन की घंटी बजती है… नंबर अनजान है फिर भी वो उठा लेती है… “हेलो”

आप बिना बताए क्यों चली गयीं, मैंने कुछ चीज़ें आपकी सुरक्षा के लिए बना रखी थी जो आपको देना थी… यात्रा पर जा रही थी आपको साथ लेकर जाना चाहिए था…

Oh come on I don’t want anything made of cow dung plz…

गौ माता सिर्फ गोबर ही नहीं देती मेमसाब, शुद्ध घी बनाया था आपके लिए तुलसी और बेलपत्र डालकर नाक में डालने के लिए… कभी आवश्यकता पड़ती तो काम आ जाता…

तुम चीन जाकर बेचो अपना ये घी खूब कमाओगे, वहां जितने मर रहे हैं ना सबको बचालो जाकर, मुझे कुछ नहीं होगा…

मेमसाब वहां का खान पान और जीवन शैली ऐसी है कि हम चाहकर भी कोई चमत्कार नहीं कर सकते… ये चमत्कार सिर्फ भारत की मिट्टी में ही हो सकता है…

अरे चमत्कार भी देश देखकर होता है… मतलब किसी काम का नहीं तुम्हारा घी…

काम का है यदि वहां पर कोई हमारी जीवन शैली और खान पान अपनाए तो वहां भी चमत्कार हो जाएगा, सूर्य ऊर्जा का विज्ञान समझें तो चमत्कार हो जाएगा, हमारे आयुर्वेद का ज्ञान….

देखो मेरे सामने तो कह दिया किसी और के सामने मत कहना लोग जाहिल कहकर हँसेंगे तुम पर… शीतल ने बीच में ही टोक कर कहा

I don’t care about the world, what they think about me, I am worried about you Shital, plz don’t hesitate to call me on this number whenever you need… इतना कहकर चन्दन फोन रख देता है

शीतल एक बार फिर अचंभित होती है… फिर सोचती है, फिर कोई नया अंगरेज़ी वाक्य सीख लिया होगा सोचकर हंसकर फोन रख देती है

दिल्ली से फ्लाइट पकड़कर फिर न्यू यॉर्क जाना है, फिल्म की एडिटिंग पूरी करना है…. और भी न जाने क्या क्या सोचते हुए शीतल की आँख लग जाती है तभी अचानक से कोई उसे झकझोरते हुए उठाता है मैडम स्टेशन आ गया है उतर जाइए और यहाँ कोई ठिकाना ढूंढिए अब ट्रेन इसके आगे नहीं जाएगी… लॉक डाउन लग गया है देश भर में सारी गाड़ियां बंद हो गयी है.

क्या मतलब मुझे यहाँ से ट्रेन बदलकर दिल्ली तक जाना है मेरी फ्लाइट है वहां से

मैडम सारी फ्लाइट भी बंद हो गयी है, ना अब इस देश में कोई आ सकता है ना यहाँ से कोई जा सकता है…

अरे ऐसे कैसे, यहाँ इस गाँव में कैसे रुकूँगी मैं, मैं किसी को जानती भी नहीं… और आप कौन हैं

मैं टिकट चेकर हूँ, आइये आपको सुरक्षित जगह पहुंचा देता हूँ…

नहीं मैं खुद चली जाऊंगी यहाँ किसी होटल में…

मैडम यह बहुत छोटा सा नगर है, यहाँ की होटल महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं. यहाँ कुछ सम्प्रदाय के लोग जानबूझकर कोरोना फैलाने के लिए जगह जगह थूक रहे हैं, देखिये ट्रेन के बाहर उन लोगों को, जो पुलिस पर पथराव कर रहे हैं… आइए ज़िद मत कीजिये आपको सुरक्षित कहीं पहुंचा दूं, कहीं इन लोगों के हाथ पड़ गईं तो…

नहीं नहीं… रुकिए मैं अपना सामान उठा लूँ …

रुकिए सामान मत छुइए, देखिये आपके बैग के आसपास कुछ लोग थूक कर गए हैं… रुकिए मैं पहले इसे सेनिटाइज़ करता हूँ…

कैसे जाहिल लोग हैं, इतना नहीं जानते हमें मारने चले हैं तो खुद भी तो मरेंगे

मैडम इस रोग का संक्रमण बहुत अधिक हो रहा है लेकिन उतना अधिक घातक नहीं हुआ है हमारे देश में अभी… कुछ सावधानियां बरतने से और घरेलू या आयुर्वेदिक आहार व्यवहार करने से बहुत सारे लोग बचे हुए हैं, यहाँ आपको हर समय सेनिटाइज़र नहीं मिलेगा इसलिए आप यहाँ के आयुर्वेदिक दवाखानों से कुछ हर्बल या गोमय….

शीतल गोमय शब्द सुनकर ही तिलमिला जाती है और टीसी की पूरी बात सुनने से पहले ही कहने लगती है आप सिर्फ मुझे सुरक्षित किसी जगह पर पहुंचा दीजिये बाकी मैं अपनी देखभाल खुद कर लूंगी…

जैसी आपकी मर्ज़ी … आइये

आप मुझे यहाँ क्यों लाए हैं? देखिये मैडम यहाँ पर कुछ लोगों ने जानबूझकर बहुत ज़्यादा संक्रमण फैला दिया है आपका टेस्ट करना बहुत ज़रूरी है

लेकिन मुझे क्या हुआ है, ना बुखार है, ना खांसी

हमें ऊपर से आदेश हैं यहाँ उतरने वाले हर व्यक्ति का टेस्ट होगा और फिर आप तो विदेश से आई हैं, मैडम आप सहयोग कीजिये वरना हमें…

ठीक है कर लीजिये टेस्ट पता है नेगेटिव आनेवाला है

कुछ घन्टों बाद –

मैडम आपको कुछ दिन क्वारंटाइन में रहना होगा आपका टेस्ट पॉजिटिव आया है

what rubbish!!! एक अच्छे भले इंसान को आप बीमार कैसे घोषित कर सकते हैं

आप पर संक्रमण हुआ है तभी टेस्ट पॉजिटिव आया है

मैं नहीं मानती, आप मुझे दिल्ली फोन लगाने दीजिये मैं अपने डॉक्टर से बात करना चाहती हूँ

आप चाहे जिसको फोन लगा सकती हैं लेकिन रहना आपको क्वारंटाइन में ही पड़ेगा…

लेकिन… शीतल कुछ बोलने के बजाय अपने डॉ मित्र को फोन लगाती है…

“लेकिन संजीव मैं कैसे रह सकती हूँ यहाँ, यहाँ इतने मरीज़ है और कोई ठीक से व्यवस्था भी नहीं है… मैं सच में बीमार हो जाऊंगी”

“देखो शीतल यदि तुम्हारा टेस्ट पॉजिटिव आया है तो मैं भी कुछ नहीं कर सकता तुम्हें कुछ दिन वहीं रहना होगा…”

लेकिन संजीव… फोन कट जाता है और शीतल निढाल होकर वहीं बैठ जाती है, कुछ लोग आते हैं उसके चारों तरफ सेनिटाइज़र छिड़कते हुए एम्बुलेंस में बिठाते हैं और ऐसे उसे क्वारंटाइन में ले जाते हैं जैसे किसी ज़माने में कुष्ट रोगियों को ले जाया जाता था और कोई उनके आसपास भी जाना पसंद नहीं करता था…

एक फोटोग्राफर दूर से उसकी फोटो खींचता हुआ दिखाई देता है

वो समझ जाती है कल अखबार में उसकी फोटो छपने वाली है कि एक और कोरोना की मरीज़ फलाने शहर में मिली जो विदेश से आई थी….

अकेले कमरे में पड़े पड़े उसे ख़याल आता है उसने चन्दन के कहने पर कुछ देर के लिए मास्क हटा दिया था और गाँव में घूमती रही थी, हो सकता है वहीं से यह रोग लगा हो… लेकिन उस गाँव में तो एक भी रोगी नहीं था फिर… क्या ट्रेन में?? लेकिन कुछ घंटों की यात्रा में रोग लग जाना और टेस्ट का तुरंत पॉजिटिव आना भी संभव नहीं… फिर…

शाम तक शीतल की हालत और खराब हो जाती है रह रहकर उसे खांसी आने लगती है सांस फूलने लगती है… कोरोना के लक्षण प्रकट होने लगते हैं…

शीतल की घबराहट और बढ़ जाती है उसे यकीन हो जाता है कि उसे कोविड-19 का संक्रमण हो गया है… तभी उसकी नज़र फोन पर जाती है चन्दन ने जिस नंबर से फोन लगाया था उस नंबर से उसके whatsapp सन्देश पड़े हैं
“आप ठीक से पहुँच गयी होंगी अपने गंतव्य पर आशा करता हूँ”
“देश में कर्फ्यू की अवधि बढ़ गयी है और ट्रेन भी बंद हो गयी हैं, आप कहाँ हैं?”

शीतल तुरंत उस नंबर पर फोन लगाती है … चन्दन…. और कुछ कहने से पहले ही फूट फूटकर रो पड़ती है…. और रोते हुए पूरा किस्सा सुनाती है…

Sheetal, don’t worry I am reaching there very soon, you will be alright बस कुछ घंटों की बात है शीतल फिर मैं तुम्हारे पास होऊंगा…

चन्दन का बात करने का तरीका पूरी तरह बदला हुआ था, मेमसाब की जगह शीतल ने और आप की जगह तुम ने ले ली थी… और शीतल को भी लगा जैसे इस संकट के घड़ी में कोई बहुत अपना उसे लेने आ रहा है…

Madam I am Dr Biswas, I have permission to take patient to Delhi …

लेकिन डॉ साहब हमारे पास इतनी गाड़ियां नहीं है कि मैडम को अलग से गाड़ी दे सके दिल्ली भेजने के लिए..

उसकी चिंता आप मत कीजिये मेरे पास अपनी गाड़ी है और उसमें वो सारी सुविधाएं हैं चाहें तो आप किसी को भेजकर चेक करवा लीजिये….

शीतल को फिर उसी तरह सेनिटाइज़ करते हुए चन्दन की गाड़ी में पीछे बिठा दिया जाता है, चन्दन आगे ड्राईवर की सीट पर बैठ जाता है…

बहुत दूर निकल आने पर चन्दन गाड़ी रोकता है और शीतल को आगे बिठाने के लिए हाथ बढ़ता है…

नहीं चन्दन मुझे मत छुओ वरना तुम्हें भी…

मुझे कुछ नहीं होगा, देखो मैंने दस्ताने पहने हैं, तुम्हारी तरह मास्क लगाया है, हाथ सेनिटाइज़ किये हैं… तुम आगे आओ मेरे साथ वाली सीट पर बैठो और सारी सुरक्षा का इंतज़ाम किये हुए भी यह याद रखो कि तुम्हें कुछ नहीं हुआ है, तुम पूरी तरह स्वस्थ हो… मन से यह भय निकाल दो, यह भय तुम्हें जकड़ रहा है और तुम्हारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को और कम कर रहा है… वाकई यह रोग हुआ है तब भी अपनी जिजीविषा को बनाए रखो, अपने आत्मबल को मज़बूत करो… हम विष्णु को पूजने वाले लोग है हमें यह छोटा सा विषाणु हरा नहीं सकता…

लेकिन…

आओ शीतल चन्दन फिर हाथ बढ़ाता है… चन्दन की आँखों में इतना अपनापन और चिंता उसने पहले कभी नहीं देखी थी… वह चन्दन का हाथ थाल लेती है…

सबसे पहले बाहर आकर कुछ देर धूप में बैठो… पता है सूर्य की किरणों में इतनी क्षमता होती है वह किसी विषाणु को शरीर में टिकने नहीं देती

और जब भी पानी पीना हो यह वाला पानी पीना, इसमें तुलसी की पत्तियाँ डाली है… और आज पूरे समय नारियल पानी पर रहना है… नो सॉलिड फ़ूड, ओनली लिक्विड डाइट… सिर्फ नारियल पानी और साइट्रस फ्रूट्स जूस… और यह तुलसी और बेलपत्र में पकाया हुआ गाय का घी है इसकी एक एक बूँद नाक में टपकाकर, सर उठाकर कुछ देर आँखें बंद करके बैठ जाओ सांस लेने में आसानी होगी…

और दवाइयां…

पहले हम जहाँ जा रहे हैं वहां एक बार फिर तुम्हारा टेस्ट होगा…

कहाँ दिल्ली???

नहीं, अपने गाँव

नहीं मैं गाँव नहीं जाऊंगी … वहां कोई इलाज करने वाला नहीं मैं मर जाऊंगी…

फिर वहां से क्यों निकलना चाहती थी वहां तो सारी व्यवस्थाएं थी… फिर क्यों कह रही थी फोन पर कि मर जाऊंगी… नहीं शीतल इस बार नहीं मरने दूंगा तुमको… अब इस जन्म में नहीं… कदापि नहीं…

क्या मतलब…

सबसे पहले ये अखबार देखो, इसमें साफ़ लिखा है अस्सी प्रतिशत लोग खुद से ठीक हो जाते हैं क्योंकि शरीर का अपना इम्यून सिस्टम होता है, ऐसे किसी भी बाहरी बैक्टीरिया या वायरस के आक्रमण से शरीर के अन्दर जो सेना बैठी है वो आक्रमण करके प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेती है, दूसरी बात यह कोई नया वायरस नहीं है, यानी हमारा शरीर इसे पहले से पहचानता है और उससे लड़ने की क्षमता पहले से हासिल कर चुका है, और एक डॉक्टर होने के नाते मैं जानता हूँ कि एक वायरल इन्फेक्शन वाले मरीज़ की आवश्यकता क्या है और तुम्हारा केस तो संक्रमण से अधिक संक्रमण के भय का है…. इसलिए तुम तो अपनी इच्छाशक्ति के बल पर ही फिर से सामान्य हो जाओगी, स्वस्थ तो तुम हो ही 🙂

देखो शीतल Covid-19 के संक्रमण का पता जिस किट से लगाया जा रहा है उसका नाम है “RT-PCR, Reverse Transcription Polymerase Chain Reaction, और इस किट के बनाने वाले ने खुद लिखा है कि यह सिर्फ रिसर्च के लिए बना है, ना कि किसी बीमारी के डायग्नोसिस के लिए. और सुनो –

In March 2020 China reported problems with accuracy in their test kits. In the United States, the test kits developed by the CDC had “flaws;” the government then removed the bureaucratic barriers that had prevented private testing.

Spain purchased test kits from China that were supposed to detect at least 80% of those infected and tested, but it was found that only 30% were detected.

80% of test kits the Czech Republic purchased from China gave wrong results.

Slovakia purchased 1.2 million test kits from China which were found to be inaccurate. Prime Minister Matovič suggested these be dumped into the Danube

Ateş Kara of the Turkish Health Ministry said the test kits Turkey purchased from China had a “high error rate” and did not “put them into use.”

The UK purchased 3.5 million test kits from China but in early April 2020 announced these were not usable.

Data From Internet

और ऐसे टेस्ट किट पर मुझे कोई भरोसा नहीं, कोरोना तो क्या किसी भी वायरस का कोई अटैक हुआ भी है तो बहुत मामूली बात है, जिसका एक डॉ होने के नाते मैं आसानी से इलाज कर सकता हूँ. बस गाँव में तीन दिन रहना है चौथे दिन तुम चाहो तो टेस्ट करवाकर जहाँ जाना हो चले जाना…
चन्दन की आवाज़ में इतनी दृढ़ता थी कि शीतल मना नहीं कर सकी, उस पर से उसे यह पता चल गया था कि चन्दन वास्तव में डॉ बिस्वास है और रूप बदलकर गाँव में रह रहा है तो चन्दन के प्रति उसका विश्वास दृढ़ हो चला था….

तीन दिन की चन्दन की दिन रात की सेवा और जो कुछ दवाइयाँ वह अपने हिसाब से देता रहा, उसके अलावा रोज़ कुछ घंटे धूप में बैठने के साथ जो भी आयुर्वेदिक उपाय वो बताता रहा शीतल चुपचाप करती रही… उसे वह लगातार किसी डॉक्टर के साथ अंगरेज़ी में बात करते हुए सुन रही थी, बीच में एक बार कोई वैद्य भी देखने आये थे और कुछ उपाय बता गए थे…

सारी असहमतियों के बाद भी उसे पूरा विश्वास था कि चन्दन ही उसे बचा सकता है… इस बीच उसकी खांसी भी बहुत कम हो गयी थी, बुखार तो आया ही नहीं था…

चौथे दिन शाम को शीतल का फिर से टेस्ट हुआ…. शीतल बहुत घबराई हुई थी…..

आओ शीतल घर चलें रात में फोन पर मेरा डॉ मित्र रिपोर्ट बता देगा

जी…. शीतल अपनी घबराहट छुपाते हुए बोली

रात में शीतल बाहर बालकनी में खड़ी होकर चन्दन की प्रतीक्षा कर रही है, कि वो आकर उसकी रिपोर्ट बताएगा…

तभी सब जगह की लाइट एक साथ बंद हो जाती है… शीतल एकदम घबरा जाती है… इतना अन्धकार….

तभी उसे लगता है उसके पीछे से कोई रोशनी उसकी तरफ आ रही है…

रोशनी करीब आती है तो देखती है चन्दन हाथ में दिये की थाली लिए उसकी तरफ बढ़ रहा है… थाली उसके चेहरे की तरफ ले जाते हुए कहता है – आओ ये दिये अपनी बालकनी में लगाएं…

लेकिन ये लाइट को क्या हुआ एकदम से बंद हो गयी, यहाँ तो लाइट जाती नहीं ना अब…

हाँ हमारे प्रधानमंत्री की कृपा से अब गाँव में लाइट नहीं जाती, ये तो हम सबने जानबूझकर बंद की है…

क्यों भला ?

हमारे प्रधानमंत्री का आदेश जो हुआ है… अज्ञान का अन्धकार मिटाने के लिए ज्ञान, आस्था और एकता का दीप जलाना है…. कहा था ना व्यक्तिगत प्रार्थना जब सामूहिक प्रार्थना में बदल जाती है तो वो अवश्य पूरी होती है. देखिये सामने सबके घरों में…
शीतल देखती है गाँव के सब घरों की लाइट बंद है और सब अपने घर के बाहर दीपक जला रहे हैं…

यह दृश्य देखकर शीतल की आँखें भर आती है….. चन्दन एक बात बताओ, अपना डॉक्टरी का पेशा छोड़कर नाम बदलकर इस गाँव में क्यों रहते हो…

क्योंकि मैं जानता था तुम मुझे यहीं मिलोगी, पिछले जन्म की कुछ झलकियाँ और अपना पिछले जन्म का नाम चन्दन मुझे पता चला था… और किसी स्वप्न में यह भी देखा था कि ऐसी ही किसी महामारी में तुमने देह त्याग दी थी और मैं शीतला माता के मंदिर में तुम्हारी मृत देह को ले जाकर प्रार्थना कर रहा हूँ …

फिर??

इसके आगे मैं कुछ नहीं जानता लेकिन मुझे कोई बहुत गहरी पीड़ा इस गाँव तक खींच लाई और फिर इस गौशाला में रहते हुए बहुत सारे रोगों पर रिसर्च किया तो पता चला बहुत से असाध्य रोग गाँव की प्राकृतिक जीवन शैली, सूर्य किरणें और पंचगव्य से ठीक हो जाते है…

चन्दन मेरी रिपोर्ट….

मेमसाब अब ये कोरोना तो जीवन भर आपके साथ रहने वाला है….

क्या मतलब??

मतलब यह कि मैं हूँ आपका वो कोरोना और आप मेरी करीना… हा हा हा, मेमसाब अब मास्क हटा दीजिये… हमारे देश से कोरोना भले ना जाए उसका भय चला गया है

शीतल मुस्कुराते हुए अपने चेहरे से मास्क हटा देती है और कदम आगे बढाते हुए कहती है और ये एक मीटर की दूरी?

मेमसाब आप भारत भूमि पर खड़ी हैं, यहाँ देह नहीं आत्मा का मिलन होता है, जो पिछले कई जन्मों पहले ही हो चुका है… हाँ इस जन्म में इस एक मीटर की दूरी के लिए आपको 35 मीटर चलकर आना होगा…

मैं सच ही कहती थी गाँव के लोग बड़े अनपढ़ होते हैं – शीतल हँसते हुए बोलती हैं – डॉ बिस्वास आपका तो गणित भी बहुत कमज़ोर है, एक मीटर की दूरी के लिए भला 35 मीटर का चक्कर क्यों लगाऊँगी

चन्दन शीतल का चेहरा अपनी हथेली में थामते हुए कहता है, 35 मीटर का एक चक्कर नहीं 5 मीटर के सात चक्कर अग्निकुंड के चारों तरफ लगाएंगे तभी तो इस जन्म की यह एक मीटर की दूरी कम होगी ना… और यह भी हमारे आयुर्वेद में लिखा है कि चन्दन का लेप लगाने से देह शीतल हो जाती है 🙂

शीतल शरमाकर नज़रें झुका लेती है…. तभी सब जगहों कि बीजली एकदम से जल जाती है…

चन्दन कहता है – लो हो गए 9 मिनट पूरे, अब आप भी तैयार हो जाइए सात फेरे लगाने के लिए पूरे नौ ग्रहों के चक्कर लगवाए हैं आपने

शीतल जोर से हंस देती है, फिर जैसे कोई बहुत ज़रूरी बात याद आई हो ऐसे तुरंत प्रश्न भरी निगाहों से चन्दन की तरफ देखती है…

चन्दन समझ जाता है कि अब भी शीतल के मन में कई प्रश्न हैं तो वो खुद से बताने लगता है – …. आयुर्वेद, सूर्य किरणों और पंचगव्य से जब उपचार संभव है और यह रोग इतना घातक नहीं तो फिर सरकार यह कर्फ्यू क्यों लगा रही है… ये मास्क, ये लॉक डाउन… ये सब क्या है??? यही पूछना चाहती हो न??

जी…

क्यों सिर्फ शीतला माता याद है, कर्फ्यू वाली माता नहीं??

मतलब?

जैसे आपको गाँवों की दयनीय तस्वीर ही चाहिए थी जिस पर फिल्म बनानी थी, सो मैंने वही दिखाया जो आपकी फिल्म बनाने में सहायक हो, सच्ची का गाँव दिखा देते तो आपकी फिल्म अधूरी रह जाती… वैसे ही देश की जनता को फिलहाल जिस फिल्म की ज़रूरत है सीन उसी हिसाब से बनाए जा रहे हैं, और स्क्रिप्ट भी उसी अनुसार लिखी जा रही है…

मतलब ये सब राजनीति के दांवपेंच है??

राजनीति का अर्थ क्या होता है मेमसाब, कि राजा राष्ट्र के हित के लिए ऐसी नीतियाँ बनाएं जो सबके कष्ट दूर करके सबके सुख समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति में सहायक हो… और हमारे राजा इस समय जो नीतियाँ बना रहे हैं, वो इस समय भले कुछ दिनों की आर्थिक मंदी दे जाए लेकिन कुछ वर्षों बाद हमारा भारत देश इन्हीं नीतियों के कारण विश्वगुरु बनकर उभरेगा.. क्या समझीं??

मैं तो कुछ नहीं समझी….

तो इस प्रेम कहानी के आगे बढ़कर एक राष्ट्र कहानी के बनने की प्रतीक्षा कीजिये… और उस कहानी का हीरो मैं नहीं, हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी होंगे…. वे ही इस राष्ट्र के वास्तविक हीरो हैं… इसलिए थोडा इंतज़ार किजीये पिक्चर अभी बाकी है दोस्त….

– माँ जीवन शैफाली (9109283508)

(इन्टरनेट पर उपलब्ध Covid-19 test kit की रिपोर्ट और डॉ Biswaroop Roy Chowdhury के वीडियो से प्राप्त अमूल्य जानकारी के आधार पर बनी एक काल्पनिक कहानी)

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  • माँ जीवन शैफाली – Whatsapp 9109283508 For Order
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