मेकिंग इंडिया

जीवन के सप्त रंग, मेकिंग इंडिया के संग

Bipolar Mood Disorder : बहुत ही कन्फ़्यूजिंग बीमारी

हम भारतीय बोलते बहुत हैं इसीलिए बचपन से ही हमें विशेषण सुनने की आदत पड़ जाती है…. अरे यह तो आलसी है, वह तो बहुत गुस्सैल है… फलां तो नवाबजादा है जब देखो तब गाड़ियों, लड़कियों पर पैसे फूंकता रहता है… वह लड़की देखो… अपने आप को मिस इंडिया समझती

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बहुरुपिया और प्रतीक्षा का फल

एक ही कथानक पर दो कहानियां! दोनों में समानता और इस हद तक समानता कि शायद एक दूसरे का एक्सटेंशन कही जाए. हंस पत्रिका के इस अंक में कहानीकार प्रियदर्शन की कहानी ‘प्रतीक्षा का फल’ और जनवरी 2018 से समालोचन ब्लॉग पर उपस्थित कहानीकार राकेश बिहारी की कहानी ‘बहुरूपिया’, दोनों

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लोगों से बाद में, शहर और उसकी हर चीज़ से पहले प्यार करिए…

जिस उम्र में मेरे साथ की लड़कियां जान लेती थीं कि उन्हें पढ़ लिखकर क्या बनना है… उनका राजकुमार कुमार कैसा होगा… उस उम्र में मुझे इतना पता था कि पढ़ाई कोई भी करूँ मेरा ठिकाना कोई पहाड़ी शहर होगा… जहां ख़ूब सारी किताबें होंगी और सामने खिड़की पर खुलते

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मैं दीपक… तुम ज्योति…

दीपक अंधेरे में बैठता है… ज्योति ढिंढोरा पीट आती है दूर तलक…… कि वहाँ कोने में, अंधेरे में दीपक रखा है. जैसे चाँद सुन्दर इसलिये है कि चाँदनी खबर लाती है. दीपक को व्याकरण ने ‘पुल्लिंग’ रखा है, ज्योति को ‘स्त्रीलिंग’. वैसे ही चाँद भी ‘पुल्लिंग’ की कतार में खड़ा

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तुम्हारा दिल या हमारा दिल है…

प्रतीक्षा चिरनिरन्तर है. वह प्रतीक्षा ही कैसी जो विरत हो जाये? प्रतीक्षा प्रारंभ होती है कभी समाप्त नहीं होने के लिए! प्रतीक्षा रोती है कलपती है लेकिन थकती नहीं! प्रतीक्षा मोजड़ी में अनवरत चलने के घाव दे के आह को नित्य नव्य बना देती है! प्रतीक्षा ऊपरी सतह से समतल

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Cinderella : सिर्फ़ प्रेम कहानी नहीं, एक प्रेरक कहानी

“सिंड्रेला” फ़िल्म (2015) मेरी पसंदीदा फिल्मों में से एक है. हालांकि इस फ़िल्म या सिंड्रेला की कहानी से जुड़ी चली आ रही आम धारणा “सिंड्रेला” के वास्तविक कथानक, अर्थ और भाव को पूरी तरह व्यक्त नहीं कर पाती. आमतौर पर “सिंड्रेला” की कहानी को महज एक आम लड़की और उसके

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धर्म और विज्ञान : दो नावों की सवारी

हम सभी ने देखा है कि प्रकाश की कोई किरण किसी प्रिज़्म में से गुज़रने पर सात रंगों में विभाजित हो जाती है. कल्पना की जाए कि वह प्रकाश प्रिज्म में उलझ कर अपनी असली पहचान भूल गया और स्वयं को कांच का प्रिज्म ही समझने लगा और बाहर दिखने

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हसरत है धूपिया रंग की शिफॉन में चाँद छू लेने की!

साड़ियों से इश्क़ उम्र के दूसरे दशक में हुआ फिर वक्त के साथ परवान चढ़ा.. साड़ी पहन कर मिजाज़ आशिकाना हो जाता लगता रिमझिम फुहारों से भरी हवायें हैं! घर से निकलने का एक आकर्षण ये होता कि कोई गुनगुनी सी साड़ी पहनेंगे और उसके आँचल में हर मौसम ठहरा

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प्रस्तुतिकरण का मस्का और ऑनलाइन शॉपिंग का चस्का

एक दिन दोनों बेटे मेरे पास आए – क्या आपके पास नौ हज़ार नौ सौ निन्यानवे रुपये हैं? नहीं, मेरे पास तो नहीं है… मुझे तो ये भी नहीं पता नौ हज़ार नौ सौ निन्यानवे लिखते कैसे हैं… लेकिन आपको क्यों चाहिए है? अरे… चार बार 9 लिखो और नौ

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कायाकल्प संकल्प के जादू से : वज़न कम करने के लिए करें ये आसान उपाय

इस समय यदि सबसे बड़ी कोई समस्या शरीर को लेकर लोगों में है, तो वो है वज़न बढ़ने की समस्या. और बावजूद इसके सबसे बड़ा सपना यदि लोग देख रहे हैं, तो वो है छरहरी काया पाने का सपना. छरहरी काया पाना तो सब चाहते हैं लेकिन बैठे बिठाये. ना

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