मेकिंग इंडिया

जीवन के सप्त रंग, मेकिंग इंडिया के संग

ओ हंसनी… कहाँ उड़ चली… -1

लड़की अठारह बरस की हुई थी पिछले महीने. लड़की अपनी दादी को बेहद प्यार करती थी और अपने स्कूल की सारी बातें उनको आकर बताया करती थी. लड़की की दादी बहुत प्यारी दादी थीं. सांवले चेहरे पर अनगिन झुर्रियों के बीच जब दादी आँखें मींच खिलखिलातीं तो लगता मानो देर

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डॉक्टर साहब मेरा बच्चा सब्ज़ी नहीं खाता, क्या करूं?

मेरा बच्चा सब्ज़ी नहीं खाता, क्या करूं?? लगभग हर माँ को इस समस्या से दो चार होना पड़ता है. मैंने इसी समस्या को सुलझाने के लिए कुछ छोटे छोटे लेकिन महत्वपूर्ण और उपयोगी टिप्स शेयर करने की कोशिश की है. आइये जानते हैं, कुछ छोटे छोटे लेकिन रोज़मर्रा के कुछ

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कुछ दिल ने कहा… कुछ भी नहीं…

संवाद की उत्कंठा की पराकाष्ठा पर ही प्रस्फुटित होता है मौन. मौन, जो उस कल्पवृक्ष का बीज है, जो प्रार्थनाओं के पानी से पाता है अपना सम्पूर्ण स्वरूप…. प्रेम-यात्रा की राह पर खड़ा यह कल्पवृक्ष उस मील के पत्थर के समान है, जहाँ से तुम जब भी दुबारा गुज़रोगे, तुम्हें

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जब तक श्रम नहीं करेंगे, पाप नहीं धुलेंगे, जब तक पाप नहीं धुलेंगे, फैट नहीं घुलेंगे

आधुनिक जीवन शैली ने हमें और कुछ दिया हो या ना दिया हो, एक बहुत ही आरामदायक ज़िंदगी ज़रूर दी है. बस एक बटन दबाओ और काम शुरू और इससे बड़ी बात काम ख़त्म होने पर बटन बंद करने जितनी मेहनत भी नहीं करना है. फिर चाहे रसोई में माइक्रोवेव

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सती -2 : जब पत्नी और पति के विचार एकाकार होते हैं, तब वह सती होती हैं

आप लोगों से निवेदन है कि पहले “सती” पर आप लोग पहला लेख पढ़ लें उसके पश्चात इसे पढ़ें. जैसा कि मैने पहले भी लिखा है तीन महानतम सतियों में सती अनुसूइया, सती सावित्री और सती जब वह शिव की पत्नी थी दक्ष की बेटी के रूप में, तीनों के

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भूख

भूख कई तरह की होती है. तन की भूख, मन की भूख, मस्तिष्क की भूख, आत्मा की भूख, परमात्मा की भूख…. व्यक्ति इसी क्रम में अपनी भूख मिटाते हुए जन्मों की यात्रा को पूरा करता है… कई बार किसी को इन सारे पड़ावों को एक ही जन्म में पार कर

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जीवन : कांच के टुकड़े से प्रिज़्म होने की यात्रा

किसी मध्यम मार्गी को अचानक से उठाकर अति पर पटक दिया जाए तो वो खुद को संसार से दूर एक सुनसान टापू पर खड़ा अनुभव करता है, जहाँ उसके अलावा उसे मनुष्य नाम का कोई जीव नहीं मिलता… जहाँ एक शाकाहारी सामाजिक इंसान को अपना जीवन बचाए रखने के लिए

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मैं थी, मैं हूँ, मैं रहूँगी…

1. इस मैं को शुक्रगुज़ार हूँ मैं वो मेरा मैं ही है जो एक वृहद् रूप लेता है अहं वाला मैं नहीं ब्रह्माण्डीय मैं जो शिव बनता है, ब्रह्मा बनता है हर चाह बिना चाहे पूरी करता है जो मेरा महबूब बनता है मेरा इश्क़, मेरा आशिक़ बनता है कि

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यदि आपको चश्मिश कहलाना पसंद नहीं, तो पेश है कॉन्टेक्ट लेंस की पूरी जानकारी

कॉन्टेक्ट लेंस सिलिकॉन या इसके और ज्यादा अपग्रेड प्रोडक्ट से बने ऐसे सॉफ्ट लेंस होते हैं जो हमारी आंख के कॉर्निया(पुतली) पर लगाये जाते हैं. ये हमारी आंख और लेंस के बीच मौजूद आसुओं की परत पर तिरते से रहते हैं, कोई चिपकाने का पदार्थ नहीं होता है, और वहीं

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सती

किसी भी शब्द को समझने के लिए पीछे इतिहास में क्या हुआ है और क्यों हुआ है इसको समझना अति आवश्यक है. अब सती के रूप में तीन स्त्रियों को नाम बहुत सम्मान से लिया जाता है. सती, पार्वती का पूर्व स्वरूप जब वह दक्ष प्रजापति की पुत्री थीं. सती

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