रेखा जहां पर ख़त्म होती है, वहां से शुरू होते हैं अमिताभ

रेखा जन्मोत्सव की सारी सीरिज़ को जब विराम देने का दिन आया तो ये ख़याल आया, 10 अक्टूबर की रात…

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अन्नपूर्णा : जिसके वक्षों का अमृत कभी सूखता नहीं, रसोई का रस उसी जननी से है

जब वह रसोईघर में प्रवेश करती है तो उसकी चूड़ियों के साथ बर्तन भी लयबद्ध होकर खनक जाते हैं. हवा…

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नवरात्रि विशेष : अनीता की रसोई से फलाहारी व्यंजन की थाली

1. व्रत की पकौड़ी वाली कढ़ी सामग्री कच्चे आलू – दो मध्यम आकार के कुट्टू या सिंघाड़े का आटा –…

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मितवा : राग भूपाली का चुपके से आना राग पहाड़ी से मिलने

संगीत के रागों में मुझे संपूर्ण प्रकृति परिलक्षित होती दिखाई देती है. जैसे कोई थिरकती नदी हवाओं से संगत करे,…

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