मेकिंग इंडिया साप्ताहिकी

जीवन के सप्त रंग, मेकिंग इंडिया के संग

नायिका – 23 : तीन शब्दों का जादू

उन तीन लफ़्ज़ों को लेकर घर लौटी… सिर दर्द का बहाना बनाकर औंधे मुंह लेटी रही… 2 घंटे निकल गये… शायद यकीन न आये तुमको लेकिन अपनी 33 साल की

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अर्जुन – 3 : ख्यालों के पुलाव नहीं होते पात्र

और ये हर बार तुम अज्ञेय सी क्लिष्ट भाषा में बात क्यों करने लगते हो. क्यों उपन्यास की गुणवत्ता में भाषा का कोई सहयोग नहीं होता? तुम्हारा मतलब है प्रेमचंद

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