मेकिंग इंडिया

जीवन के सप्त रंग, मेकिंग इंडिया के संग

अर्जुन -1 : प्रस्तावना, सार्त्र से पात्र तक

एक क्रांतिकारी, अद्भुत, जैसा कभी ना लिखा गया हो ऐसा उपन्यास रचने का सपना अर्जुन को चेतना के उस तल तक ले जा रहा था, जहां की एक झलक मात्र उसके हाथ से कलम छुड़ा देती थी… उसने जाना था कि यदि वह सबसे गहरे तल पर जाकर कुछ लिखने

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Success Story : सबकी पसंद ‘निरमा’

साठ के दशक में गुजरात सरकार के भू विज्ञान विभाग की लैब में एक 24 साल का युवक काम करता था… पारिवारिक पृष्ठभूमि बेहद साधारण… लेकिन उसे सरकारी नौकरी कभी रास नहीं आई…. वो एक लैब असिस्टेंट था…. लेकिन उसका दिमाग हमेशा कुछ अलग करने को बेताब रहता था. उन

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नायिका – 22 : आज की रात बचेंगे तो सहर देखेंगे…

फिर कल रात 12 बजे तक भांजे के साथ बैठा रहा। ऊपर गया तो साहिर ने आवाज़ दे दी, उन्हें साथ ले कर लेटा। पहला पेज खोलते ही खरीदने की तारीख़ पर नज़र गयी – 24 -09 1989! सिर्फ 14 साल 5 महीने और 5 दिन की थी! किस बात

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डाई से बाल ख़राब करना छोड़िये, घर पर बनाइये मेहंदी से प्राकृतिक डाई

श्रृंगार की बात हो और बालों का ज़िक्र न हो ऐसा हो ही नहीं सकता. लेकिन बढ़ते प्रदूषण, अस्त व्यस्त खान-पान और दिनचर्या के चलते बालों की गुणवत्ता धीरे धीरे ख़त्म होती जा रही है. सब जगह एक ही समस्या है, बालों में रूसी, समय से पहले सफ़ेद हो जाना

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पंचगव्य और आयुर्वेद के ज्ञाता ऋषि तुल्य वैद्य राजेश कपूर से मुलाक़ात

“अब तो चाय बिना शक्कर और बिना दूध वाली पीता हूँ”, मेरे इस कथन पर लोगों की अब तक प्रशंसात्मक या विस्मयपूर्ण प्रतिक्रियाएं ही मिली हैं. पर वो गुरु ही क्या जो चोट न करे! उन्होंने छूटते ही कहा कि इस पेय में चाय पत्ती तो है… नहीं पीना चाहिए.

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ये पूरा संसार ही नादात्मक है

स्वामी ध्यान विनय के साथ कोई गीत सुनना दोगुना आनंद देता है. गीत के अनुभव के साथ, गीत की ताल पर उनकी ऊंगलियों की थाप और उनका गीत से अधिक उसके संगीत के साथ एकाकार हो जाना. फिर चाहे उनके सामने टेबल हो या खाली मटका. उनकी लहराती ऊंगलियों के

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वैद्य राजेश कपूर से जानिये किस दिन क्या खाना और करना वर्जित है

  आचार्य राजेश कपूर से जानिये पंद्रह दिन के चौदह नियम – 1. प्रतिपदा – कूष्मांड पेठा और कद्दू खाना वर्जित है.2. दूज – बृहती (छोटा बैंगन) खाना वर्जित है.3. तृतीया – परवल खाने से शत्रु वृद्धि होती है.4. चतुर्थी- मूली खाने से धन का नाश होता है.5. पंचमी –

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नायिका -21 : खींचे मुझे कोई डोर तेरी ओर…

आज शाम आपसे बात करने के बाद मन इतना भारी हो गया कि कुछ सूझे ही न कि क्या करूं। सिस्टम भांजे ने ले लिया, नहीं तो ब्लॉग पर ही कुछ करता, इधर उधर डोलता रहा। फिर उनका भला हो, 4 आ गये, उनका समाधान किया, पर फिर ऊपर अपने

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नाग लोक का रहस्य – 6 : पुराण में नागों का उल्लेख

नागों की उत्पत्ति का रहस्य अंधकार में डूबा है, इसलिए प्राचीन भारत के इतिहास की जटिल समस्याओं में से एक ये भी समस्या है. कुछ विद्वानों के अनुसार नाग मूलरूप से नाग की पूजा करनेवाले थे, इस कारण उनका संप्रदाय बाद में नाग के नाम से ही जाना जाने लगा.

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नाग लोक का रहस्य – 5 : Totem & Tattoo

टोटेमवाद (गणचिह्नवाद) को सामान्यतः धर्म और समाज दोनों ही के लिए एक प्राचीन प्रणाली के रूप में व्यवहार में लाया गया. धर्म की प्रणाली के रूप में, यह आदिम मनुष्य के अपने टोटेम के साथ रहस्यमयी संबंध को दर्शाता है एवं समाज की प्रणाली के रुप में यह उस संबंध

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