मेकिंग इंडिया

जीवन के सप्त रंग, मेकिंग इंडिया के संग

पंचगव्य और आयुर्वेद के ज्ञाता ऋषि तुल्य वैद्य राजेश कपूर से मुलाक़ात

“अब तो चाय बिना शक्कर और बिना दूध वाली पीता हूँ”, मेरे इस कथन पर लोगों की अब तक प्रशंसात्मक या विस्मयपूर्ण प्रतिक्रियाएं ही मिली हैं. पर वो गुरु ही क्या जो चोट न करे! उन्होंने छूटते ही कहा कि इस पेय में चाय पत्ती तो है… नहीं पीना चाहिए.

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ये पूरा संसार ही नादात्मक है

स्वामी ध्यान विनय के साथ कोई गीत सुनना दोगुना आनंद देता है. गीत के अनुभव के साथ, गीत की ताल पर उनकी ऊंगलियों की थाप और उनका गीत से अधिक उसके संगीत के साथ एकाकार हो जाना. फिर चाहे उनके सामने टेबल हो या खाली मटका. उनकी लहराती ऊंगलियों के

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वैद्य राजेश कपूर से जानिये किस दिन क्या खाना और करना वर्जित है

  आचार्य राजेश कपूर से जानिये पंद्रह दिन के चौदह नियम – 1. प्रतिपदा – कूष्मांड पेठा और कद्दू खाना वर्जित है.2. दूज – बृहती (छोटा बैंगन) खाना वर्जित है.3. तृतीया – परवल खाने से शत्रु वृद्धि होती है.4. चतुर्थी- मूली खाने से धन का नाश होता है.5. पंचमी –

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नायिका -21 : खींचे मुझे कोई डोर तेरी ओर…

आज शाम आपसे बात करने के बाद मन इतना भारी हो गया कि कुछ सूझे ही न कि क्या करूं। सिस्टम भांजे ने ले लिया, नहीं तो ब्लॉग पर ही कुछ करता, इधर उधर डोलता रहा। फिर उनका भला हो, 4 आ गये, उनका समाधान किया, पर फिर ऊपर अपने

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नाग लोक का रहस्य – 6 : पुराण में नागों का उल्लेख

नागों की उत्पत्ति का रहस्य अंधकार में डूबा है, इसलिए प्राचीन भारत के इतिहास की जटिल समस्याओं में से एक ये भी समस्या है. कुछ विद्वानों के अनुसार नाग मूलरूप से नाग की पूजा करनेवाले थे, इस कारण उनका संप्रदाय बाद में नाग के नाम से ही जाना जाने लगा.

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नाग लोक का रहस्य – 5 : Totem & Tattoo

टोटेमवाद (गणचिह्नवाद) को सामान्यतः धर्म और समाज दोनों ही के लिए एक प्राचीन प्रणाली के रूप में व्यवहार में लाया गया. धर्म की प्रणाली के रूप में, यह आदिम मनुष्य के अपने टोटेम के साथ रहस्यमयी संबंध को दर्शाता है एवं समाज की प्रणाली के रुप में यह उस संबंध

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नायिका – 20 : Love You नायिका

वहाँ कॉलेज से लौट कर भागता हुआ आया, काम अधूरा छोड़ कर…. गया ही इस शर्त पर था कि आँधी आए या तूफान, 1 बजे घर पर होना है मुझे. क्यों गया था?? उस काम से जिसके लिए लोग आज भी याद करते हैं इस मूर्ख को. कम्प्यूटर्स में प्रॉब्लम

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नदिया के पार वाले वास्तव में उस पार ही छूट गए

स्कूल के मित्र, इंजीनियरिंग के मित्र, MBA के मित्र, इंदौर के मित्र, निरमा के मित्र, अहमदाबाद के मित्र, बंगलोर के मित्र और अब फेसबुक के मित्र. इनके ऊपर रिश्तेदारों की पूरी फौज. परबाबा और परदादी वाली पीढ़ी के अलावा हर प्रकार का रिश्ता देखने समझने को परिवार में ही मिल

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मोक्ष

मध्यम वर्ग की औरतें हमेशा मध्यम मार्गी होती हैं, इसका सबसे सही उदाहरण देखना हो तो सड़क पर किसी महिला को गाड़ी चलाते हुए देखिये. वो कभी भी दायें या बाएं गाड़ी नहीं चलाती, हमेशा सड़क के बीचो बीच चलाती है. फिर लाख कोई पीछे से हॉर्न देता रहे वो

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श्रद्धांजलि : अर्चना वर्मा

अर्चना दीदी अपने अंतिम सफर पर चली गईं। और लगा जैसे जीवन का एक कोना एकदम रिक्‍त हो गया। अर्चना जी, के नाम के आगे के जी कब हट गया और कब वह दीदी हो गईं पता नहीं चल पाया। आपके जीवन में कुछ ऐसे लोग आते हैं जाने जाने

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