एक थी अमृता : और एक थी सारा

सुबह उठी तो सीने में सारा कुलबुला रही थी… किसी पर चिढ़ रही थी किस पर नहीं जानती… शायद सारा भी नहीं जानती थी. इसलिए अपनी चिढ़ या कहें कुलबुलाहट उसके लफ़्ज़ों में उतर आती. इसलिए सारा की लिखी नज़में किसी स्केल पर नहीं बनती थी. उसको नापने का पैमाना … Continue reading एक थी अमृता : और एक थी सारा