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माँ के जीवन से : YOU ARE MY PARLE-G

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हम भारतीयों में शायद ही कोई ऐसा होगा जिसने अपने जीवन में Parle-G बिस्किट नहीं खाए होंगे। पारले जी के साथ और बाद बहुत सारे ब्रांड आए, लेकिन पारले जी जैसे वटवृक्ष की जड़ें न हिला सके।

भारत की कुछ नामी कंपनियों में पारले जी एक ऐसा नाम है जिसका इतिहास भारत की स्वतंत्रता के बाद ब्रिटिश कंपनी के बिस्किट के आगे सर उठाकर खड़ा रहा। हम हमेशा कहते हैं अंग्रेज़ चले गए लेकिन अंग्रेज़ियत छोड़ गए लेकिन पारले जी ने हमेशा साबित किया कि वो आज भी उतना ही हिन्दुस्तानी है जितना स्वतंत्रता के पहले था।

उसके बहुत अधिक इतिहास वर्णन में नहीं जाऊंगी, बस इतना कहूंगी कि पारले जी के नए विज्ञापन “You are my Parle-G” की अपार सफलता को देखकर एक बार फिर दुश्मनों ने “फूट डालो, राज करो” का अपना ब्रह्मास्त्र चलाया है, और हमेशा की तरह हमारा बेचारा मंद-बुद्धि हिन्दुस्तानी इस तरह की चाल में आ चुका है।

आजकल सोशल मीडिया पर पारले जी बिस्किट वालों के विज्ञापन का विरोध चल रहा है। कुछ विज्ञापनों का गलत प्रचार किया जा रहा है, हिन्दू मुस्लिम एकता पर बने, या आज की आधुनिक जीवन शैली के समर्थन में बने विज्ञापनों का हवाला देकर पारले जी के विरोध में लोगों को भड़काने की मुहिम चल रही है।

हिन्दुस्तानी कंपनियों की सफलता कभी भी दुनिया से देखी नहीं गयी, उन्हें पता है पूर्व से जो भी सूर्य की भांति उदित होगा वो पूरी दुनिया में रोशनी फैलाएगा. और जैसा कि मैं हमेशा कहती हूँ एक ज़मीन के टुकड़े की भी अपनी चेतना होती है, वैसे ही पारले जी कंपनी की अपनी चेतना है जिसका आभा मंडल इतना प्रखर है कि उसका प्रकाश देख दुनिया की आँखें चौंधिया जाती हैं। अपनी मेहनत के बल पर उसने इतना लंबा सफ़र तय किया है कि आपके उछाले गए चट्टान भी उसके लिए मामूली कंकर पत्थर हैं।

सोशल मीडिया एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा है, लेकिन विज्ञान वरदान या अभिशाप की तरह उसे भी हमने अपनी बौधिक दुर्बलता के आधार पर अक्सर अभिशाप ही साबित किया है।

ठीक है हम बहुत भावनात्मक लोग हैं, पारले जी के नए विज्ञापन भी इसी आधार पर बने हैं, लेकिन भावनाएं तो रिश्तों को और मजबूत बनाती है ना? हम किसी भी ऐसी सोशल मीडिया की वाहियात पोस्ट के झांसे में आ जाते हैं और बिना सोचे समझे उसका प्रचार प्रसार भी शुरू कर देते हैं।

क्या हमारा दिमाग सिर्फ विरोध करने के लिए पोषित किया जा रहा है.. कि जब भी कोई हिन्दुस्तानी अपनी मेहनत के बल पर सर उठाये उस पर तोहमतें लगाना शुरू कर दो?

क्या आप भूल गए यही बिस्किट चाय में डूबोकर बचपन से खाते आये हो.. ये रिश्ते सच में पारले-जी की तरह ही होते हैं, रिश्तों की गर्म चाय में डुबोते से ही नर्म हो जाते हैं, कभी कभी घुलकर उसी में मिल भी जाते हैं, फिर भी हम वो चाय पी जाते हैं क्योंकि उसमें हमारी प्यारी पारले जी बिस्किट घुली हुई है।

भूल गए वो दिन जब सफर में रास्ते में कुछ न मिले, तब भी हर स्टेशन पर या नुक्कड़ की दुकान या पान की दुकान पर यह पारले जी ज़रूर मिलता है, इसने तुम्हें कभी भी किसी भी हाल में भूखा नहीं रहने दिया। भूल गए वो दिन जब बीमारी में कुछ भी खाना अच्छा नहीं लगता तब भी इसी पारले जी ने माँ के प्रेम की तरह अपना स्वाद कभी नहीं खोया, और जुबान पर रखते से ही उसकी मिठास ने तुम्हें नई ऊर्जा दी।

आपको भले सब भूल जाए, मुझे कभी नहीं भूलता पारले जी का स्वाद और साथ… मेरे बचपन की और मेरे बच्चों के बचपन की बहुत सारी यादें इससे जुड़ी हैं। और आज के दिन मेरे लिए यह सच में महत्वपूर्ण है आज मेरी सबसे बड़ी संतान का जन्मदिन है, और उसे यह कहने के लिए इससे बेहतर मेरे पास और कोई तरीका नहीं कि YES YOU ARE MY PARLE-G

मैं यहाँ किसी कंपनी का विज्ञापन नहीं कर रही, मैं यहाँ सिर्फ रिश्तों का विज्ञापन कर रही हूँ जो इंसान को इंसान से जोड़ता है, क्योंकि मैं अपनी ही नहीं, सारे रिश्तों की भी ब्रांड एम्बेसेडर हूँ…

and yes PARLE-G, You are Too my PARLE-G

और पारले जी का यह मेरा पसंदीदा विज्ञापन है, और इसे मुझ जैसे भावनात्मक लोग ही मिलकर बना सकते हैं पारले जी, पियूष मिश्रा और गुलज़ार जब एक जगह इकट्ठे हो जाएं तो चाय बिस्किट तो बनती है यार…
रोको मत टोको मत सोचने दो इन्हें सोचने दो
मुश्किलों के हल इन्हें खोजने दो
निकलने दो तो आसमान से जुड़ेंगे…
अर्ररर अंडे के अन्दर ही कैसे उड़ेंगे यार…
निकलने दो पाँव जुर्राबें बहुत हैं किताबों के बाहर किताबें बहुत हैं

– माँ जीवन शैफाली

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