अन्नपूर्णा : जिसके वक्षों का अमृत कभी सूखता नहीं, रसोई का रस उसी से है

जब वह रसोईघर में प्रवेश करती है तो उसकी चूड़ियों के साथ बर्तन भी लयबद्ध होकर खनक जाते हैं. हवा में घुलती छौंक की खुशबू से घर का वातावरण उतना ही शुद्ध होता है जितना हवन कुण्ड के उठते धुंए से. झालर वाली फ्रॉक पहने गोभी भी उसका पल्लू पकड़ कर खुशी से फूल हो … Continue reading अन्नपूर्णा : जिसके वक्षों का अमृत कभी सूखता नहीं, रसोई का रस उसी से है