Menu

Thyroid : शरीर से पहले मन और चेतना से निकालिए बीमारी का हव्वा

0 Comments


बात 2015 की है जब भावनात्मक उतार-चढ़ाव का ऐसा दौर गुज़रा था कि डॉक्टर के पास जाने की नौबत आ गयी थी. चिड़चिड़ापन, खुद से ही नहीं, पूरी दुनिया से नाराज़गी और सबकुछ होते हुए भी खुदकुशी का ख़याल.

लगता था जब मुझे सबकुछ भोगते हुए भी दिख रहा है जो मैं कर रही हूँ, तो उन महिलाओं के साथ क्या होता होगा जिन्हें पता भी नहीं होता उनके साथ क्या हो रहा है…. जिसे वो किस्मत का लिखा समझकर अपने शरीर में हो रहे हार्मोनल बदलाव को समझ नहीं पाती.

और फिर जैसा अनुमान था… थाइरॉइड की अधिकतम सीमा 5.5 होती है और मेरी खून की जांच में 8.9 निकला. डॉक्टर ने दवाई दी चार छ: महीने लेने के बाद फिर जांच की तो थाइरॉइड अपनी नार्मल सीमा में आ गया था. पहले Thyroxine की 75 mg का डोज़ चालू था जिसको डॉक्टर ने फिर 50mg कर दिया…

दो महीने बाद फिर जांच करने को बोला, तो फिर रिपोर्ट नॉर्मल आई लेकिन डॉ ने 25mg हमेशा लेते रहने को कहा….

महीने भर तक दवाई खाने के बाद भी वही अवसाद का दौरा और जिसे हम थाइरॉइड के लक्षण कहते हैं… घबराहट, कंपकंपी, कभी बहुत अधिक नींद, कभी अनिद्रा, सबकुछ चालू हो गया… फिर मैंने बिना डॉ के पास गए ही फिर थाइरॉइड की जांच करवाई. मैं दंग रह गयी देखकर…. रिपोर्ट में थाइरॉइड लेवल 13 तक पहुँच गया था…

फिर मैं डॉ के पास नहीं गयी… मुझे लगा ऐसे तो मैं हमेशा के लिए इस बीमारी से ग्रस्त हो जाऊंगी और जीवन भर दवाई खाते रहना पड़ेगी. फिर जैसी आदत है… पहले तो इन्टरनेट पर उस बीमारी के सारे लक्षण और इलाज पढ़े. फिर इस बात की खोज की कि आयुर्वेद क्या कहता है.

जो मुझे पता चला उसमें बहुत सारे उपाय थे…. अलसी, सौंफ, खड़ा धना और भी बहुत सारी चीज़ें… लेकिन मेरे अचेतन मन से जो बार बार संकेत मिल रहा था वो अलसी के उपयोग पर आकर रुक रहा था…

फिर मैं बाज़ार गयी अलसी खरीद कर लाई उसका सेवन शुरू किया… और दो महीने में थाइरॉइड को हमेशा के लिए बाय बाय कहा… अलसी खाने के अलावा मैंने क्या किया ये आगे बताती हूँ…

थाइरॉइड के यूं तो दो प्रकार होते हैं… मुझे उसका अधिक ज्ञान नहीं है… बीमारी कौन सी है इससे ज़्यादा फर्क नहीं पड़ता… फर्क पड़ता है आपकी संकल्प शक्ति का…

सारे डॉक्टर्स और मेडिकल लाइन से जुड़े लोगों को नाराज़ कर सकती है ये बात, तो उनसे क्षमा सहित यही बात कहूंगी हर बीमारी डॉ के बिना ही ठीक हो जाए आवश्यक नहीं है… लेकिन कुछ ऐसी बीमारी जो अपने शुरुआती स्टेज पर हो उसे आप सिर्फ और सिर्फ अपनी संकल्प शक्ति के बल पर और कुछ शारीरिक क्रिया और खानपान में बदलाव लाकर बढ़ने से रोक सकते हैं.

आप लोगों से भी यही कहूंगी बीमारी बहुत अधिक पुरानी है तो आप डॉ की दवाई बिलकुल बंद न करें और उसके साथ ही जो मैं आगे बता रही हूँ उसको करके देखें… मैंने बिना दवाई लिए दो महीने में ही इस पर जीत हासिल कर ली थी आप भी करके देखें … हो सकता है धीरे धीरे ही सही आप भी इस बीमारी से निजात पा लें.

तो जैसा कि आप सब जानते ही है मैं अपने हर कार्य का शुभारम्भ ध्यान के माध्यम से ही करती हूँ.

तो सबसे पहले रोज़ सुबह उठाकर आपको सूर्य साधना करनी है. सूर्य साधना कैसे करनी है उसे आप इस लिंक पर विस्तृत से पढ़ सकते हैं.

बाकी मैं आपको यहाँ बता दूं सूर्य साधना करते समय आपको इस बात को बिलकुल मन में नहीं लाना है कि आप थाइरॉइड से ग्रसित है और उससे छुटकारा पाने के लिए ध्यान कर रहे हैं. बात विरोधात्मक लग सकती है लेकिन यही सत्य भी है जैसा कि मैं हर बार एक उदाहरण देती हूँ कि यदि आप सोच रहे हैं कि आज मुझे बन्दर के बारे में ‘नहीं’ सोचना है तो ऐसा सोचते हुए ही आप बन्दर को अपने विचारों में ला रहे हैं.

इसलिए अस्तित्व आपकी नकारात्मक बात नहीं समझता, अस्तित्व को यह पता है कि आप किसी विशेष के बारे में सोच रहे हैं तो वो आपको वही उपलब्ध करवाएगा. इसलिए आपको थाइरॉइड ही नहीं किसी भी रोग से मुक्ति पाना है तो उसके बारे में सोचना बिलकुल बंद कर दें.

यूं तो ध्यान निर्विचार होने की विधि है परन्तु प्रारम्भिक स्तर पर सबके लिए ये करना मुमकिन नहीं. तो आपको सूर्य साधना करते समय यह विचार करना है कि सूर्य की किरणों के साथ आपके अन्दर स्वास्थ्य प्रवेश कर रहा है.

और एक शुद्ध स्वस्थ सकारात्मक सूर्य आपके आभामंडल में प्रवेश कर चुका है. यह सूर्य ही आपके इष्ट है अब. यदि परमात्मा आपके द्वार पर खड़े होंगे तो आप उसे कहाँ विराजित करेंगे? बस उसी तरह अपने स्वास्थ्य रूपी परमात्मा को आपको अपने भाव के अनुसार अपनी चेतना में जगह देना है.

मैंने उसे अपने हृदय में विराजित कर रखा है, कुछ लोग सर पर चमकते सूर्य की कल्पना करते हैं. योग और अध्यात्म के ज्ञाता उसे अपने विभिन्न चक्रों पर केन्द्रित करते हैं. लेकिन उस स्तर पर न जाकर यहाँ सिर्फ सामान्य स्तर की बात करते हैं… तो उसे अपने हृदय में विराजित कीजिये.

एक बार आपने उसे स्थान दे दिया फिर आपके रोज़ ध्यान करते रहने से उस जगह सारी ऊर्जा केन्द्रित होती जाएगी और आप दिन प्रति दिन स्वयं को स्वस्थ अनुभव करेंगे.

अब हम बात करेंगे शरीर स्तर की…

देखिये किसी भी बीमारी का इलाज दो तरह से होता है… या तो आप शरीर पर काम करना शुरू करें तो शरीर स्वस्थ होने के साथ आपकी चेतना भी स्वस्थ होने लगती है और आपका आभामंडल मजबूत होने लगता है.

यहाँ मैं इसके ठीक विपरीत बात कर रही हूँ सबसे पहले आपको चेतना स्तर पर काम करना है. फिर हम शरीर स्तर पर काम करेंगे. इसलिए ऊपर मैंने पहले ध्यान विधि बताई और अब शारीरिक क्रिया बता रही हूँ.

तो महिलाओं में थाइरॉइड बढ़ने के साथ जो सबसे अधिक लक्षण प्रकट होते हैं वो है शरीर पर सूजन और मोटापे का बढ़ना.

1. तो सबसे पहले आपको सुबह शाम कुछ देर तक पैदल चलने की आदत डालना होगी. मैं सुबह शाम तीन किलोमीटर पैदल चलती थी.

2. खाने में मैंने छ: महीने तक परहेज़ किया. भटा यानी बैंगन थाइरोइड वालों के लिए शुद्ध ज़हर के समान है.

3. बैंगन के अलावा गोभी, पत्ता गोभी, आलू, चावल, उड़द दाल और ऐसी सारी चीज़ें जिसे वात वर्धक कहते हैं पूरी तरह बंद करना है. साथ ही खट्टी वस्तुएं न खाएं. दही चाहे जितना खाइए लेकिन ताज़ा. काला नमक और जीरा डालकर छाछ बनाकर पीना अधिक फायदेमंद होगा. सलाद, अंकुरित अनाज, दलिया और लौकी का अधिक से अधिक सेवन करें.

4. एक चम्मच खड़ा धना रात में एक कांच के ग्लास में पानी में भिगो कर रख दीजिये और सुबह उस पाने को छानकर पी लीजिये.

5. इसी विधि से आप त्रिफला भी ले सकते हैं. त्रिफला की सेवन विधि भी धने की तरह ही है. इस बारे में अधिक जानकारी चाहिए तो आप इस लिंक पर जा सकते हैं.

6. बाज़ार से अलसी खरीद कर लाइए, बीनकर एक कांच की शीशी में भरकर रख दीजिये. और उसे ऐसी जगह पर रखिये जहां दिन भर आपकी नज़र पड़ती रहे. मेरी इस बात पर हंसी आये तो हंस लीजियेगा लेकिन आते जाते उसे प्यार से निहारिये, उसे धन्यवाद दीजिये कि आखिर उसकी वजह से आपने अपने रोग से मुक्ति पा ली.

हर बात के लिए आपके कृतज्ञता के भाव महत्वपूर्ण है. और उससे अधिक महत्वपूर्ण है यह सोचना कि अलसी को पहली बार खाते के साथ ही आप पूरी तरह स्वस्थ हो गए हैं. आपको कोई जादुई दवाई मिल गयी है.

जी हाँ जो चीज़ आपको चाहिए उसे मांगिये नहीं, वो आपको मिल चुकी है ऐसा अनुभव करेंगे तो यकीनन आपको वो चीज़ मिल जाएगी. ये अस्तित्व का आकर्षण का नियम है जिस पर सोशल मीडिया पर किसी की वाल पर स्टैट्स पढ़कर वाह वाह करते हुए हम शेयर तो कर देते हैं लेकिन कभी उसका पालन नहीं करते. तो आपने अलसी से स्वस्थ होने की कल्पना के साथ ही अस्तित्व के रजिस्टर में यह बात नोट करवा दी कि आप पूरी तरह से स्वस्थ हो गए हैं.

यह बात सिर्फ अलसी पर ही लागू नहीं होती. सद्गुरु जग्गी वासुदेव कहते हैं पानी पीने से पहले यदि आप- ग्लास में पानी को झांककर देखते हैं तो आपके झाँकने के साथ ही उसके गुणों में परिवर्तन होना शुरू हो जाता है. तो बस आप किस भाव से उसमें झाँक रहे हैं सारा जादू उसी में समाहित है.

आप चाहें तो सिर्फ पानी से भी थाइरोइड ठीक कर सकते हैं लेकिन अभी हमारी ऊर्जा उस स्तर तक पहुँची है या नहीं यह आपकी ध्यान विधि से तय होगा… तब तक आप कांच में भरी अलसी को प्यार से निहारिये.

सेवन विधि

यदि कच्ची खा सके तो और भी अच्छा है लेकिन कुछ लोग स्वाद को लेकर बड़े संवेदनशील होते हैं, हर तरह की चीज़ खा नहीं पाते. ऐसे में आप अलसी को भूंज लीजिये, और उसमें काला नमक मिलाकर खाइए. दिन में तीन चार बार एक एक चम्मच अलसी खाना है.

नीचे लिंक में अलसी का मुखवास बनाना बताया गया है उसकी मदद से आप उसे मुखवास बनाकर भी खा सकते हैं.

अलसी का मुखवास

उपरोक्त ध्यान विधि और शारीरिक स्तर पर बतलाई विधियों के अलावा एक बहुत ही महत्वपूर्ण क्रिया आपको पंद्रह दिन या महीने भर बाद शुरू करना है वो है विशुद्ध चक्र पर ध्यान विधि शुरू करना… क्योंकि थाइरोइड ग्लैंड गले में इसी जगह होता है.

पहले आपको गर्दन के कुछ व्यायाम सूर्य साधना के बाद करना है वो है गर्दन को हाँ और ना कहने के तरीके से ऊपर नीचे और दाएं बाएँ घुमाना.

दूसरा भ्रामरी प्राणायाम करना है आपको. जिसके बारे में आप लोग जानते ही होंगे… कानों में अंगूठे डालकर अनामिका और मध्यमा से आँखों को बंद कर भंवरे के गुंजन सी ध्वनि कंठ से निकालना है. विशुद्ध चक्र का स्वर भी “हं” ही है… इस विधि से भी आपकी थाइरोइड ग्लैंड आपके नियंत्रण में काम करेगी.

उपरोक्त विधि के दौरान यदि आपको शारीरिक तल पर कोई परेशानी होती भी है जैसे शरीर अकड़ना, कंपकपी या इसी तरह के अन्य लक्षण तो थाइरॉइड से इसका संबंध जोड़ना पूरी तरह से छोड़ दीजिये. अन्य कारण भी होते हैं इसके पीछे लेकिन हमें जो डॉक्टर बता देता है हम उसी को गाँठ बाँध लेते हैं.

तभी तो इन्हें Gland अर्थात ग्रंथि कहा गया है. इन सारी ग्रंथियों पर आपने जो और छोटी छोटी गांठे बाँध ली है उपरोक्त विधियां बस उन्हीं गांठों को हटाने का प्रयास हैं .

मैंने आपको थाइरॉइड का कोई इलाज नहीं बताया है, लेकिन आपकी थाइरॉइड ग्रंथि सुचारू रूप से चल सके इसलिए उस पर से गांठें हटाई हैं… प्रयास करके देखिये… डायलॉग फ़िल्मी लगेगा लेकिन कहते हैं ना जब आप कोई चीज़ शिद्दत से चाहते हैं तो आपको वो चीज़ देने के लिए पूरी कायनात षडयंत्र रचती है… तो अपने स्वास्थ्य को पूरी शिद्दत के साथ मांगिये… फिर देखिये जादू.

थाइरॉइड सम्बंधित प्राकृतिक चिकित्सा के बारे में अधिक जानने के लिए इस लिंक पर दिए लेख को अवश्य पढ़ें, थाइरॉइड को ठीक करने में यह भी आपकी मदद करेगा.

– माँ जीवन शैफाली

प्रसिद्ध प्राकृतिक चिकित्सक श्री अरुण शर्मा का लेख यहाँ पढ़ें

जल उपवास से रोगमुक्ति के उपाय पढने के लिए इस लिंक पर जाएं

Facebook Comments
Tags: , ,

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *