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Tag: Yogi Anurag

द क्वीन ऑफ़ चैस!

उसका नाम रहने ही दीजिए, “क्वीन” काफ़ी नहीं? बहरहाल, उसका नाम था : गुंजन। बड़ी बड़ी काली सफ़ेद गोटियों-सी आखें, चौकोर सा कोमल मुख, आक्रामक भाव-भंगिमाएँ और ढेर सारी बातें। कुल मिला कर ठीक वैसी ही थी मानो संगमरमर के शतरंज की “क्वीन” उठ कर मानव रूप में आ गयी हो! लड़के के कॉलेज से […]

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तुम आयीं जैसे छीमियों में धीरे-धीरे आता है रस!

“तुम आयीं जैसे छीमियों में धीरे-धीरे आता है रस!” ये श्री केदारनाथ सिंह हैं, और बड़े दिनों से इस कविता को गुनगुनाते हुए मेरे हृदय में बह रहे हैं। वही केदार, जिनके लिए “जाना” हिंदी की ख़ौफ़नाक क्रिया थी! वही केदारनाथ, जो स्वयं को नदियों में चम्बल और सर्दियों में बुढ़िया का कम्बल कहते थे! […]

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