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Tag: Vyalok Pathak

यह सुरेंद्र मोहन पाठक के लिए खतरे की घंटी है…

मैं किशोरावस्था में तथाकथित लुगदी साहित्य का बड़ा प्रेमी था। हां, हमलोग उसे जासूसी नॉवेल कहते थे। सुरेंद्र मोहन पाठक, वेदप्रकाश शर्मा के साथ मैं तो जेम्स हेडली चेइज और रीमा भारती, केशव पंडित जैसों को भी खूब पढ़ता था। हालांकि, इनमें पाठकजी को पढ़कर हमेशा ही लगता रहा जैसे वह व्यक्ति अपनी वर्तमान स्थिति […]

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