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Tag: Varjit Bagh Ki Gatha

मैं और मेरी किताबें अक्सर ये बातें करते हैं : वर्जित बाग़ की गाथा

ये समीक्षा नहीं है, सचमुच समीक्षा नहीं है. समीक्षा तो पुस्तक की होती है, जीवित गाथाओं की नहीं. अच्छा बुरा पहलू तो लिखे हुए हरूफ़ का देखा जाता है, उन हरूफ़ का नहीं, जो रूह बनकर गाथाओं के शरीर में बसते हों. कुछ हर्फ आँखों से गुजरकर चेतना बनकर हमारे अचेतन मन में ज़िंदा रहते […]

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