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Tag: Swami Dhyan Vinay

नायिका -19 : इतनी मिलती है सूरत से तेरी गज़ल मेरी, लोग मुझको तेरा महबूब समझते होंगे

विनायक – हाँ नायिका!!! है ना कमाल कि ज़िंदा हो!!!! लेकिन ऐसा लग रहा है, हो नहीं!!!! मरनेवाले के लिए कहा जाता है कि भगवान को प्यारा हो गया, गणेश को भी तो भगवान ही मानते है ना?? देखो खजराना जा कर!!!!! नायिका – मर गई नायिका… खजराने वाले गणेशजी, क्या मरने के बाद भी […]

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नायिका-18 : मैं मानता नहीं अगले या पिछले जन्म को, ‘जानता’ हूँ!

विनायक – तीनों links पर गया, दो पर comments हैं, इच्छा हो तो देखें, एक अमृत-सागर को पढ़ लिया सागर मंथन कर अमृत की खोज करने के लिये. न, अमर होने की चाह बिलकुल भी नहीं, जल की कोख से तो लिखवा लिया. अब देखते हैं, “धरती की कोख से” किस दिन लिखा पाती हैं. […]

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नायिका – 17 : बरगद की चुड़ैल और श्मशान चम्पा

नायिका – मैं बता देती हूँ एक बार और मुझे मोबाइल नंबर नहीं चाहिए… नहीं चाहिए… नहीं चाहिए….. विनायक – किसने कहा कि मैं दे रहा हूँ? देना होगा तो आपकी इजाज़त के बिना भी दे दूँगा, कौन रोक सकेगा मुझे? got it?? now please note it down, its 93001*****…. अर्ररे!!! ये क्या हरक़त है, […]

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नायिका -16 : आप सामने हो तो भला क्यों कोई पलक झपकने जितना समय भी गंवायेगा?

नायिका – अब आपकी उम्मीद कितनी बड़ी है ये तो मुझे नहीं पता ना…. ख़त तो बहुत बड़ा नहीं है, हाँ आपके गाने सुनते हुए जो महसूस किया उसे कमेंट्स में डालती गई… देख लेना… और जाऊँ मतलब? तुम जाते ही कहाँ हो….. भूत जो हो मँडराते रहते हो आसपास….. ऊपर से अपनी आँखें भी […]

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नायिका -15 : किताबें पढ़ी ही नहीं, सुनी भी जाती हैं!

नायिका – ये 8 रोटी वाली बात समझ नहीं आई…. समझा कर रखना कल आकर पढ़ूँगी… कहा था… कुछ याद है? विनायक – हम भी सारे जहान का बोझ उठाए फिरते हैं पर इतनी कमज़ोर तो नहीं हमारी याददाश्त जितनी लोगों की…. आपने जब पूछा था कि कुछ तो काम करते होंगे…. तो लंबी चौड़ी […]

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नायिका – 14 : पहले आप… कहा ना पहले आप… नहीं पहले आप…

नायिका- हाँ, ब्लॉग पढ़ा था अगले दिन… अचम्भित रही दो दिन तक… अब भी हूँ… कोई ऐसा भी होता है!!! इस उम्र तक अपना बचपन बचाकर रख सकता है? आज मैं पूछती हूँ… WHO ARE YOU? किसी समन्दर को चंचल सरिता की तरह बहते पहली बार देख रही हूँ. नायक, विनायक, मोटू…. क्या कहूँ तुम्हें… […]

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नायिका – 13 : विनय + नायक = विनायक

नायिका – डर तो अब भी है… एक औरत होने का………. डर अब भी है ……… रिश्तों और बातों में पारदर्शिता का डर अब भी है………………… शनिवार की रात के सपने का और रविवार की रात की बैचेनी का .. सपनों वाली रात …..एक अदृश्य सा व्यक्ति मेरे साथ घूम रहा है….. मैं खाना खा […]

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नायिका -12 : मांग कर मैं न पीयूँ, ये मेरी ख़ुद्दारी है, इसका मतलब ये नहीं, कि मुझे प्यास नहीं

सूत्रधार – दो अंक पहले नायक नायिका का अंतिम संवाद कुछ यूं था कि नायिका किसी से झगड़कर खराब मूड लिए बैठी है और सारा गुस्सा नायक पर उतारते हुए कहती हैं “सारे मर्द एक जैसे होते हैं.” जवाब में नायक कहते हैं – वाकई?? सब मर्द एक जैसे होते हैं? अरे नहीं अभी सबसे […]

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नायिका – 11 : जल की कोख से

नायक – इतने तो लेखक हैं और संसार भर के विषयों पर लिख रहे हैं, मै भी लिखूँ? अरे बचा क्या है लिखने के लिये, ऊपर से मेरा लिखने का ये ढंग, अब तो लिखे हुये पर शर्म आ रही थी. अभी तक जिनकी आवाज़ आदेशों के रूप मे कानों में गूंज रही थी, सहसा […]

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नायिका – 10 : उनका फरमान!!!

भला लिखना भी मजबूरी में हो सकता है क्या? न दिमाग में कोई विचार हो, न मन में कोई उमंग, कलम उठाते ही हाथ में दर्द शुरु हो जाये, न लिखने के दसियों बहाने सूझे, पर नहीं साहब, लिखना तो पड़ेगा! पर क्यों? ऐसी भी क्या विवशता है? है न, उनका फरमान!!! पहले फतवा दे […]

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