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Tag: Swami Dhyan Vinay

नायिका -5 : ये नये मिजाज़ का शहर है, ज़रा फ़ासले से मिला करो

अभी तक आप मिले मुझसे यानी सूत्रधार से, और पढ़े नायक और नायिका के एकदूसरे को लिखे ख़त…. …..बिल्कुल …आपकी उलझन बिल्कुल सही कि एक तरफ तो मैं कहता हूँ कि नायिका और नायक की पहली मुलाकात बाकी है और दूसरी तरफ इन खतों से लगता है जैसे दोनों एक दूसरे को बरसों से ही […]

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नायिका -4 : जादू और शक्ति

… कुछ बताऊँ? तुम अब लगभग तैयार हो कि हम मिल सकें… लगभग पर रुकना, ध्यान देना… उन 4 या 5 दिनों के ध्यान में बैठने का बहुत बड़ा हाथ है इस तैयारी में… अब बोलो, ये अगर पहले बता देता तो? तो ये अपेक्षा जुड़ जाती और उस तरीके से ध्यान सम्पन्न न हो […]

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चरित्रहीन – 3 : तुम्हारा प्रेम बीज है, मेरा प्रेम सुवास

पश्चिम की एक बहुत प्रसिद्ध अभिनेत्री मर्लिन मनरो ने आत्महत्या की, भरी जवानी में! और कारण? कितने प्रेमी उसे उपलब्ध थे! ऐरे-गैरे-नत्थू-खैरों से लेकर अमरीका का राष्ट्रपति कैनेडी तक, सब उसके प्रेमी! तो भी वह प्रेम से वंचित थी। प्रेमियों की भीड़ से थोड़े ही प्रेम मिल जाता है। प्रेम तो एक आत्मीयता का अनुभव […]

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चरित्रहीन – 4 : उड़ियो पंख पसार

और फिर एक दिन… स्वामी ध्यान विनय मुझसे पूछने लगे base camp का अर्थ जानती हो? मैंने कहा आप पूछ रहे हैं तो ज़रूर कोई और ही अर्थ बताने वाले होंगे… बताइये.. जब लोग पर्वतारोहण करने जाते हैं तो अपना सारा सामान नीचे base camp में ही छोड़ जाते हैं बस ज़रूरी सामान लेकर ऊपर […]

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नायिका -3 : Introducing सूत्रधार

हर फिल्म का एक नायक होता है………….. और होती है एक नायिका……………………. फिल्म चाहे पुरानी हो या नई………. हर फिल्म में एक नायक होता है…………. और होती है एक नायिका…………… बात चाहे नायक की सफलता की हो या असफलता की………… हर नायक के पीछे होती है एक नायिका……….. बात चाहे प्रेम की हो रही हो […]

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नायिका -2 : Introducing NAAYIKA

बात 2007 की है जब नायिका एक मल्टी नेशनल कंपनी में काम करती थी. तनख्वाह इतनी थी कि उस ज़माने के हिसाब से घर खर्च निकालने के बाद चाहे जितना रूपया खुद पर खर्च कर सकती थी. बाज़ार गए हैं कोई साड़ी एक नज़र में पसंद आ गई तो बस चाहिए, फिर चाहे वो 100 […]

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नायिका -1 : Introducing NAYAK

दिक्कत क्या है मेरे साथ जानती हो? मेरे होश नहीं खोते. सच… ऐसा ही हूँ. कुछ चुरा लेने का क्रेडिट तुमसे छीन रहा हूँ. मेरे होते हुए कुछ चुराने की क्या ज़रूरत? हाँ तुमसे शेयर बहुत कुछ किया… होश में किया… और अभी किया ही कितना है? समुद्र से बूँद जितना… यकीन करो, सारे जीवन […]

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जीवन-लीला : कृष्ण तत्व का जन्मोत्सव

नायक से मिलने से पहले नायिका जीती थी मध्य मार्ग में… थोड़ा-थोड़ा, थोड़ा-सा प्यार, थोड़ी-सी नफ़रत, थोड़ी-सा जीवन, थोड़ी-सी मृत्यु… और आज? नायिका – आज अपनी परछाई बनाकर तुम मुझे वहां तक ले गए हो जिसे अति कहते हैं… extreme में जीना, खतरनाक ढंग से जीना… जीने का और कोई तरीका ही नहीं होता जानती […]

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प्रेम पत्र : इश्क़ की दास्तान है प्यारे, अपनी-अपनी ज़बान है प्यारे

ये नहीं कि मैं बिना बात किए नहीं रह सकता. रह सकता हूँ. सिर्फ ये एहसास ही काफी होता है कि कोई है, जिससे मैं जब चाहे बात कर सकता हूँ. पिछले 53 घंटों से मैं चुप हूँ. आसपास लोग भी हैं जिनसे मैं कह रहा हूँ, वो सुन रहे हैं, वो कह रहे हैं, […]

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मानो या ना मानो -7 : महासमाधि की झलक

पिछले महीने ‘युगन युगन योगी’ यह पुस्तक एक मित्र के माध्यम से जादुई रूप से पहुँची थी… यूं तो मैं आजकल सद्गुरु को दिन रात यूट्यूब पर सुनती रहती हूँ, लेकिन पुस्तक पढ़ने का जादू क्या होता है वो मैंने ‘वर्जित बाग की गाथा’ और ‘हिमालायीवासी गुरु के साए में श्री एम’ पुस्तक से जाना […]

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