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Tag: Spiritual

VIDEO : पिक्चर अभी बाकी है दोस्त

तो पिछले वीडियो में मैंने वादा किया था कि जीवन के एक स्वर्णिम नियम के बारे में बताऊंगी जो मैंने जीवन के व्यक्तिगत अनुभवों से जाना है… बाकी आपने बड़े बड़े ग्रंथों में पढ़ा होगा कि जीवन एक माया है… और मैं आप सबकी सुविधा के लिए इसे एक फिल्म कह देती हूँ. तो जीवन […]

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शरीर साधन है : पुरुष, जिस पुर में परमात्मा बसा है

शरीर को दोष देने वाला बिलकुल निर्बुद्धि है. उपनिषद की इस धारणा को समझकर, आप इस सूत्र में प्रवेश करें. सरल विशुद्ध ज्ञानस्वरूप अजन्मा परमेश्वर का ग्यारह द्वारों वाला मनुष्य शरीर नगर है, पुर है. इसलिए हमने मनुष्य को पुरुष कहा है. पुरुष का अर्थ है जिसके भीतर, जिस पुर में परमात्मा बसा है, जिस […]

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शरीर ने तुम्हें नहीं, तुमने शरीर को पकड़ा है : ओशो

उपनिषद के ऋषियों के मन में मनुष्य के शरीर की कोई भी निंदा नहीं है. मनुष्य के शरीर के प्रति बहुत सदभाव है, बहुत श्रद्धा भाव है, क्योंकि मनुष्य का शरीर वस्तुत: मंदिर है. उस परमात्मा का निवास जिसके भीतर है, उसकी निंदा तो कैसे की जा सकती है! परमात्मा जिसके भीतर बसा है, उस […]

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मानो या ना मानो : यह महफिल है मस्तानों की, हर शख्स यहाँ पर मतवाला

वेद में एक बहुत ही सुन्दर मंत्र है – “कस्मै देवाय हविषा विधेम”. ऋषियों के सम्मुख एक बहुत बड़ा प्रश्न यह था कि यज्ञ में किस देवता की आहुति दी जाये. यह सब विचार करते हुए उन्हें लगा कि कौन सी ऐसी शक्ति है जो पूरे विश्व का संचालन करती है? इस चराचर संसार का […]

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विश्व के प्रत्येक पदार्थ के मध्य यन्त्र है और उस यन्त्र के मध्य भी यन्त्र है

सृष्टि के सभी जड़-चेतन पदार्थों का स्थूल, सूक्ष्म एवं कारण धरातलों पर जो रूपायन होता है, उसका मूल सूत्रधार है– ‘अग्नि’ या उसकी ‘रूपतन्मात्रा’। इसलिए अग्नितत्व (रूपायन) का यन्त्र से सम्बन्ध है। यन्त्र शब्द का ‘र’ ( यं+त+रं=यन्त्र ) अक्षर यही संकेतित करता है। ‘यन्त्रम्’ शब्द का ‘त’ अक्षर अमृत का बोधक है। ‘त’ ( […]

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इनबॉक्स बनाम कन्फेशन बॉक्स : ये दुनिया आभासी नहीं आभा-सी है

बचपन में दूरदर्शन पर एक टीवी सीरियल या फिल्म देखी थी, अब याद नहीं कि सीरियल था या फिल्म लेकिन उसका विषय और मुख्य कलाकार मस्तिष्क की किसी पर्त में जमा रह गया. इसलिए क्योंकि विषय बहुत अलग था.. मुख्य कलाकार थे पेंटल, एक परिपक्व अभिनेता… जिन्होंने उन दिनों कई टीवी सीरियल और फिल्मों में […]

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प्रतीक्षा-मिलन : अंतर्मन की भाषा का शाब्दिक प्रकटन

देखिये मैं बहुत संकोची स्वभाव का हूँ, बहुत कम इस शैली में बात करता हूँ… आपने आग्रह किया तो कह दिया… वर्ना मुझे बहुत कष्ट होता है अंतर्मन की भाषा को शब्दों में प्रकट करना… यह तो ऐसा ही है ना जैसे आप चेतना को देह देने का प्रयास कर रहे हैं… अंतर्मन के भाव […]

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दिल चाहता है : प्रेम कथा भक्ति और ज्ञान की

परमात्मा के जन्म की कोई कहानी यदि होती तो परमात्मा के जन्म के साथ जुड़ी होती परमात्मा के प्रति आस्था और भक्ति. चूंकि परमात्मा सनातन है… इसलिए उसके साथ भक्ति भी सनातन हुई. हाँ ज्ञान ने अवश्य मनुष्य के जन्म के साथ सृष्टि में प्रवेश पाया, चाहे वो अमैथुनीय सृष्टि के जन्म की बात ही […]

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मन का मनका

मित्रों, हमारा सबसे पक्का साथी कौन है? वह कौन है जो सुख-दुख में, स्वर्ग-नर्क में हमारा साथ नहीं छोड़ता। जीव के दो नित्य मित्र है ऊपर ब्रम्ह और नीचे मन है। ब्रम्ह पालक सखा और जीव बालक सखा है, इसी प्रकार मन बालक सखा और जीव पालक सखा है। माँ, बाप, भाई, बहन, पत्नी, पुत्र […]

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आत्म मंथन : मैं रोज़ नई हूँ…

कभी समय के एक टुकड़े पर लिखी थी अनुभव की इबारत और लगा था कि बस यही अंतिम सत्य है. लेकिन मैंने अपनी ही सत्यता को बहुत कम आँका फिर यह तो ब्रह्माण्डीय सत्य का प्रकटीकरण था कि मैं अपने ही लिखे को मिटा देने पर आनंदित हुई और ब्रह्माण्ड मुझे आनंदित देखकर नाच उठा… […]

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