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Tag: Spiritual

व्यवस्थित अव्यवस्था आवश्यक है जीवन के लिए…

भावनात्मक अधोगमन के साथ ऊर्जा के उर्ध्वगमन के व्युत्क्रमानुपाती नियम के साथ समानानुपाती रूप से आगे बढ़ते रहिये। प्रेम और पैसे के जोड़ या घटाव के परिणाम की चिंता किये बिना दो समानांतर रेखा की तरह बिना किसी के मिले अपनी रेखा पर सीधे चलते रहिये… क्योंकि हर गोल-मोल रेखा भी सरल रेखा के अंश […]

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जब सब सोते हैं, तब योगी जागे हुए रहते हैं

योग में तीन अवस्थाओं का वर्णन है. जागृत, स्वप्न, सुषुप्ति. मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि मन के तीन भाग हैं. चेतन, अवचेतन, अचेतन. यानी जागृतावस्था में चेतन, स्वप्नावस्था में अवचेतन, सुषुप्ति में अचेतन मन विशेष सक्रिय होता है. मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि मनुष्य अपनी मानसिक क्षमता का न्यूनतम उपयोग कर पाता है. सुपर जीनियस माने जाने […]

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Life Love Liberation : ध्यान ही जीवन, जीवन ही प्रेम, प्रेम ही परमात्मा

मैं अपनी बात शुरू करूं इसके पहले जानिये बब्बा क्या कह रहे हैं, कोई आध्यात्मिक गुरु, कोई ज्ञानी बात कहता है तो हम उसे जल्दी ग्रहण कर पाते हैं. लाओत्से कहता है, चलो, लेकिन ध्यान नाभि का रखो. बैठो, ध्यान नाभि का रखो. उठो, ध्यान नाभि का रखो. कुछ भी करो, लेकिन तुम्हारी चेतना नाभि […]

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सामाजिक से प्राकृतिक होने की प्रक्रिया का नाम है अध्यात्म

आध्यात्मिक लोग भी दो तरह के होते हैं. एक जो आधुनिक से ग्रामीण हो जाते हैं, मेरे जैसे आदिम, ठेठ… सदैव के अज्ञानी जिन्हें वास्तव में कुछ नहीं आता लेकिन जिससे जो सीखने को मिल जाए सीखता चला जाता है… जितना सीखता जाता है उतना ही ग्राम भी छूट जाता है… छंटाक भर आध्यात्मिकता में […]

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कुम्हारन के हाथ तो सदैव मिट्टी में सने रहते हैं…

कुम्हारन के हाथ तो सदैव मिट्टी में सने रहते हैं… मिट्टी जो उसकी माँ भी है और सखी भी… गुरु भी है और पिता भी… सुहाग है, तो चिता की राख भी… इस मिट्टी को इस बात से कोई लेना देना नहीं कि उसके बने पात्र में किसको पानी पीना नसीब हुआ है, इस मिट्टी […]

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मानो या न मानो : मिट्ठी के जन्म और गुड़वाले बाबा की सच्ची कहानी

माई, ओ माई !! गुड़ रोटी मिलेगी खाने को? आगे जा बाबा… आज कुछ नहीं है देने को. मैं बहुत परेशान हूँ. दे दे ना माई, बस दो रोटी और गुड़. ओ हो बाबा… एक तो मेरा दिमाग काम नहीं कर रहा और ऊपर से तुम… खैर बाबा तुम्हारा क्या दोष, लाती हूँ गुड़ रोटी. […]

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शून्य से संबोधि तक

कहते हैं व्यक्ति की उन्नति में स्थान का बहुत महत्वपूर्ण योगदान होता है. फिर चाहे वो उन्नति शैक्षणिक हो, आध्यात्मिक हो, व्यवसायिक हो या सामाजिक हो, किसी भी स्तर पर की गई उन्नति में स्थान की महत्ता को अस्वीकार नहीं किया जा सकता. ये एक स्थापित तथ्य है कि सार्थक प्रयास भी यदि अनुचित स्थान […]

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देह के सितार से निकलता सूक्ष्म प्राणों का गीत

संगीत और साहित्य अध्यात्म की जुड़वा संताने हैं… यूं तो जीवन में और जीवन के परे हो रहा हर कृत्य और कुकृत्य इसी मुखिया के गाँव की सरहद का हिस्सा है. उसके गाँव की सीमा पर जो दीवारें हैं उन पर जीवन की उत्पत्ति की प्राचीन कहानियां चित्रित हैं. उसके दरबार में प्रसन्नता कालबेलिया नृत्य […]

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ध्यान का ज्ञान : इस ज़मीं से आसमां तक मैं ही मैं हूँ, दूसरा कोई नहीं

मैं अहंकारी हूँ, तुम भी अहंकारी हो और वो भी… निरपवाद रूप से सभी अहंकारी हैं… ऐसा भी नहीं कि बहुत बड़े-बड़े अहंकार पाले हों… छोटे-छोटे, बहुत तुच्छ, टुच्चे से अहंकार पाले हुए हैं. क्या खूब लिखता हूँ मैं, क्या खूब दिखता हूँ मैं, कितनी ऐशो-आराम की ज़िन्दगी जुटाई है मैंने खुद के लिए और […]

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अध्यात्म के रंगमंच पर जीवन का किरदार…

मुझसे किसी को किसी बात पर ईर्ष्या नहीं हो सकती, लेकिन बिस्तर पर करवट बदलते रहने वालों को मेरी इस आदत पर अवश्य ईर्ष्या हो सकती है कि ध्यान बाबा कहते हैं आप इतनी बड़ी कुम्भकरण हैं कि आप पास में बैठी हैं और ज़रा सी कोहनी मारकर आपको लुढ़का दो तो वहीं खर्राटे मारने […]

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