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Tag: Spiritual

आत्म मंथन : मैं रोज़ नई हूँ…

कभी समय के एक टुकड़े पर लिखी थी अनुभव की इबारत और लगा था कि बस यही अंतिम सत्य है. लेकिन मैंने अपनी ही सत्यता को बहुत कम आँका फिर यह तो ब्रह्माण्डीय सत्य का प्रकटीकरण था कि मैं अपने ही लिखे को मिटा देने पर आनंदित हुई और ब्रह्माण्ड मुझे आनंदित देखकर नाच उठा… […]

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नायिका -1 : Introducing NAYAK

दिक्कत क्या है मेरे साथ जानती हो? मेरे होश नहीं खोते. सच… ऐसा ही हूँ. कुछ चुरा लेने का क्रेडिट तुमसे छीन रहा हूँ. मेरे होते हुए कुछ चुराने की क्या ज़रूरत? हाँ तुमसे शेयर बहुत कुछ किया… होश में किया… और अभी किया ही कितना है? समुद्र से बूँद जितना… यकीन करो, सारे जीवन […]

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Fritjof Capra, The TAO of PHYSICS के बहाने : तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा

सुबह जागी तो दो शब्द मुंह पर थे तन्मय और तल्लीन, और लगा कोई रचना इन दो शब्दों के आसपास बुनकर जागी हूँ। एमी माँ (अमृता प्रीतम) के अनुसार इसे ‘सांध्य भाषा’ कहते हैं जब आप अर्धचेतनावस्था में कुछ रच रहे होते हैं और जागने पर भी पूरी तरह से या झलक भर याद रह […]

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मानो या ना मानो – 6 : अग्नि के मानस देवता

मानो या न मानो भाग-5 के आगे… चार साल बाद मिली उस ड्रेस को पहनने के बाद मैं खुद को कहीं की परी समझने लगी थी, उम्र को मैंने कभी खुद पर हावी नहीं होने दिया इसलिए कोई भी ड्रेस किसी भी उम्र में पहनने में मुझे कभी कोई झिझक नहीं हुई। तो मेरी वह […]

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मानो या ना मानो – 5 : इच्छापूर्ति के लिए कायनाती षडयंत्र

बात उन दिनों की है जब फैशन डिजाइनिंग का शौक चढ़ा था… अधिकतर ड्रेस मैं अपने हाथों से बना लेती थी, बात शायद 2002 के आसपास की होगी, विचार आया था कि अपने इस शौक को क्यों न प्रोफेशनल रूप में सीखकर करियर बना लूं, तो उन दिनों NIFT में दाखिला लेने भी गयी थी […]

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मानो या ना मानो – 4 : पिता के अंतिम दर्शन

पिता की मृत्यु के बाद लिखे दो लेख- सत्य से मुंह फेर कर खुद को समेट समेट कर जीते रहने की आदत औरत में जन्म के साथ पड़ जाती है, क्योंकि वह अपनी माँ को और माँ की माँ को भी इसी तरह जीते हुए देख चुकी होती है। पूछने पर जवाब भी यही मिलेगा […]

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मानो या ना मानो – 3 : मुक्ति के यज्ञ में पिता ने दी आहुति

पिछले वर्ष जीवन एक चिलक हो गया था… चिलक जानते हो ना, पीठ की अकड़न से उठने वाली पीड़ा… भयंकर दर्द… असहनीय… ऐसा कि बस मुंह से अंतिम शब्द जो निकला था … पापा मुझे अपने पास बुला लो… बस अब नहीं जीना मुझे… मैं जीना नहीं चाहती… अपने पास बुला लो… पापा मेरे उलटे […]

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मानो या ना मानो – 2 : हनुमान दर्शन

(यह पिछले वर्ष मुझ पर हुए आध्यात्मिक प्रयोग पर लिखी सम्पूर्ण घटना जीवन पुनर्जन्म का एक अंश भर है) उन दिनों मैं पिछले जन्म में हुए किसी गुनाह के भय से जूझ रही थी जिससे मुक्त करने के लिए मुझ पर प्रयोग हो रहे थे। भय से मुक्ति के लिए एकमात्र साधना है हनुमान तत्व […]

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मानो या ना मानो -1 : चन्दन-वर्षा

इश्क़ जब उम्र का चोला सिलता है तो उसमें मिलन की झालर में लगे तुरपाई के तंतु इतने संवेदनशील हो जाते हैं कि चेतना तक पैरहन के लिए लालायित हो जाती है। आप मानो या ना मानो लेकिन ये ऐसी ही इश्क़ की कहानी है कि मृत्यु के पश्चात भी वो आशिक़ से मिलने आती […]

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व्यवस्थित अव्यवस्था आवश्यक है जीवन के लिए…

भावनात्मक अधोगमन के साथ ऊर्जा के उर्ध्वगमन के व्युत्क्रमानुपाती नियम के साथ समानानुपाती रूप से आगे बढ़ते रहिये। प्रेम और पैसे के जोड़ या घटाव के परिणाम की चिंता किये बिना दो समानांतर रेखा की तरह बिना किसी के मिले अपनी रेखा पर सीधे चलते रहिये… क्योंकि हर गोल-मोल रेखा भी सरल रेखा के अंश […]

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