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Tag: Song Review

कुछ दिल ने कहा… कुछ भी नहीं…

संवाद की उत्कंठा की पराकाष्ठा पर ही प्रस्फुटित होता है मौन. मौन, जो उस कल्पवृक्ष का बीज है, जो प्रार्थनाओं के पानी से पाता है अपना सम्पूर्ण स्वरूप…. प्रेम-यात्रा की राह पर खड़ा यह कल्पवृक्ष उस मील के पत्थर के समान है, जहाँ से तुम जब भी दुबारा गुज़रोगे, तुम्हें याद आएंगी वो बातें, जो […]

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कितनी फीकी थी मैं, सिन्दूरी हो जाऊं… ओ सैंया…

जिनके घर कॉलोनी के नहीं, मोहल्लों और गली के नामों से पहचाने जाते हैं वही जान सकते हैं मुम्बई की चाल में रहने वालों का इश्क. इसे पहली बार फिल्म ‘कथा’ में देखा था, पड़ोसी से शक्कर, चाय-पत्ती माँगने के बहाने मिलने जाना भी बहुत रोमांटिक लगता था. कॉलोनी में रहने वालों से हम पड़ोस […]

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