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Tag: Shatrughn Singh

समुद्र मंथन : शुभ-अशुभ हमारी धारणा है, प्रकृति की नहीं

दो विपरीत विचार स्वभाव के समूह देव और दैत्यों के सहयोग से, समुद्र में विपरीत धारायें उत्पन्न की गईं, जिससे कई रत्नों के साथ अमृत पाया गया। गुण अवगुण, सभी प्रकृति में उपयोगी होते हैं। प्रकृति गुण अवगुण के सम्मिलन से ही बनी है। विपरीत के अभाव में अस्तित्व को सिद्ध कर पाना संभव ही […]

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जब सब सोते हैं, तब योगी जागे हुए रहते हैं

योग में तीन अवस्थाओं का वर्णन है. जागृत, स्वप्न, सुषुप्ति. मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि मन के तीन भाग हैं. चेतन, अवचेतन, अचेतन. यानी जागृतावस्था में चेतन, स्वप्नावस्था में अवचेतन, सुषुप्ति में अचेतन मन विशेष सक्रिय होता है. मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि मनुष्य अपनी मानसिक क्षमता का न्यूनतम उपयोग कर पाता है. सुपर जीनियस माने जाने […]

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यत् पिण्डे तत् ब्रह्माण्डे

आधुनिक विज्ञान की बिग बैंग थ्योरी बताती है कि ब्रह्मांड (सृष्टि) की उत्पत्ति महाविस्फोट से हुई. विस्फोट से असंख्य ग्रह, नक्षत्र, तारे बने. जिससे ब्रह्माण्ड का विस्तार हुआ. और अभी विस्तार की प्रक्रिया जारी है. भारतीय अध्यात्म दर्शन में भी कहा गया कि एक ने अनेक होने की कामना की, और वह अनेक रूपों में […]

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