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Tag: Rivesh Pratap Singh

एक कहानी : नाम याद नहीं मुझे…

क्लास, सातवीं से आठवीं हो गई तब महसूस किया कि कुछ बदल रहा है। कपड़ों में सलवार दुपट्टे की गिनती बढ़ी। मम्मी पहले से ज्यादा चौकन्नी हो गयीं। थोड़ी दुपट्टे को लेकर मैं भी सतर्क हुई। स्कूल जाने के लिए सहेलियों का एक ग्रुप साथ हो गया। लड़कों का कोई झुण्ड देखते ही सिर झुक […]

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मित्रों! झोला उठाने का वक्त आ गया है

यूपी के बाज़ार से पॉलीथीन बेदख़ल हो गई। ठीक हुआ! जब किसी के जीवन में कोई दखलअंदाजी की बेइंतहा कर जायेगा तो उसे बेदखल होना ही पड़ेगा.. सौदा कैसा भी हो… कच्चा, पक्का, सूखा-गीला, ठन्डा-गरम हर एक सौदे के लिये मुंह बाये तैयार रहती थी ये। सबके उंगलियों में लिपटने और लटकने का जो नशा […]

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