Menu

Tag: Rajesh Mittal

साफ फ़र्क है आह से उपजे गान और बाज़ार की कला में : प्रसून जोशी

हमारा अतीत इस बात का गवाह है कि चाहे वह कल्पना की ऊंची उड़ान हो या नए-नए विचारों की गहरी पैठ, हमने नए विचारों का सदा ही स्वागत किया है. हमारे पास अनेक उदाहरण हैं निर्बाध चिंतन के. फिर भी आज कुछ लोगों में एक असंतोष क्यों दिखाई देता है? क्यों कला का समाज और […]

Read More