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Tag: Poet

अलविदा पीड़ा के राजकुंवर नीरज

जीवन कटना था, कट गया अच्छा कटा, बुरा कटा यह तुम जानो मैं तो यह समझता हूँ कपड़ा पुराना एक फटना था, फट गया जीवन कटना था कट गया ‘जीवन’ के लिये पहले ही उन्होंने ये अभिव्यक्त कर जता दिया कि उनके लिये वो महज़ एक पुराने कपड़े के फटने की तरह है और बिल्कुल, […]

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तुम आयीं जैसे छीमियों में धीरे-धीरे आता है रस!

“तुम आयीं जैसे छीमियों में धीरे-धीरे आता है रस!” ये श्री केदारनाथ सिंह हैं, और बड़े दिनों से इस कविता को गुनगुनाते हुए मेरे हृदय में बह रहे हैं। वही केदार, जिनके लिए “जाना” हिंदी की ख़ौफ़नाक क्रिया थी! वही केदारनाथ, जो स्वयं को नदियों में चम्बल और सर्दियों में बुढ़िया का कम्बल कहते थे! […]

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गुलज़ारी जादू : धन्नो की आँखों में रात का सुरमा और चाँद का चुम्मा

एक कवि के व्यक्तित्व का पैमाना उसके जीवन में घटित घटनाएं नहीं होती, उस जीवन में उन तमाम असंगत या कभी-कभी क्रूर घटनाओं के बावजूद वो अपनी कविता कितने नाज़ुक शब्दों के साथ प्रस्तुत करता है, इससे उसके चरित्र और व्यक्तित्व को देखा जाना चाहिए… सिर्फ देखा जाना ही काफी है, क्योंकि जिस गहरे तल […]

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एक कवि और उनकी कविताएं : दुष्यन्त कुमार

कुण्ठा मेरी कुण्ठा रेशम के कीड़ों सी ताने-बाने बुनती, तड़प तड़पकर बाहर आने को सिर धुनती, स्वर से शब्दों से भावों से औ’ वीणा से कहती-सुनती, गर्भवती है मेरी कुण्ठा – क्वांरी कुन्ती। बाहर आने दूँ तो लोक-लाज मर्यादा भीतर रहने दूँ तो घुटन, सहन से ज्यादा, मेरा यह व्यक्तित्व सिमटने पर आमादा। प्रसव-काल है! […]

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