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Tag: Poem

तुम्हारा दिल या हमारा दिल है…

प्रतीक्षा चिरनिरन्तर है. वह प्रतीक्षा ही कैसी जो विरत हो जाये? प्रतीक्षा प्रारंभ होती है कभी समाप्त नहीं होने के लिए! प्रतीक्षा रोती है कलपती है लेकिन थकती नहीं! प्रतीक्षा मोजड़ी में अनवरत चलने के घाव दे के आह को नित्य नव्य बना देती है! प्रतीक्षा ऊपरी सतह से समतल राह सी दिखती है लेकिन […]

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हसरत है धूपिया रंग की शिफॉन में चाँद छू लेने की!

साड़ियों से इश्क़ उम्र के दूसरे दशक में हुआ फिर वक्त के साथ परवान चढ़ा.. साड़ी पहन कर मिजाज़ आशिकाना हो जाता लगता रिमझिम फुहारों से भरी हवायें हैं! घर से निकलने का एक आकर्षण ये होता कि कोई गुनगुनी सी साड़ी पहनेंगे और उसके आँचल में हर मौसम ठहरा लेंगे!! आहिस्ता आहिस्ता साड़ी की […]

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