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Tag: Osho

बब्बा, मैं जीवन सिखाती हूँ

बात दो तीन दिन पहले की है, जब मेकिंग इंडिया की पिछले वर्ष की यादें अपनी फेसबुक वाल पर शेयर करने के लिए जैसे ही वेबसाइट पर 14 तारीख पर गयी. तो एक बहुत खूबसूरत दृश्य देखा. शुरू की दो ख़बरों में एक में मेरी तस्वीर थी एक में बब्बा (ओशो) की. मेरी तस्वीर वाले […]

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जीवन रहस्य : पूजा घटित होती है तो विदा हो जाती है मूर्ति

जिन लोगों ने भी मूर्ति विकसित की होगी, उन लोगों ने जीवन के परम रहस्य के प्रति सेतु बनाया था… मूर्ति-पूजा शब्द सेल्फ कंट्राडिकटरी है. इसीलिए जो पूजा करता है वह हैरान होता है कि मूर्ति कहां? और जिसने कभी पूजा नहीं की वह कहता है कि इस पत्थर को रख कर क्या होगा? इस […]

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शरीर साधन है : पुरुष, जिस पुर में परमात्मा बसा है

शरीर को दोष देने वाला बिलकुल निर्बुद्धि है. उपनिषद की इस धारणा को समझकर, आप इस सूत्र में प्रवेश करें. सरल विशुद्ध ज्ञानस्वरूप अजन्मा परमेश्वर का ग्यारह द्वारों वाला मनुष्य शरीर नगर है, पुर है. इसलिए हमने मनुष्य को पुरुष कहा है. पुरुष का अर्थ है जिसके भीतर, जिस पुर में परमात्मा बसा है, जिस […]

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शरीर ने तुम्हें नहीं, तुमने शरीर को पकड़ा है : ओशो

उपनिषद के ऋषियों के मन में मनुष्य के शरीर की कोई भी निंदा नहीं है. मनुष्य के शरीर के प्रति बहुत सदभाव है, बहुत श्रद्धा भाव है, क्योंकि मनुष्य का शरीर वस्तुत: मंदिर है. उस परमात्मा का निवास जिसके भीतर है, उसकी निंदा तो कैसे की जा सकती है! परमात्मा जिसके भीतर बसा है, उस […]

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मानो या ना मानो : जब ‘शैफाली’ के लिए ओशो ने उठा लिया था चाकू!

25 अप्रेल 2010 की बात है … मैं सुबह सुबह ध्यान करने के बाद बब्बा (ओशो) और एमी माँ (अमृता प्रीतम) के बारे में अपनी डायरी में लिख रही थी – “मेरे अस्तित्व की डोर सदा इन दोनों के हाथ में रही है और आज भी है… ये दोनों मुझे मिलकर संभाले हुए हैं… क्या […]

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आत्म मंथन : मैं रोज़ नई हूँ…

कभी समय के एक टुकड़े पर लिखी थी अनुभव की इबारत और लगा था कि बस यही अंतिम सत्य है. लेकिन मैंने अपनी ही सत्यता को बहुत कम आँका फिर यह तो ब्रह्माण्डीय सत्य का प्रकटीकरण था कि मैं अपने ही लिखे को मिटा देने पर आनंदित हुई और ब्रह्माण्ड मुझे आनंदित देखकर नाच उठा… […]

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चरित्रहीन – 3 : तुम्हारा प्रेम बीज है, मेरा प्रेम सुवास

पश्चिम की एक बहुत प्रसिद्ध अभिनेत्री मर्लिन मनरो ने आत्महत्या की, भरी जवानी में! और कारण? कितने प्रेमी उसे उपलब्ध थे! ऐरे-गैरे-नत्थू-खैरों से लेकर अमरीका का राष्ट्रपति कैनेडी तक, सब उसके प्रेमी! तो भी वह प्रेम से वंचित थी। प्रेमियों की भीड़ से थोड़े ही प्रेम मिल जाता है। प्रेम तो एक आत्मीयता का अनुभव […]

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चरित्रहीन – 4 : उड़ियो पंख पसार

और फिर एक दिन… स्वामी ध्यान विनय मुझसे पूछने लगे base camp का अर्थ जानती हो? मैंने कहा आप पूछ रहे हैं तो ज़रूर कोई और ही अर्थ बताने वाले होंगे… बताइये.. जब लोग पर्वतारोहण करने जाते हैं तो अपना सारा सामान नीचे base camp में ही छोड़ जाते हैं बस ज़रूरी सामान लेकर ऊपर […]

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अध्यात्म के रंगमंच पर जीवन का किरदार…

मुझसे किसी को किसी बात पर ईर्ष्या नहीं हो सकती, लेकिन बिस्तर पर करवट बदलते रहने वालों को मेरी इस आदत पर अवश्य ईर्ष्या हो सकती है कि ध्यान बाबा कहते हैं आप इतनी बड़ी कुम्भकरण हैं कि आप पास में बैठी हैं और ज़रा सी कोहनी मारकर आपको लुढ़का दो तो वहीं खर्राटे मारने […]

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