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Tag: Nidhi Saxena

प्रेम : कपूर टिकिया सा, जो ख़ुद अपनी गन्ध बिसरा के स्वयं बिसर जाए

प्रेम कोई कथ्य नहीं कोई विचार नहीं जिसे साझा किया जाए शब्दों में कभी कभी लगता है कि प्रेम अहसास भी नहीं. क्योंकि कैसे ही इसे महसूस करना शुरू करो यह खत्म होना शुरू हो जाता है. इसलिये इसे महसूस भी मत करना चाहिए. बस जी लेना चाहिए. प्रेम कोई फूल भी नहीं कि सदा […]

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हसरत है धूपिया रंग की शिफॉन में चाँद छू लेने की!

साड़ियों से इश्क़ उम्र के दूसरे दशक में हुआ फिर वक्त के साथ परवान चढ़ा.. साड़ी पहन कर मिजाज़ आशिकाना हो जाता लगता रिमझिम फुहारों से भरी हवायें हैं! घर से निकलने का एक आकर्षण ये होता कि कोई गुनगुनी सी साड़ी पहनेंगे और उसके आँचल में हर मौसम ठहरा लेंगे!! आहिस्ता आहिस्ता साड़ी की […]

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