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Tag: Naayika

नायिका – 14 : पहले आप… कहा ना पहले आप… नहीं पहले आप…

नायिका- हाँ, ब्लॉग पढ़ा था अगले दिन… अचम्भित रही दो दिन तक… अब भी हूँ… कोई ऐसा भी होता है!!! इस उम्र तक अपना बचपन बचाकर रख सकता है? आज मैं पूछती हूँ… WHO ARE YOU? किसी समन्दर को चंचल सरिता की तरह बहते पहली बार देख रही हूँ. नायक, विनायक, मोटू…. क्या कहूँ तुम्हें… […]

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नायिका – 13 : विनय + नायक = विनायक

नायिका – डर तो अब भी है… एक औरत होने का………. डर अब भी है ……… रिश्तों और बातों में पारदर्शिता का डर अब भी है………………… शनिवार की रात के सपने का और रविवार की रात की बैचेनी का .. सपनों वाली रात …..एक अदृश्य सा व्यक्ति मेरे साथ घूम रहा है….. मैं खाना खा […]

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नायिका -12 : मांग कर मैं न पीयूँ, ये मेरी ख़ुद्दारी है, इसका मतलब ये नहीं, कि मुझे प्यास नहीं

सूत्रधार – दो अंक पहले नायक नायिका का अंतिम संवाद कुछ यूं था कि नायिका किसी से झगड़कर खराब मूड लिए बैठी है और सारा गुस्सा नायक पर उतारते हुए कहती हैं “सारे मर्द एक जैसे होते हैं.” जवाब में नायक कहते हैं – वाकई?? सब मर्द एक जैसे होते हैं? अरे नहीं अभी सबसे […]

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नायिका – 11 : जल की कोख से

नायक – इतने तो लेखक हैं और संसार भर के विषयों पर लिख रहे हैं, मै भी लिखूँ? अरे बचा क्या है लिखने के लिये, ऊपर से मेरा लिखने का ये ढंग, अब तो लिखे हुये पर शर्म आ रही थी. अभी तक जिनकी आवाज़ आदेशों के रूप मे कानों में गूंज रही थी, सहसा […]

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नायिका – 10 : उनका फरमान!!!

भला लिखना भी मजबूरी में हो सकता है क्या? न दिमाग में कोई विचार हो, न मन में कोई उमंग, कलम उठाते ही हाथ में दर्द शुरु हो जाये, न लिखने के दसियों बहाने सूझे, पर नहीं साहब, लिखना तो पड़ेगा! पर क्यों? ऐसी भी क्या विवशता है? है न, उनका फरमान!!! पहले फतवा दे […]

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नायिका – 9 : क्यों दुखता है दाँत? ऐसे में मीठा कम बोलना चाहिए!!!!

नायिका का अगला ई-मेल – अभी अभी फिर किसी से तनातनी हो गयी…. खैर झगडालू हूँ लेकिन कुछ लोगों के लिए.. झगड़ने के बाद मन खराब हो जाता है… खराब मन लिए बैठी हूँ आपके सामने… एक साया-सा रूबरू क्या है… सुन रही हूँ अपलोड किया है आप भी सुनिए या फिर बताइये आपके पसंद […]

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नायिका – 8 : कहीं इसे फ्लर्ट करना तो नहीं कहते हैं ना?

सूत्रधार – नायिका अपनी तस्वीर कुछ देर के लिए ब्लॉग पर लगाती है और नायक को मेल से खबर कर देती है कि देख लें कहीं यही वो चेहरा तो नहीं था जो उसे सपने में दिखाई दिया था. नायिका की तस्वीर देखने के बाद नायक जवाब देता है- चाहें तो अभी हटा दीजिये. पुण्यतिथि […]

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नायिका – 7 : अरमान तमाम उम्र के सीने में दफ्न हैं, हम चलते-फिरते लोग मज़ारों से कम नहीं

बहरहाल तो जनाब यहाँ से शुरू होता है नायक का परिचय… ख़ुद नायक की ज़ुबानी… जी हाँ कहा ना मैंने बताना शुरू किया तो कहानी आगे नहीं बढ़ेगी… आप जितना भी नायक के बारे में जानेंगे, जितना भी उसे समझेंगे वो सब नायक के ही शब्दों में होगा…. क्योंकि नायक को ख़ुद के अलावा और […]

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नायिका – 6 : न आया माना हमें cheques पर हस्ताक्षर करना, बड़ी कारीगरी से हम दिलों पर नाम लिखते हैं

पिछले भाग में आपने पढ़ा कि एक महीने के अंतराल के बाद नायिका नायक के ईमेल का जवाब भेजती है, जिसके जवाब में जनाब लिखते हैं – बेग़म अख्तर गा रही हैं, शायद सुदर्शन फ़ाकिर का क़लाम है – ज़िंदगी कुछ भी नहीं फिर भी जिये जाते हैं! तुझपे ए वक़्त हम एहसान किये जाते […]

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नायिका -5 : ये नये मिजाज़ का शहर है, ज़रा फ़ासले से मिला करो

अभी तक आप मिले मुझसे यानी सूत्रधार से, और पढ़े नायक और नायिका के एकदूसरे को लिखे ख़त…. …..बिल्कुल …आपकी उलझन बिल्कुल सही कि एक तरफ तो मैं कहता हूँ कि नायिका और नायक की पहली मुलाकात बाकी है और दूसरी तरफ इन खतों से लगता है जैसे दोनों एक दूसरे को बरसों से ही […]

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