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Tag: Motivation

सीधे रस्ते की ये टेढ़ी सी चाल है…

जीवन विविधता से भरा हुआ है और आज मुझे आप सबसे ढेर सारी अलग-अलग बातें करनी है…. तो मैं अपने किशोरावस्था से शुरू करती हूँ, बचपन मेरा बहुत यादगार नहीं रहा होगा इसलिए मुझे याद नहीं… वैसे भी ध्यान बाबा कहते है जब आप 14 वर्ष और 23 दिन की हुई थीं तब आपके जीवन […]

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जादू की झप्पी : लाख दुखों की एक दवा है काहे घबराए

उनके पास पैसा, शोहरत, कामयाबी यानी वह सब कुछ था, जो किसी की भी हसरत हो सकती है, फिर चाहे आध्यात्मिक गुरु भय्यू जी महाराज हों या सिलेब्रिटी शेफ एंथनी बॉर्डियन या फिर पुलिस अधिकारी राजेश साहनी। वे जिस मुकाम पर पहुंचे, वहां कम ही लोग पहुंच पाते हैं फिर भी उन्होंने जिंदगी से मुंह […]

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रियाज़ की रिकॉर्डिंग्स नहीं होती

सालों पहले की बात है. उस ज़माने में दिनकर जोशी, विट्ठल पंड्या, सारंग बारोट, रजनीकुमार पंड्या से ले कर हरकिशन मेहता, अश्विनी भट्ट, चंद्रकांत बक्शी, सभी समकालीन साहित्यकारों के सभी पुस्तक पढ़ जाता था. उस समय मैं पाठक ज़्यादा और लेखक बेहद कम था. उस समय वरिष्ठ साहित्यकार मोहम्मद मांकड़ (अभी 92 साल के पूर्ण […]

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कुछ सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता है

सुख-साधन-सत्ता के शिखर पर आरूढ़ व्यक्ति भी जब आत्महत्या जैसे घृणित कार्य को अंजाम देता है तो मेरा मन क्षुब्ध हो उठता है; क्षुब्ध हो उठता है मेरा मन जब मैं अखबारों के पन्नों में आत्महत्या जैसी खबरों को सुर्खियाँ बटोरते पाता हूँ; बहुत क्षोभ होता है तब जब मैं पाता हूँ कि आईआईटी जैसे […]

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Power Of Name : पुकारो, मुझे नाम लेकर पुकारो

कुछ सालों पहले यह विज्ञापन टीवी पर अक्सर देखने में आता था और उसका यह डायलॉग बहुत प्रसिद्ध भी हो गया था – क्यों सुनील बाबू, नया घर?? इस विज्ञापन में ऐसा क्या खास था, जो सबका ध्यान आकर्षित कर गया? यदि इस विज्ञापन में इस संवाद की जगह सिर्फ यह होता, क्यों भई नया […]

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आत्मा चाहे जितनी पुरानी हो, देह की चाहे जितनी उम्र हो, आप फिर भी बने रहें चिरयुवा

चिरयुवा बने रहने के लिए मनुष्य को कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए. समय निरन्तर प्रवाहमान है. अतः आयु को बढ़ने से कोई रोक नहीं सकता. आयु के हर पड़ाव में मनुष्य कुछ विशेष सावधानियाँ बरतकर स्वस्थ और प्रसन्न रह सकता है. अपनी वृद्धावस्था में जब शरीर अशक्त होने लगता है, उस समय भी […]

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जो तुरंत संतुष्ट हो जाये वही ‘आशुतोष’ है

सेन्स/ न्युसेंस सेन्स और न्युसेंस में अंतर होता है. जिज्ञासा वश पूछे गए प्रश्न सेन्स की श्रेणी में आते हैं और ध्यानाकर्षण के लिए उछाला गया प्रश्न न्युसेंस की श्रेणी में आता है. जिज्ञासा हमें सेन्सिबल व्यक्ति की श्रेणी में रखती है. तो ध्यानाकर्षण हमें नॉन्सेन्सिकल व्यक्ति के रूप में प्रतिष्ठित करता है. स्मरण रखिए- […]

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जीवन : कांच के टुकड़े से प्रिज़्म होने की यात्रा

किसी मध्यम मार्गी को अचानक से उठाकर अति पर पटक दिया जाए तो वो खुद को संसार से दूर एक सुनसान टापू पर खड़ा अनुभव करता है, जहाँ उसके अलावा उसे मनुष्य नाम का कोई जीव नहीं मिलता… जहाँ एक शाकाहारी सामाजिक इंसान को अपना जीवन बचाए रखने के लिए जंगली जानवर को मारकर खाने […]

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इच्छा किसी की पूरी नहीं होती, संकल्प किसी के अधूरे नहीं रहते

तुम्हें अपने आप को मैनेज करना नहीं आता है. तुम अपने विचारों, इच्छाओं एवं कल्पनाओं में सदा खोये रहते हो और अपने आप पर कोई भी नियंत्रण नहीं है. एक के बाद एक दिन बीतते जाते हैं पर थोड़ा सा भी परिवर्तन जीवन में नहीं दिखाई दे रहा है. दिन, हफ्ते महीने, और वर्ष बीत […]

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सारे नियम तोड़ दो, नियम पे चलना छोड़ दो

कोटा की कोचिंग ने जब मेरी ज़िंदगी की लगानी शुरू की तो मेरे अंदर अध्यात्म जाग गया और मैं ढूंढने लगी किसी गुरु को जो मुझे शरण में ले और दुनिया के मोह-माया से आजाद करवाये. कोटा में हर दूसरा बच्चा प्रेशर में इतना पक कर गुलगुला हो चुका होता कि पढ़ाई के लिये दिल […]

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