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Tag: Ma Jivan Shaifaly

नायिका – 14 : पहले आप… कहा ना पहले आप… नहीं पहले आप…

नायिका- हाँ, ब्लॉग पढ़ा था अगले दिन… अचम्भित रही दो दिन तक… अब भी हूँ… कोई ऐसा भी होता है!!! इस उम्र तक अपना बचपन बचाकर रख सकता है? आज मैं पूछती हूँ… WHO ARE YOU? किसी समन्दर को चंचल सरिता की तरह बहते पहली बार देख रही हूँ. नायक, विनायक, मोटू…. क्या कहूँ तुम्हें… […]

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यात्रा : अहिल्या की नगरी इंदौर

शहरों में एक शहर सुना है, शहर सुना है दिल्ली, दिल्ली शहर में चांदनी नाम की लड़की मुझसे मिल ली… अब आप सोच रहे होंगे इंदौर शहर की बात शुरू करने के लिए मैं दिल्ली पर गाना क्यों गा रही हूँ क्योंकि जब भी मैं इंदौर जाती हूँ तो मैं खुद चांदनी जैसा अनुभव करने […]

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जीवन की रेसिपी : आणंद ना गोटा

यह एक गुजराती रेसिपी है, और चूंकि गुजरात में हर खाने की चीज़ में शक्कर या मीठे का उपयोग होता ही है इसलिए शायद उनकी बोली भी इतनी ही मीठी लगती है. तो गुजरात में रहने वालों के लिए गोटा कोई नई चीज़ नहीं, लेकिन जो गुजरात के बाहर रहते हैं, और उन्होंने गुजरात तरफ […]

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नायिका – 13 : विनय + नायक = विनायक

नायिका – डर तो अब भी है… एक औरत होने का………. डर अब भी है ……… रिश्तों और बातों में पारदर्शिता का डर अब भी है………………… शनिवार की रात के सपने का और रविवार की रात की बैचेनी का .. सपनों वाली रात …..एक अदृश्य सा व्यक्ति मेरे साथ घूम रहा है….. मैं खाना खा […]

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यात्रा : पाटलिग्राम, पाटलिपुत्र, पुष्पपुर, कुसुमपुर, अज़ीमाबाद से पटना तक की कहानी

आप सबने जूही की फिल्म हम है राही प्यार के फिल्म का यह गाना तो सुना ही होगा… बंबई से गयी पूना, पूना से गयी दिल्ली, दिल्ली से गयी पटना, फिर भी न मिला सजना…. तो जानेमन ऐसा है आपको पटना में यदि सजना नहीं भी मिलता है तो बिलकुल ग़म न करियेगा क्योंकि पटना […]

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जीवन है मेरा चुनाव, आपका चुनाव चिह्न क्या है?

कभी कभी उन सारे क्रिया कलापों से छुट्टी लेकर देखिये जिनमें लगातार आपकी उपस्थिति दर्ज होती है. जैसे मैं कभी कभी सोशल मीडिया या मेकिंग इंडिया साप्ताहिकी के लेखों से गायब रहने का प्रयास करती हूँ, क्योंकि मुझे कभी कभी लगता है मुझे लगातार झेलना ज़रा मुश्किल है, इसलिए एक ब्रेक ज़रूरी होता है. मैं […]

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नायिका -12 : मांग कर मैं न पीयूँ, ये मेरी ख़ुद्दारी है, इसका मतलब ये नहीं, कि मुझे प्यास नहीं

सूत्रधार – दो अंक पहले नायक नायिका का अंतिम संवाद कुछ यूं था कि नायिका किसी से झगड़कर खराब मूड लिए बैठी है और सारा गुस्सा नायक पर उतारते हुए कहती हैं “सारे मर्द एक जैसे होते हैं.” जवाब में नायक कहते हैं – वाकई?? सब मर्द एक जैसे होते हैं? अरे नहीं अभी सबसे […]

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टोपी शुक्ला : यह उपन्यास अश्लील है, जीवन की तरह!

भूमिका – मुझे यह उपन्यास लिख कर कोई ख़ास खुशी नहीं हुई. क्योंकि आत्महत्या सभ्यता की हार है. परन्तु टोपी के सामने कोई और रास्ता नहीं था. यह टोपी मैं भी हूं और मेरे ही जैसे और बहुत से लोग भी हैं. हम लोग कहीं न कहीं किसी न किसी अवसर पर कम्प्रोमाइज़ कर लेते […]

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तदबीर से बिगड़ी हुई तकदीर बना ले, अपने पे भरोसा है तो एक दांव लगा ले

हौसलों के पंख होते हैं, पैर नहीं। वो जब ठन जाता है, तो कोई आसमान उसकी पकड़ से बच नहीं सकता। एक ऐसे ही हौसले को मैंने आसमान की बुलंदी को छूते हुए देखा है। एक पैर की मोरनी को मैंने सावन में झूमते हुए देखा है। कोई फर्क नहीं पड़ता वह दिसंबर 1986 में […]

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इनबॉक्स बनाम कन्फेशन बॉक्स : ये दुनिया आभासी नहीं आभा-सी है

बचपन में दूरदर्शन पर एक टीवी सीरियल या फिल्म देखी थी, अब याद नहीं कि सीरियल था या फिल्म लेकिन उसका विषय और मुख्य कलाकार मस्तिष्क की किसी पर्त में जमा रह गया. इसलिए क्योंकि विषय बहुत अलग था.. मुख्य कलाकार थे पेंटल, एक परिपक्व अभिनेता… जिन्होंने उन दिनों कई टीवी सीरियल और फिल्मों में […]

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