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Tag: Ma Jivan Shaifaly

मोहब्बत और अदा का संगम : प्यार ये जाने कैसा है

पहाड़ से नदी का उतरना, अटखेलियों के दस्तावेज पर स्पर्श की मोहर और मोहब्बत से अदा का संगम बस यही भाव उपजते हैं, जब भी मैं इस गीत में जैकी की बाहों से उर्मिला का फिसलना, और फिर उलझकर शर्माना देखती हूँ…. रंगीला… जवानी की दहलीज़ पर कदम रखते हुए जिसने भी यह फिल्म देखी […]

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मैं और मेरी किताबें अक्सर ये बातें करते हैं : अघोरी बाबा की गीता

जीवन को अपनी पूरी उन्मुक्तता से वही इंसान जी सकता है, जो उसके रहस्यों को जानता हो या उन रहस्यों की खोज में अग्रसर हो. यूं तो ये रहस्य हमारे चारों ओर खुले पड़े हैं, लेकिन इनको समझने के लिए, शुरुआती तौर पर हम हमारे ही द्वारा इजाद की गई वस्तुओं के उपयोग में सुविधा […]

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आज की नायिका : जानती नहीं थी माहवारी, बेचती थी सेनेटरी नैपकिन

घर में सबसे बड़ी बेटी लेकिन उम्र केवल 13 साल, पिता की बीमारी से घर की ज़िम्मेदारी उसके नाज़ुक से कन्धों पर आ गयी. काम क्या करना है जानती नहीं थी. एक परिचित ने कहा सेल्सगर्ल बन जाओ, मैं दिलवाता हूँ काम, तो वो सेल्सगर्ल बन गयी. उसके हाथों में पकड़ा दिए गए सेनेटरी नैपकिन […]

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आत्ममंथन : जिसे जो बनना होता है वो बनके ही रहता है

“जिसे जो बनना होता है वो बनके ही रहता है…………..” सुबह के सपने की सारी गुत्थियाँ सुलझ जाने के बाद जो आख़िरी वाक्य लेकर मैंने आँखें खोली वह यही था… लगा आज सुबह से पहले जितनी भी सुबहें याद रखे हुए सपनों को लेकर मेरे जीवनकाल में आई वो इसी सुबह का संदेशा लाने की […]

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जीवन-रेखा : पहुंचेली

रेखा, विरह का सबसे सुन्दर अधूरा गीत कहते हैं मिलन का सबसे सुन्दर और भीना गीत वही लिख सकता है जिसने विरह की सबसे तपती भूमि पर नंगे पैर चलने का अनुभव प्राप्त किया हो. लेकिन कुछ गीत ऐसे भी होते हैं, जो विरह से मिलन तक नहीं पहुँच पाते, पूरे नहीं हो पाते. रेखा […]

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रेखा जहां पर ख़त्म होती है, वहां से शुरू होते हैं अमिताभ

रेखा जन्मोत्सव की सारी सीरिज़ को जब विराम देने का दिन आया तो ये ख़याल आया, 10 अक्टूबर की रात जब रेखा अपना जन्मदिन मना चुकी होगी, तब नए सूर्योदय के साथ 11 अक्टूबर को अमिताभ अपने जन्मदिन की मुबारकें ले रहे होंगे. उनके वास्तविक जीवन में भी उनका भाग्योदय तभी हुआ जब उनकी मन […]

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नायिका -4 : जादू और शक्ति

… कुछ बताऊँ? तुम अब लगभग तैयार हो कि हम मिल सकें… लगभग पर रुकना, ध्यान देना… उन 4 या 5 दिनों के ध्यान में बैठने का बहुत बड़ा हाथ है इस तैयारी में… अब बोलो, ये अगर पहले बता देता तो? तो ये अपेक्षा जुड़ जाती और उस तरीके से ध्यान सम्पन्न न हो […]

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अन्नपूर्णा : जिसके वक्षों का अमृत कभी सूखता नहीं, रसोई का रस उसी से है

जब वह रसोईघर में प्रवेश करती है तो उसकी चूड़ियों के साथ बर्तन भी लयबद्ध होकर खनक जाते हैं. हवा में घुलती छौंक की खुशबू से घर का वातावरण उतना ही शुद्ध होता है जितना हवन कुण्ड के उठते धुंए से. झालर वाली फ्रॉक पहने गोभी भी उसका पल्लू पकड़ कर खुशी से फूल हो […]

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मितवा : राग भूपाली का चुपके से आना राग पहाड़ी से मिलने

संगीत के रागों में मुझे संपूर्ण प्रकृति परिलक्षित होती दिखाई देती है. जैसे कोई थिरकती नदी हवाओं से संगत करे, जैसे कोई जलप्रपात कहरवा ताल में निबद्ध होकर घाटी में उतर जाए, जैसे गोपियों की लजाई पायल बज उठे. राग उतने ही प्राकृतिक हैं, जितनी कोई जंगली बूटी होती है. रागों का लेप अवसाद दूर […]

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चरित्रहीन – 1 : प्रेम, पीड़ा, प्रतीक्षा, परमात्मा

उसे कई बार ऐसा लगता है जैसे वह इस जन्म में जिस किसी से भी मिल रही है, वह पिछले किसी न किसी जन्म का कोई रिश्ता है… यूं तो वह हज़ारों लोगों से मिलती है, लेकिन एक दिन अचानक किसी को देखकर आँखें चमक जाती है. चेतना से कोई लहर उठती है और वह […]

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