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Tag: Ma Jivan Shaifaly

मानो या ना मानो -1 : चन्दन-वर्षा

इश्क़ जब उम्र का चोला सिलता है तो उसमें मिलन की झालर में लगे तुरपाई के तंतु इतने संवेदनशील हो जाते हैं कि चेतना तक पैरहन के लिए लालायित हो जाती है। आप मानो या ना मानो लेकिन ये ऐसी ही इश्क़ की कहानी है कि मृत्यु के पश्चात भी वो आशिक़ से मिलने आती […]

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कुछ परियां काली भी होती हैं!

RENEE KUJUR: मन को बावरा बनाता, बाला का सांवरा रंग जब किस्मत मेहरबान होती है तो वो रंग नहीं देखती कि गोरी की किस्मत चमकाना है या काली की, बल्कि यदि रंग देखकर ही किस्मत चमकती होती तो रात के काले आसमान पर चमकते चाँद और सितारों की तरह काले रंग पर अधिक चमकती हुई […]

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बस एक दिन तुम लौट आना अपनी देह में…

हर देवता में कुछ मानवीय गुण होते हैं और हर मानव में कुछ असुर तत्व, इससे हम उसे देवता या मानव होने से पदच्युत नहीं कर सकते। वैसे ही किसी पुरुष में स्त्री तत्व प्रबल हो जाता है, तो कभी किसी स्त्री में पुरुष तत्व प्रबल हो जाता है, तो हम उसे उसके पुरुष या […]

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गुलज़ारी जादू : धन्नो की आँखों में रात का सुरमा और चाँद का चुम्मा

एक कवि के व्यक्तित्व का पैमाना उसके जीवन में घटित घटनाएं नहीं होती, उस जीवन में उन तमाम असंगत या कभी-कभी क्रूर घटनाओं के बावजूद वो अपनी कविता कितने नाज़ुक शब्दों के साथ प्रस्तुत करता है, इससे उसके चरित्र और व्यक्तित्व को देखा जाना चाहिए… सिर्फ देखा जाना ही काफी है, क्योंकि जिस गहरे तल […]

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सीधे रस्ते की ये टेढ़ी सी चाल है…

जीवन विविधता से भरा हुआ है और आज मुझे आप सबसे ढेर सारी अलग-अलग बातें करनी है…. तो मैं अपने किशोरावस्था से शुरू करती हूँ, बचपन मेरा बहुत यादगार नहीं रहा होगा इसलिए मुझे याद नहीं… वैसे भी ध्यान बाबा कहते है जब आप 14 वर्ष और 23 दिन की हुई थीं तब आपके जीवन […]

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व्यवस्थित अव्यवस्था आवश्यक है जीवन के लिए…

भावनात्मक अधोगमन के साथ ऊर्जा के उर्ध्वगमन के व्युत्क्रमानुपाती नियम के साथ समानानुपाती रूप से आगे बढ़ते रहिये। प्रेम और पैसे के जोड़ या घटाव के परिणाम की चिंता किये बिना दो समानांतर रेखा की तरह बिना किसी के मिले अपनी रेखा पर सीधे चलते रहिये… क्योंकि हर गोल-मोल रेखा भी सरल रेखा के अंश […]

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Life Love Liberation : ध्यान ही जीवन, जीवन ही प्रेम, प्रेम ही परमात्मा

मैं अपनी बात शुरू करूं इसके पहले जानिये बब्बा क्या कह रहे हैं, कोई आध्यात्मिक गुरु, कोई ज्ञानी बात कहता है तो हम उसे जल्दी ग्रहण कर पाते हैं. लाओत्से कहता है, चलो, लेकिन ध्यान नाभि का रखो. बैठो, ध्यान नाभि का रखो. उठो, ध्यान नाभि का रखो. कुछ भी करो, लेकिन तुम्हारी चेतना नाभि […]

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सामाजिक से प्राकृतिक होने की प्रक्रिया का नाम है अध्यात्म

आध्यात्मिक लोग भी दो तरह के होते हैं. एक जो आधुनिक से ग्रामीण हो जाते हैं, मेरे जैसे आदिम, ठेठ… सदैव के अज्ञानी जिन्हें वास्तव में कुछ नहीं आता लेकिन जिससे जो सीखने को मिल जाए सीखता चला जाता है… जितना सीखता जाता है उतना ही ग्राम भी छूट जाता है… छंटाक भर आध्यात्मिकता में […]

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कुम्हारन के हाथ तो सदैव मिट्टी में सने रहते हैं…

कुम्हारन के हाथ तो सदैव मिट्टी में सने रहते हैं… मिट्टी जो उसकी माँ भी है और सखी भी… गुरु भी है और पिता भी… सुहाग है, तो चिता की राख भी… इस मिट्टी को इस बात से कोई लेना देना नहीं कि उसके बने पात्र में किसको पानी पीना नसीब हुआ है, इस मिट्टी […]

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फेसबुक अड्डा : ‘आभा-सी’ दुनिया में मेरा पता

फेसबुक के राजमार्ग से एक छोटी सी पगडंडी मेरे घर की तरफ मुड़ती है, थोड़ी सी पथरीली है. जूते पहनकर आएँगे तो थोड़ी सुविधा रहेगी, लेकिन मेरे घर में प्रवेश से पहले जूते उतारने होंगे. बस ध्यान रखियेगा अपने जूते में पाँव फंसे रहते हैं तो हम सामने वाले के जूते में पैर डालकर उसकी […]

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