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Tag: Ma Jivan Shaifaly

नायिका – 10 : उनका फरमान!!!

भला लिखना भी मजबूरी में हो सकता है क्या? न दिमाग में कोई विचार हो, न मन में कोई उमंग, कलम उठाते ही हाथ में दर्द शुरु हो जाये, न लिखने के दसियों बहाने सूझे, पर नहीं साहब, लिखना तो पड़ेगा! पर क्यों? ऐसी भी क्या विवशता है? है न, उनका फरमान!!! पहले फतवा दे […]

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मानो या ना मानो : जब ‘शैफाली’ के लिए ओशो ने उठा लिया था चाकू!

25 अप्रेल 2010 की बात है … मैं सुबह सुबह ध्यान करने के बाद बब्बा (ओशो) और एमी माँ (अमृता प्रीतम) के बारे में अपनी डायरी में लिख रही थी – “मेरे अस्तित्व की डोर सदा इन दोनों के हाथ में रही है और आज भी है… ये दोनों मुझे मिलकर संभाले हुए हैं… क्या […]

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नायिका – 9 : क्यों दुखता है दाँत? ऐसे में मीठा कम बोलना चाहिए!!!!

नायिका का अगला ई-मेल – अभी अभी फिर किसी से तनातनी हो गयी…. खैर झगडालू हूँ लेकिन कुछ लोगों के लिए.. झगड़ने के बाद मन खराब हो जाता है… खराब मन लिए बैठी हूँ आपके सामने… एक साया-सा रूबरू क्या है… सुन रही हूँ अपलोड किया है आप भी सुनिए या फिर बताइये आपके पसंद […]

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ओ साथी रे दिन डूबे ना : प्रणय का मनुहार गीत

जब भी तुझे आँख भर देखता हूँ एक बात भेजे में कौंधती है… क्या? ये के या तो तू बहुत बड़ी लुल्ल है या बहुत बड़ी चुड़ैल…. उत्तर प्रदेश की पृष्ठभूमि पर राजस्थान की महक वाले मिट्टी के सौंधे से घर के आँगन में दौड़ती दो देहों का यह गीत मुझे तब से बहुत आकर्षित […]

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दिल चाहता है : प्रेम कथा भक्ति और ज्ञान की

परमात्मा के जन्म की कोई कहानी यदि होती तो परमात्मा के जन्म के साथ जुड़ी होती परमात्मा के प्रति आस्था और भक्ति. चूंकि परमात्मा सनातन है… इसलिए उसके साथ भक्ति भी सनातन हुई. हाँ ज्ञान ने अवश्य मनुष्य के जन्म के साथ सृष्टि में प्रवेश पाया, चाहे वो अमैथुनीय सृष्टि के जन्म की बात ही […]

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संता और बंता : एक आभा-सी संवाद

मैं चुपचाप उनको सुनती जा रही थी… या कहूं पढ़ती जा रही थी तो बेहतर होगा, आखिर टेक्स्ट मैसेज था यह… प्रेम में देह की भूमिका पर बहुत स्वच्छंद विचार लिखे थे. सामान्यत: इस तरह स्वच्छंद होकर लिखनेवालों के लिए मन में एक ऐसी ही छवि बन जाती है कि जैसा इन्होंने लिखा है वही […]

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AskAmma : हाथ से कोई दुर्लभ सुयोग छूटेगा तो नहीं?

मां… बस एक सवाल का जवाब… जब दिल करेगा दीजिएगा.. पर मैं जानना चाहता हूं.. आप हैं कौन..? और मेरी नियति को लेकर इतने भरोसे से कैसे कह सकती हैं..? मां…आप इंसान ही हैं ना मां..? आप इंसान के वेश में… कोई दिव्य शक्ति तो नहीं.. मैं अनुभवहीन हूं… मेंरे सवाल को धृष्टता न समझिएगा.. […]

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नायिका – 8 : कहीं इसे फ्लर्ट करना तो नहीं कहते हैं ना?

सूत्रधार – नायिका अपनी तस्वीर कुछ देर के लिए ब्लॉग पर लगाती है और नायक को मेल से खबर कर देती है कि देख लें कहीं यही वो चेहरा तो नहीं था जो उसे सपने में दिखाई दिया था. नायिका की तस्वीर देखने के बाद नायक जवाब देता है- चाहें तो अभी हटा दीजिये. पुण्यतिथि […]

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मिलन : छठा तत्व

काया विज्ञान कहता है: यह काया पंचतत्वों से मिलकर बनी है- पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि और आकाश. लेकिन इन पाँचों तत्वों के बीच इतना गहन आकर्षण क्यों है कि इन्हें मिलना पड़ा? कितने तो भिन्न हैं ये… कितने विपरीत… कहाँ ठहरा हुआ-सा पृथ्वी तत्व, तरंगित होता जल तत्व, प्रवाहमान वायु तत्व, और कहाँ अगोचर आकाश […]

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ये जो रुख़सार पे तिल सजा रखा है, दौलत-ए-हुस्न पे कातिल बैठा रखा है

मित्रों, सुई की नोक जितना छोटा तिल भी रुख़सार में कशिश डाल देता है। यह बात बताती है कि हमारा किरदार सूक्ष्म विशेषताओं से भी किस कदर निखर सकता है। आपका कोई एक छोटा सा गुण भी आपके व्यक्तित्व में सुगंध उत्पन्न कर सकता है। ईश्वर की कृपा दिला सकता है। श्वेताम्बर जैन तेरापंथी आचार्य […]

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