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Tag: Ma Jivan Shaifaly

नायिका – 7 : अरमान तमाम उम्र के सीने में दफ्न हैं, हम चलते-फिरते लोग मज़ारों से कम नहीं

बहरहाल तो जनाब यहाँ से शुरू होता है नायक का परिचय… ख़ुद नायक की ज़ुबानी… जी हाँ कहा ना मैंने बताना शुरू किया तो कहानी आगे नहीं बढ़ेगी… आप जितना भी नायक के बारे में जानेंगे, जितना भी उसे समझेंगे वो सब नायक के ही शब्दों में होगा…. क्योंकि नायक को ख़ुद के अलावा और […]

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#AskAmma : प्रेम में देह की भूमिका और SEX की कामना

मुझसे जुड़ें मित्रगण अलग अलग अवसरों पर अलग अलग लेख पर या इनबॉक्स में कुछ व्यक्तिगत तो कुछ सामान्य प्रश्न मुझसे पूछा करते हैं. जैसा कि मैं हमेशा कहती हूँ मैं कोई बहुत बड़ी ज्ञानी नहीं हूँ जो सबके प्रश्नों का उत्तर जानती हूँ या मुझे सब पता है, और सबसे बड़ी बात मैं जो […]

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अँगरेज़ की कहानी : जादूगरनी

You are my dream girl यही तो कहा था मैंने उसे… और जब उसने कहानियाँ लिखना शुरू की तो मुझे ही अपने स्वप्न लोक में उतार लाई… अब उसे जादूगरनी ना कहूं तो क्या कहूं… कौन किसके सपनों का पात्र है यही तय नहीं हो पा रहा…. कभी किताबों में पढ़ी थीं ऐसी कहानियाँ… रहस्यलोक […]

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नायिका – 6 : न आया माना हमें cheques पर हस्ताक्षर करना, बड़ी कारीगरी से हम दिलों पर नाम लिखते हैं

पिछले भाग में आपने पढ़ा कि एक महीने के अंतराल के बाद नायिका नायक के ईमेल का जवाब भेजती है, जिसके जवाब में जनाब लिखते हैं – बेग़म अख्तर गा रही हैं, शायद सुदर्शन फ़ाकिर का क़लाम है – ज़िंदगी कुछ भी नहीं फिर भी जिये जाते हैं! तुझपे ए वक़्त हम एहसान किये जाते […]

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तुलसी कल्याणं : देव जागो कि मुझे ब्याह रचाना है…

कथाएँ चाहे काल्पनिक हो, उसके पीछे के सन्देश काल्पनिक नहीं होते. धर्म पथ पर चलने के लिए देवताओं तक को श्राप और कलंक माथे पर लिए घूमना पड़ता है… लेकिन ये धर्म पथ पर चलने का ही पुरस्कार है कि श्राप भी आशीर्वाद में बदल जाता है… असुर जलंधर की आसुरी शक्ति से हारे शिव […]

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मैं और मेरी किताबें अक्सर ये बातें करते हैं : हस्या ई कंजर

नामचीन उपन्यासकार और पॉकेट बुक्स के शहंशाह सुरेन्द्र मोहन पाठक की जब मैं नई-नई पाठिका बनी थी तब उन्हें एक लंबा सा पत्र लिखा था. वो पत्र उन तक पहुँच पाया या नहीं ये मुझे नहीं पता…. उस समय ज्योतिर्मय मेरे गर्भ में थे… 2009 में लिखे उस पत्र को मैं ज्यों का त्यों आपके […]

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अंगरेज़ का रंगरेज़ हो जाना

अंगरेज़…. कहने लगा मैं आप पर एक कहानी लिखूंगा… मेरी कहानी का पात्र… मेरी ही कहानी में प्रकट होकर कह रहा मैं उस रचयिता पर कहानी लिखूंगा जिसने मुझे रचा है… दो कहानियां एक दूसरे में उलझ रही थीं… जैसे कल्पवृक्ष पर चढ़ती दो बेलें… अपनी अपनी कामनाएं दर्ज़ करती हुईं… तुम्हारी जुल्फों के पेंच […]

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लक्ष्मी और दुर्गा का ब्रह्माण्डीय नृत्य

संसार में भाषा का आविष्कार करने वाले कौन थे, ये तो मैं नहीं जानती लेकिन इतना मैं यकीन से कह सकती हूँ कि अविष्कार के बाद इसका सबसे अधिक उपयोग और उस पर प्रयोग लड़कियों ने किया होगा… बातें करती हुई लड़कियों को कभी ध्यान से देखा है? उनका सारा संसार उनके संवाद की डोर […]

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अंगरेज़न : जंगल की रानी

जिनको जिनको भी मिलना है लिखा इश्क़ मिलवायेगा दूर दूर से ढूंढ ढूंढ के पास ले आएगा कहीं भी जाके छुपो इश्क़ वहीँ आएगा कितना भी ना ना करो उठा के ले जायेगा मानो या न मानो ये सारी ही दुनिया इसी के दम पे चले… यह सिर्फ एक गीत नहीं, मेरे जीवन का रहस्य […]

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मैं और मेरी किताबें अक्सर ये बातें करते हैं : वर्जित बाग़ की गाथा

ये समीक्षा नहीं है, सचमुच समीक्षा नहीं है. समीक्षा तो पुस्तक की होती है, जीवित गाथाओं की नहीं. अच्छा बुरा पहलू तो लिखे हुए हरूफ़ का देखा जाता है, उन हरूफ़ का नहीं, जो रूह बनकर गाथाओं के शरीर में बसते हों. कुछ हर्फ आँखों से गुजरकर चेतना बनकर हमारे अचेतन मन में ज़िंदा रहते […]

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