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Tag: Ma Jivan Shaifaly

मुझ जंगली का मन तो जंगल में ही भटकता है

बचपन के दिनों में खाए गए फलों को याद करती हूँ तो दो तीन चीज़े दिमाग में कौंध जाती है, और मैं ‘हाय वो भी क्या दिन थे’ सोचकर बचपन की गलियों में उतर जाती हूँ… जहां माँ गर्मियों के मौसम में रस वाले नरम आम की टोकनी, एक बड़ा सा तपेला लेकर बैठती थी […]

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संतानवती की ओर से माँ शीतला को धन्यवाद

यह तस्वीर देखकर किसी के मन में ‘आस्था’ जागेगी, किसी के मन में ‘अन्धविश्वास’… लेकिन इसे देखकर मेरे हृदय के अश्रु कुण्ड में एक बड़ी सी लहर जागी और भरे कंठ के साथ मेरी चेतना भी जैसे माँ के चरणों में ऐसे साक्षात दंडवत हो गयी… तब तक ना मैंने इस तस्वीर के पीछे के […]

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Power Of Name : पुकारो, मुझे नाम लेकर पुकारो

कुछ सालों पहले यह विज्ञापन टीवी पर अक्सर देखने में आता था और उसका यह डायलॉग बहुत प्रसिद्ध भी हो गया था – क्यों सुनील बाबू, नया घर?? इस विज्ञापन में ऐसा क्या खास था, जो सबका ध्यान आकर्षित कर गया? यदि इस विज्ञापन में इस संवाद की जगह सिर्फ यह होता, क्यों भई नया […]

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मोशन से इमोशन तक : पेट साफ होगा तभी तो वज़न के साथ इंसाफ़ होगा

पिछले कई दिनों से डॉ विपिन गुप्ता के सेहतवन के वीडियोज़ देख रही हूँ. एक-एक बात बहुत गौर करने लायक होती है. मोशन से इमोशन तक के अपने वीडियो में बहुत अच्छी जानकारी दी है. चूंकि आपके शरीर का ही नहीं आपकी चेतना का सम्बन्ध भी आपके पेट से होता है इसलिए किसी भी तरह […]

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5 Minutes Craft : छोटे परिवर्तन जो लाते हैं बड़े बदलाव

मैंने अक्सर गृहणियों को रोज़-रोज़ एक ही तरह के काम से उकताते हुए देखा है. एक ही ढर्रे पर काम करते हुए वो उसकी इतनी अभ्यस्त हो जाती है कि उनको नींद में से उठाकर भी कुछ पूछ लो तो किसी भी वस्तु के बारे में बिलकुल सही-सही जानकारी दे देंगी. लेकिन यह एकरसता उनके […]

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हम तो ऐसे हैं भैया

ज्ञान और शिक्षा में अंतर उतना ही है जैसे आत्मा और शरीर में है. आत्मा अपने पूर्व जन्मों से कुछ ज्ञान लेकर आती है जैसे एक बना बनाया घर हो और जन्म के बाद शिक्षा का अर्थ कुछ यूं है जैसे उस घर को सुन्दर बनाने के लिए सजावट का सामान. तो आपसे मिलते ही […]

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कालबेलिया : नागलोक की परियों का धरती पर नृत्य

काला रंग मुझे हमेशा से आकर्षित करता है. कहते हैं काला रंग काला इसलिए है क्योंकि वो सारे रंगों को सोख लेता है, परावर्तित नहीं करता… तो इन नागलोक की परियों ने भी जैसे जीवन के सारे रंग सोख लिए हैं, और फिर इनको लिए जब गोल घूमती हैं तो लगता है जैसे इनसे निकलकर […]

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वो दुनिया मेरे बाबुल का घर … ‘ये’ दुनिया ससुराल…

पिछले हफ्ते लगातार एक सवाल मुझसे अलग-अलग लोगों द्वारा पूछा गया, मेकिंग इंडिया का उद्देश्य क्या है? सबको अलग-अलग जवाब दिए हैं, राष्ट्रवादियों को राष्ट्र सेवा, आध्यात्मिक लोगों को आध्यात्मिक सन्देश, जीवन को भरपूर जीने वालों को जीवन के सारे रंग उड़ेलते हुए सकारात्मक उद्देश्य…. अलग-अलग लोगों के लिए मेकिंग इंडिया की उपयोगिता अलग-अलग है. […]

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सामाजिक व्यवस्था और विवाहेतर सम्बन्ध, ब्रह्माण्डीय व्यवस्था और जीवनोत्तर यात्रा

विवाह को लेकर हमारे यहाँ जहां सात जन्मों की कसमें खाई जाती हैं, उसके पीछे क्या भाव होते हैं? आज के आधुनिक समाज में क्या रिश्ते वास्तव में इतने टिकाऊ और विश्वासपूर्ण रह गए हैं? यदि वास्तव में ऐसा है तो विवाहेतर सबंधों की अचानक से बाढ़ क्यों आ गयी है? या फिर सोशल मीडिया […]

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टेलिफ़ोन धुन में हँसने वाली मनीषा : ‘सौदागर’ से ‘डियर माया’ का सफ़र कैंसर की राह से गुज़रकर

मनीषा, मुझे पसंद है सिर्फ उसकी सुन्दरता के कारण नहीं, उसकी प्यारी मुस्कान के कारण नहीं, उसके सहज अभिनय के कारण नहीं, बल्कि उसकी जिजीविषा के कारण जिसकी वजह से वो खुद को मौत के मुंह से खींचकर ले आई… अपनी आधुनिक जीवन शैली के लिए हमेशा चर्चा में रही मनीषा ने उन दिनों सबसे […]

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