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Tag: Ma Jivan Shaifaly

माँ के जीवन से : YOU ARE MY PARLE-G

हम भारतीयों में शायद ही कोई ऐसा होगा जिसने अपने जीवन में Parle-G बिस्किट नहीं खाए होंगे। पारले जी के साथ और बाद बहुत सारे ब्रांड आए, लेकिन पारले जी जैसे वटवृक्ष की जड़ें न हिला सके। भारत की कुछ नामी कंपनियों में पारले जी एक ऐसा नाम है जिसका इतिहास भारत की स्वतंत्रता के […]

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मैं अपनी ही प्रेमिका हूँ

शायद 1996 या 97 की बात होगी उन दिनों टीवी पर एक डेली सोप आता था “एक महल हो सपनों का” ये टीवी सीरियल पहले गुजराती में बना फिर उसकी लोकप्रियता को देखते हुए उसका हिन्दी रीमेक भी बना। गर्मी की छुट्टियां चल रही थी, मेरा ग्रेजुएशन हो चुका था, और मैंने अपने विद्रोही लक्षण […]

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जा वे सजना… मैं नईं करना तेरा एतबार…

पहाड़ी प्रेमाकांक्षी इकतरफ़ा होते हैं। जिनमें प्रेमी सदा समुंदर के तटीय मैदानी परदेस से आते तो हैं और प्रेमिका के दिल मे देस भी बसाते हैं फिर रुत बदलते ही रुत की ही तरह बदल जाते हैं। अपने देस याने के परदेस के हो लेते हैं। यह बात तनिक भी झूठी नहीं। न जाने कितनी […]

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बनारस : एक रहस्यमय आध्यात्मिक प्रेम कहानी

कुछ दिनों पहले फिल्म बनारस का अंत देखा, कुछ आधे एक घंटे की ही फिल्म देखी, कहानी ऐसी कि हर दृश्य पर आंसू निकलते रहे, दो कारणों से। पहला, बनारस की पृष्ठभूमि पर बनी एक रहस्यमयी प्रेम कथा को फिल्म चालबाज़ के निर्देशक पंकज पराशर ने बिलकुल ही चालबाज़ स्टाइल में बनाकर फुर्सत पा ली […]

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मानो या ना मानो -7 : महासमाधि की झलक

पिछले महीने ‘युगन युगन योगी’ यह पुस्तक एक मित्र के माध्यम से जादुई रूप से पहुँची थी… यूं तो मैं आजकल सद्गुरु को दिन रात यूट्यूब पर सुनती रहती हूँ, लेकिन पुस्तक पढ़ने का जादू क्या होता है वो मैंने ‘वर्जित बाग की गाथा’ और ‘हिमालायीवासी गुरु के साए में श्री एम’ पुस्तक से जाना […]

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मानो या ना मानो – 6 : अग्नि के मानस देवता

मानो या न मानो भाग-5 के आगे… चार साल बाद मिली उस ड्रेस को पहनने के बाद मैं खुद को कहीं की परी समझने लगी थी, उम्र को मैंने कभी खुद पर हावी नहीं होने दिया इसलिए कोई भी ड्रेस किसी भी उम्र में पहनने में मुझे कभी कोई झिझक नहीं हुई। तो मेरी वह […]

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मानो या ना मानो – 5 : इच्छापूर्ति के लिए कायनाती षडयंत्र

बात उन दिनों की है जब फैशन डिजाइनिंग का शौक चढ़ा था… अधिकतर ड्रेस मैं अपने हाथों से बना लेती थी, बात शायद 2002 के आसपास की होगी, विचार आया था कि अपने इस शौक को क्यों न प्रोफेशनल रूप में सीखकर करियर बना लूं, तो उन दिनों NIFT में दाखिला लेने भी गयी थी […]

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मानो या ना मानो – 4 : पिता के अंतिम दर्शन

पिता की मृत्यु के बाद लिखे दो लेख- सत्य से मुंह फेर कर खुद को समेट समेट कर जीते रहने की आदत औरत में जन्म के साथ पड़ जाती है, क्योंकि वह अपनी माँ को और माँ की माँ को भी इसी तरह जीते हुए देख चुकी होती है। पूछने पर जवाब भी यही मिलेगा […]

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मानो या ना मानो – 3 : मुक्ति के यज्ञ में पिता ने दी आहुति

पिछले वर्ष जीवन एक चिलक हो गया था… चिलक जानते हो ना, पीठ की अकड़न से उठने वाली पीड़ा… भयंकर दर्द… असहनीय… ऐसा कि बस मुंह से अंतिम शब्द जो निकला था … पापा मुझे अपने पास बुला लो… बस अब नहीं जीना मुझे… मैं जीना नहीं चाहती… अपने पास बुला लो… पापा मेरे उलटे […]

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मानो या ना मानो – 2 : हनुमान दर्शन

(यह पिछले वर्ष मुझ पर हुए आध्यात्मिक प्रयोग पर लिखी सम्पूर्ण घटना जीवन पुनर्जन्म का एक अंश भर है) उन दिनों मैं पिछले जन्म में हुए किसी गुनाह के भय से जूझ रही थी जिससे मुक्त करने के लिए मुझ पर प्रयोग हो रहे थे। भय से मुक्ति के लिए एकमात्र साधना है हनुमान तत्व […]

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