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Tag: Ma Jivan Shaifaly

नायिका -2 : Introducing NAAYIKA

बात 2007 की है जब नायिका एक मल्टी नेशनल कंपनी में काम करती थी. तनख्वाह इतनी थी कि उस ज़माने के हिसाब से घर खर्च निकालने के बाद चाहे जितना रूपया खुद पर खर्च कर सकती थी. बाज़ार गए हैं कोई साड़ी एक नज़र में पसंद आ गई तो बस चाहिए, फिर चाहे वो 100 […]

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अनोखी रात : क्या होगा कौन से पल में, कोई जाने ना

मैं तुम्हारे लिखे एक-एक अक्षर पर पाँव धर पार कर लेती हूँ हर वो कविता जो तुम विरह की रात में लिखकर बहा देते हो बनारस के घाट पर… ताकि मुझ तक पहुँच न सके… और उन्हीं अक्षरों को मैं यहाँ नर्मदा में पाँव डाले प्रतीक्षा की बेड़ी बना लेती हूँ… यही अंतिम बंधन है […]

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नायिका -1 : Introducing NAYAK

दिक्कत क्या है मेरे साथ जानती हो? मेरे होश नहीं खोते. सच… ऐसा ही हूँ. कुछ चुरा लेने का क्रेडिट तुमसे छीन रहा हूँ. मेरे होते हुए कुछ चुराने की क्या ज़रूरत? हाँ तुमसे शेयर बहुत कुछ किया… होश में किया… और अभी किया ही कितना है? समुद्र से बूँद जितना… यकीन करो, सारे जीवन […]

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सहजन : सब जन की समस्या का निदान देता एक जादुई वृक्ष

यूं तो इसे मुनगा कहते हैं लेकिन मुझे इसका सहजन नाम अधिक पसंद है. इसका संधि विच्छेद करें तो होता है सह+जन, यानी जो सब जन के साथ है. कहते हैं मृत शरीर को जीवित करने के अलावा यह सारे रोगों को दूर कर सकती है. एक फली जो फलने फूलने से पहले ही अपनी […]

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जीवन का पूर्ण सत्य : आधा है चंद्रमा रात आधी

आसमान का नीला रंग चुराकर, प्रेम की नदी में घोल आने से नदी आसमानी हो जाती है. कामनाएं दुनियावी पैरहन उतारकर नीले रंग को देह पर मलती हैं, और जलपरियों की भांति क्रीड़ा करती हुई चाँद का गोला एक दूसरे पर उछालती हैं… गीले पानी में सूखे भाव भी, तेज़ी से भागती रात के साथ […]

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मानो या न मानो : सिर्फ़ सोचने भर से सब हो जाता है

Pareidolia का अर्थ खोजने जाएंगे तो वो कहेंगे Pareidolia is a psychological phenomenon in which the mind responds to a stimulus, usually an image or a sound, by perceiving a familiar pattern where none exists. उनके हिसाब से ऐसी कोई वस्तु वास्तविक रूप से नहीं होती बस यह आँखों का भ्रम या आप इसे Illusion […]

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आभासी संवाद : आस्तिक और नास्तिक के बीच

जब जब नास्तिकता और आस्तिकता के बीच बहस होगी, जीत हमेशा नास्तिकता की ही होगी क्योंकि नास्तिक व्यक्ति अपनी नास्तिकता को लेकर सबसे बड़ा आस्तिक निकलेगा. और आस्तिक व्यक्ति हमेशा उसकी नास्तिकता पर भी आस्था रखेगा, क्योंकि बिना आस्था के तो आस्तिक भी आस्तिक कहाँ रह जाएगा. वो स्वीकार करेगा नास्तिक को उसकी पूरी नास्तिकता […]

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जीवन-लीला : कृष्ण तत्व का जन्मोत्सव

नायक से मिलने से पहले नायिका जीती थी मध्य मार्ग में… थोड़ा-थोड़ा, थोड़ा-सा प्यार, थोड़ी-सी नफ़रत, थोड़ी-सा जीवन, थोड़ी-सी मृत्यु… और आज? नायिका – आज अपनी परछाई बनाकर तुम मुझे वहां तक ले गए हो जिसे अति कहते हैं… extreme में जीना, खतरनाक ढंग से जीना… जीने का और कोई तरीका ही नहीं होता जानती […]

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मानो या ना मानो : खजाने के रखवाले या मार्गदर्शक तीन बाबा

ये हैं सुशील जी उर्फ पिल्लू और उनके सुपुत्र रोहित. ये दोनों घरों में पुताई का काम करते हैं, जब मेरे बच्चों ने दीवारों पर जी भर कर चित्रकारी कर ली तब दादाजी ने इन दोनों को बुलाया और पूरे घर भर की पुताई करवाई. अब आप सोच रहे होंगे इन दोनों में ऐसी क्या […]

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एक थी अमृता : और एक थी सारा

सुबह उठी तो सीने में सारा कुलबुला रही थी… किसी पर चिढ़ रही थी किस पर नहीं जानती… शायद सारा भी नहीं जानती थी. इसलिए अपनी चिढ़ या कहें कुलबुलाहट उसके लफ़्ज़ों में उतर आती. इसलिए सारा की लिखी नज़में किसी स्केल पर नहीं बनती थी. उसको नापने का पैमाना रुके हुए आंसुओं का जमावड़ा […]

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