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Tag: Ma Jivan Shaifaly

वज़न नियंत्रण : आवश्यकता से अधिक खाते समय, इसके उलट विचार क्यों नहीं आते!

ऐसे एकदम से खाना पीना नहीं छोड़ देना चाहिए, कमज़ोरी आ जाती है.. कैल्शियम की कमी हो जाएगी… अरे हिमोग्लोबिन कम हो जाएगा… चेहरे की सारी चमक चली जाएगी.. त्वचा लटक जाएगी तो झुर्रियां ज़्यादा दिखने लगेगी… शरीर को कम से कम पौष्टिक भोजन तो मिलते रहना चाहिए… पता है खाना कम खाने से भी […]

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काली

कुंठा, पीड़ा, तड़प, अकुलाहट और प्रतीक्षा की लम्बी यात्रा के बाद जब आपका पूरा अस्तित्व ही प्रश्न में परिवर्तित हो जाये तब जाकर उत्तर प्रकट होता है. प्रश्न सिर्फ एक ही होता है अमूमन सबका … आखिर मेरे साथ ही क्यों? उत्तर काली के इस चित्र के साथ प्रकट हुआ, माध्यम हमेशा की तरह ध्यान […]

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कागज़ी दस्तावेज : पिया की प्रतीक्षा में घूंघट ओढ़े बैठी रोज़ एक नई दुल्हन हूँ मैं

हर वर्ष जनवरी की पहली तारीख को बच्चों के दादाजी मुझे उपहार स्वरूप नई डायरी देते हैं. कम्प्यूटर की इस ठक-ठक में कलम अक्सर साथ छोड़ देती है. लेकिन उन्होंने कभी डायरी देना नहीं छोड़ा. उन्हें पता है मेरी आत्मा मेरे लिखे गए मृत शब्दों में हमेशा जीवित रहेगी. डायरी में लिखना अमूमन ना के […]

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भारतीय भोजन थाली से गायब सेंधा नमक और अजीनोमोटो की सेंध

एक समय था जब भारत की पारंपरिक रसोई में सिल बट्टे पर मसाले पीसते समय खड़ा नमक डाला जाता था. काला नमक और सेंधा नमक तो उपवास में खाया जाने वाला नमक था यानी इतना शुद्ध कि नमक खाने से भी व्रत ना टूटे. फिर अचानक से वैश्वीकरण की चकाचौंध में हमें अपनी ही रसोई […]

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देह के सितार से निकलता सूक्ष्म प्राणों का गीत

संगीत और साहित्य अध्यात्म की जुड़वा संताने हैं… यूं तो जीवन में और जीवन के परे हो रहा हर कृत्य और कुकृत्य इसी मुखिया के गाँव की सरहद का हिस्सा है. उसके गाँव की सीमा पर जो दीवारें हैं उन पर जीवन की उत्पत्ति की प्राचीन कहानियां चित्रित हैं. उसके दरबार में प्रसन्नता कालबेलिया नृत्य […]

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Carolyn Hartz : चार पोतों की 70 साल की इस दादी जैसे आप भी हो सकते हैं युवा

मेरी त्वचा से मेरी उम्र का पता ही नहीं चलता… टिंग टोंग संतूर संतूर…. साठ साल के बूढ़े या साठ साल के जवान…. इस तरह के बहुत से विज्ञापन हम देखते आये हैं, विज्ञापन हमारे लिए हमेशा से कार्यक्रम के बीच में आने वाली बाधा रहे हैं… कभी कोई विज्ञापन पसंद भी आ जाता है […]

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ओमुआमुआ : वह अतीत का अग्रदूत!

अंतरिक्ष मेरे लिए हमेशा से बहुत रहस्मयी रहा है, बचपन से ही रात के आसमान को तकने की आदत रही है…. बहुत सारे ऐसे अद्भुत दृश्य बिना टेलिस्कोप के देखे हैं, लगता था जैसे कोई सिनेमा के परदे पर उभरता दृश्य देख रही हूँ… कभी लिखा था यह – अवकाश का आकाश “पहला नियम …. […]

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जानेमन तुम कमाल करती हो….

बहुत विस्तृत है भाव जगत, जिन्हें शब्दों का बंधन रास नहीं आता, फिर भी अज्ञात को ज्ञात शब्दों में प्रस्तुत करने की मनुष्य की सीमा को तोड़ने की ज़िद लिए तुम हर बार शब्दों के समंदर में कूद जाती हो… जानेमन तुम कमाल करती हो…. कभी ठहर जाया करो उन दो दुनिया के बीच में […]

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गुड्डी मिली? : किरदार के भीतर और बाहर की दुनिया

जीवन में घटने वाली हर महत्वपूर्ण घटना एक फिल्म के समान होती है जिसकी स्क्रिप्ट नियति द्वारा पहले से लिख दी गयी है, साथ में आपका किरदार भी. अब ये आप पर निर्भर करता है कि आप अपना वास्तविक चरित्र उसमें लाए बिना उस किरदार को अपने अभिनय से कितना सशक्त बनाते हो. बावजूद इसके […]

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पग घुँघरू बाँध मीरा नाची रे…

रिश्ते खट्टे हो जाएं तो उसमें से थोड़ा जामन निकालकर बहती भावनाओं का दही जमा लेना, फिर उसमें थोड़ा सा मीठा प्रेम डालकर मीठी लस्सी बना कर या मिष्टी दोही बनाकर खुद भी खाना, औरों को भी खिलाना… मेकिंग इंडिया साप्ताहिकी अप्रेल माह – पहला अंक और हाँ, कहते हैं न कोई कुछ नया काम […]

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