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Tag: Ma Jivan Shaifaly

माँ की रसोई से : गिलकी की झिलमिल रेसिपी

माँ मेरी अक्सर पीठ पर एक धोंक जमा देती, ‘नखीत्री’! ससुराल जाकर हमारा नाम ऐसे रोशन करेगी… चने की दाल और तुअर की दाल में फर्क नहीं पता!! तुरई और गिलकी कितनी तो अलग दिखती है… जिसमें कांटे वाले छिलके होते हैं वो तुरई होती… ऐसे माँ कितना भी मार ले, ससुराल के नाम पर […]

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आत्म मंथन : मैं रोज़ नई हूँ…

कभी समय के एक टुकड़े पर लिखी थी अनुभव की इबारत और लगा था कि बस यही अंतिम सत्य है. लेकिन मैंने अपनी ही सत्यता को बहुत कम आँका फिर यह तो ब्रह्माण्डीय सत्य का प्रकटीकरण था कि मैं अपने ही लिखे को मिटा देने पर आनंदित हुई और ब्रह्माण्ड मुझे आनंदित देखकर नाच उठा… […]

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एक विवाह ऐसा भी

विवाह को न जाने क्यूं हमारे यहाँ सिर्फ रस्म से जोड़ लिया गया है, विवाह एक भाव है कि जब भी दो चेतनाएं मिल कर अपना वर्तुल पूरा करेंगी विवाह घटित होगा… ये विवाह दो चेतनाओं के बीच की बात है. वैसे ही हर वो भाव जो चेतनाओं के साथ जुड़कर अपना वर्तुल पूरा करे, […]

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नायिका -5 : ये नये मिजाज़ का शहर है, ज़रा फ़ासले से मिला करो

अभी तक आप मिले मुझसे यानी सूत्रधार से, और पढ़े नायक और नायिका के एकदूसरे को लिखे ख़त…. …..बिल्कुल …आपकी उलझन बिल्कुल सही कि एक तरफ तो मैं कहता हूँ कि नायिका और नायक की पहली मुलाकात बाकी है और दूसरी तरफ इन खतों से लगता है जैसे दोनों एक दूसरे को बरसों से ही […]

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थोड़ा सा रूमानी हो जाए : #NOTYOU नाना, ME TOO

कभी किसी ने आपको I love you कहा है?… कहा ही होगा… जवाब में आपने क्या कहा था? Me Too… बस सच इतना ही है… ये इसी सुन्दर प्राकृतिक नैसर्गिक प्रेम के स्वीकार Me Too का घृणित रूप है आधुनिक बालाओं का Me Too… अब एक बात और बताइये… जब भी आप सजती संवरती थी, […]

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मोहब्बत और अदा का संगम : प्यार ये जाने कैसा है

पहाड़ से नदी का उतरना, अटखेलियों के दस्तावेज पर स्पर्श की मोहर और मोहब्बत से अदा का संगम बस यही भाव उपजते हैं, जब भी मैं इस गीत में जैकी की बाहों से उर्मिला का फिसलना, और फिर उलझकर शर्माना देखती हूँ…. रंगीला… जवानी की दहलीज़ पर कदम रखते हुए जिसने भी यह फिल्म देखी […]

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मैं और मेरी किताबें अक्सर ये बातें करते हैं : अघोरी बाबा की गीता

जीवन को अपनी पूरी उन्मुक्तता से वही इंसान जी सकता है, जो उसके रहस्यों को जानता हो या उन रहस्यों की खोज में अग्रसर हो. यूं तो ये रहस्य हमारे चारों ओर खुले पड़े हैं, लेकिन इनको समझने के लिए, शुरुआती तौर पर हम हमारे ही द्वारा इजाद की गई वस्तुओं के उपयोग में सुविधा […]

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आज की नायिका : जानती नहीं थी माहवारी, बेचती थी सेनेटरी नैपकिन

घर में सबसे बड़ी बेटी लेकिन उम्र केवल 13 साल, पिता की बीमारी से घर की ज़िम्मेदारी उसके नाज़ुक से कन्धों पर आ गयी. काम क्या करना है जानती नहीं थी. एक परिचित ने कहा सेल्सगर्ल बन जाओ, मैं दिलवाता हूँ काम, तो वो सेल्सगर्ल बन गयी. उसके हाथों में पकड़ा दिए गए सेनेटरी नैपकिन […]

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जीवन-रेखा : पहुंचेली

रेखा, विरह का सबसे सुन्दर अधूरा गीत कहते हैं मिलन का सबसे सुन्दर और भीना गीत वही लिख सकता है जिसने विरह की सबसे तपती भूमि पर नंगे पैर चलने का अनुभव प्राप्त किया हो. लेकिन कुछ गीत ऐसे भी होते हैं, जो विरह से मिलन तक नहीं पहुँच पाते, पूरे नहीं हो पाते. रेखा […]

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रेखा जहां पर ख़त्म होती है, वहां से शुरू होते हैं अमिताभ

रेखा जन्मोत्सव की सारी सीरिज़ को जब विराम देने का दिन आया तो ये ख़याल आया, 10 अक्टूबर की रात जब रेखा अपना जन्मदिन मना चुकी होगी, तब नए सूर्योदय के साथ 11 अक्टूबर को अमिताभ अपने जन्मदिन की मुबारकें ले रहे होंगे. उनके वास्तविक जीवन में भी उनका भाग्योदय तभी हुआ जब उनकी मन […]

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