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Tag: Ma Jivan Shaifaly

Summer Hacks

बचपन में लौटाएगा आपको यह बर्फ का लड्डू

हम जब छोटे थे तो गर्मियों में बर्फ का लड्डू यानी बर्फ का गोला खरीदकर खूब खाते थे. खूब सारे रंगों वाले अलग अलग स्वाद वाले शरबत को एक ही लड्डू में डलवाकर खूब खाया है. गुलाब का शरबत डलवाने के लिए हम लड्डू को ग्लास में लेते थे और घर आकर उसमें दूध मिलाकर […]

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हाथ से बने सूती सैनेटरी पैड्स : लघु उद्योग का नया सफ़र आप सब के संग

मेरे लिए इससे अधिक प्रसन्नता का विषय नहीं हो सकता कि मेकिंग इंडिया साप्ताहिकी के ‘स्वरोज़गार अंक’ ने कुछ महिलाओं को स्वरोज़गार के लिए प्रेरित किया है. और वे मेरे साथ मिलकर एक ऐसा लघु उद्योग प्रारम्भ करना चाहती हैं, जिसमें शुरुआत में पैसा कम लगे, और एक बार उद्योग चल निकलने पर ही पैसा […]

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Start Up Stand Up : सोशल मीडिया पर स्वरोजगार से स्वावलंबी बनी स्त्रियाँ

मेकिंग इंडिया साप्ताहिकी मेरे लिए एक प्रयोगशाला है, जिसके माध्यम से मैं अपने अन्दर छुपी रचनात्मकता को हर बार नए रूप में प्रकट करती हूँ. कभी कुछ अच्छा बन जाता है, कभी बिगड़ भी जाता है, लेकिन मेरे लिए यह बिगड़ा हुआ रूप एक सबक होता है अगली बार और अधिक बेहतर करने के लिए. […]

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श्रृंगार सामग्री

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नवरात्रि : 9 दिन उपवास में ये 9 बातें बढ़ाएंगी आपकी ऊर्जा

दिनांक 6 अप्रेल 2019 से चैत्र नवरात्रि प्रारम्भ हो रही हैं, जो लोग नौ दिन का उपवास रखते हैं उनके लिए मैं अपने सीमित ज्ञान से मिले कुछ अनुभवों के बारे में विस्तार से बताना चाहूंगी ताकि आपके उपवास से आप अपनी शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक ऊर्जा को अधिक से अधिक बनाए रखने में सक्षम […]

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नायिका – 23 : तीन शब्दों का जादू

उन तीन लफ़्ज़ों को लेकर घर लौटी… सिर दर्द का बहाना बनाकर औंधे मुंह लेटी रही… 2 घंटे निकल गये… शायद यकीन न आये तुमको लेकिन अपनी 33 साल की उम्र में हज़ारों बार ये शब्द कहे होंगे और सुने होंगे लेकिन ऐसा पहली बार हुअ कि मेरे कहने से पहले किसी ने पहली बार […]

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अर्जुन – 3 : ख्यालों के पुलाव नहीं होते पात्र

और ये हर बार तुम अज्ञेय सी क्लिष्ट भाषा में बात क्यों करने लगते हो. क्यों उपन्यास की गुणवत्ता में भाषा का कोई सहयोग नहीं होता? तुम्हारा मतलब है प्रेमचंद और गुरुदत्त अच्छे उपन्यासकार नहीं थे? मैंने ये तो नहीं कहा… भाषा ऐसी हो जो सबको समझ आए… प्रेमचंद पढ़ने वालों को भी और अज्ञेय […]

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अपने जीवन का तो एक ही फंडा है जानम, हंसिबा खेलिबा धरिबा ध्यानं

जब संयम साधो तो साधते चले जाओ जब संसार साधो साधते चले जाओ यह मत देखो क्या साधा जा रहा है, देखो यह कि क्या तुम्हें साधना आ रहा है… कहते हैं न एक साधे सब सधे… इसलिए आप जब संन्यास को साध लेते हैं तो आपकी सारी बातें एक साथ सधती चली जाती है. […]

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अर्जुन – 2 : गुनाहों का देवता है हर पात्र

यार एक बात बताओ तुम मुझे परफेक्ट बनाना चाहते हो या कम्पलीट? अर्जुन भौचक्का-सा उसकी तरफ देखता रह गया. उसने कभी उससे इस तरह से बात नहीं की थी. अर्जुन ने एक पल को खुद को संभालते हुए सोचा जब पात्र बड़ा होने लगे तो उससे दोस्ती कर लेना ही उचित है. उसने ज्ञानी मुद्रा […]

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केले के पत्तों से पाएं स्वस्थ शरीर, घने बाल, सुन्दर त्वचा और बीमारियों से मुक्ति

जब से वैद्य राजेश कपूर का आशीर्वाद मिला है, मैं अधिक से अधिक प्रकृति के समीप रहने लगी हूँ, और उसके संकेतों के प्रति ग्रहणशीलता बढ़ी हुई सी अनुभव हो रही है। अब जब घर के बाहर निकलती हूँ तो नज़रें किसी न किसी उपयोगी वृक्ष और गायों के झुण्ड पर लगी रहती है। ऐसे […]

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