Menu

Tag: Ma Jivan Shaifaly

Carolyn Hartz : चार पोतों की 70 साल की इस दादी जैसे आप भी हो सकते हैं युवा

मेरी त्वचा से मेरी उम्र का पता ही नहीं चलता… टिंग टोंग संतूर संतूर…. साठ साल के बूढ़े या साठ साल के जवान…. इस तरह के बहुत से विज्ञापन हम देखते आये हैं, विज्ञापन हमारे लिए हमेशा से कार्यक्रम के बीच में आने वाली बाधा रहे हैं… कभी कोई विज्ञापन पसंद भी आ जाता है […]

Read More

ओमुआमुआ : वह अतीत का अग्रदूत!

अंतरिक्ष मेरे लिए हमेशा से बहुत रहस्मयी रहा है, बचपन से ही रात के आसमान को तकने की आदत रही है…. बहुत सारे ऐसे अद्भुत दृश्य बिना टेलिस्कोप के देखे हैं, लगता था जैसे कोई सिनेमा के परदे पर उभरता दृश्य देख रही हूँ… कभी लिखा था यह – अवकाश का आकाश “पहला नियम …. […]

Read More

जानेमन तुम कमाल करती हो….

बहुत विस्तृत है भाव जगत, जिन्हें शब्दों का बंधन रास नहीं आता, फिर भी अज्ञात को ज्ञात शब्दों में प्रस्तुत करने की मनुष्य की सीमा को तोड़ने की ज़िद लिए तुम हर बार शब्दों के समंदर में कूद जाती हो… जानेमन तुम कमाल करती हो…. कभी ठहर जाया करो उन दो दुनिया के बीच में […]

Read More

गुड्डी मिली? : किरदार के भीतर और बाहर की दुनिया

जीवन में घटने वाली हर महत्वपूर्ण घटना एक फिल्म के समान होती है जिसकी स्क्रिप्ट नियति द्वारा पहले से लिख दी गयी है, साथ में आपका किरदार भी. अब ये आप पर निर्भर करता है कि आप अपना वास्तविक चरित्र उसमें लाए बिना उस किरदार को अपने अभिनय से कितना सशक्त बनाते हो. बावजूद इसके […]

Read More

पग घुँघरू बाँध मीरा नाची रे…

रिश्ते खट्टे हो जाएं तो उसमें से थोड़ा जामन निकालकर बहती भावनाओं का दही जमा लेना, फिर उसमें थोड़ा सा मीठा प्रेम डालकर मीठी लस्सी बना कर या मिष्टी दोही बनाकर खुद भी खाना, औरों को भी खिलाना… मेकिंग इंडिया साप्ताहिकी अप्रेल माह – पहला अंक और हाँ, कहते हैं न कोई कुछ नया काम […]

Read More

Thyroid : माया को गलमाया मत बनाइये

जैसे हर गोपी को कृष्ण अपने साथ रास करते दिखाई देते थे वैसे ही Thyroid का हव्वा इस तरह से फैलाया गया है कि हर स्त्री को अपने छोटे मोटे हार्मोनल बदलाव भी थाइरोइड होने की आशंका से घेर लेता है. एक बार आपने उस बीमारी को याद किया कि उसका होना तय है क्योंकि […]

Read More

नेप्ट्यून से परे एक ‘महापृथ्वी’ : जो नवाँ होगा और नवा भी

पुराने बच्चों को स्कूल में नौ ग्रह पढ़ाये गये; आज-कल के बच्चे आठ पढ़ते हैं. जो थोड़े अधिक कुतूहली हैं, वे इस आठ की संख्या के बाद एक प्रश्नचिह्न लगा छोड़ देते हैं. नेप्ट्यून से सुदूर शायद कोई और है, जिस पर से कभी पर्दा उठेगा और सत्य प्रकट होगा. वह जो नवाँ होगा और […]

Read More

प्रेम की भिक्षा मांगे भिखारन : कान्हा देख तेरी गोपियाँ तड़प रहीं…

कहते हैं विधवाएं हैं, परित्यक्ता हैं, सताई हुईं, बेघर, बच्चों ने घर से निकाल दिया या खुद ही बच्चों के दुर्व्यवहार से घर छोड़ आईं, कुछ जीवन की तलाश में, कुछ मृत्यु की तलाश में तो कुछ मोक्ष की तलाश में… कारण कई हैं, सामाजिक और दुनियावी स्तर पर प्रकट कारणों का होना आवश्यक भी […]

Read More

अध्यात्म के रंगमंच पर जीवन का किरदार…

मुझसे किसी को किसी बात पर ईर्ष्या नहीं हो सकती, लेकिन बिस्तर पर करवट बदलते रहने वालों को मेरी इस आदत पर अवश्य ईर्ष्या हो सकती है कि ध्यान बाबा कहते हैं आप इतनी बड़ी कुम्भकरण हैं कि आप पास में बैठी हैं और ज़रा सी कोहनी मारकर आपको लुढ़का दो तो वहीं खर्राटे मारने […]

Read More

तू खाली-सी जगह हो गया, जिसमें मैं भर आई हूँ

हर एक के जीवन में ऐसा क्षण अवश्य आता है जब वह रिक्तता के चरम बिंदु पर पहुँच जाता है. जीवन में यह रिक्तता दो तरफ से काम करती है, बाहर की तरफ से व्यक्ति असुरक्षित और एकाकी अनुभव करता है तो अन्दर से कोई उसे इस अवस्था के आनंद को जी लेने के लिए […]

Read More
error: Content is protected !!