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Tag: Love

Life Love Liberation : ध्यान ही जीवन, जीवन ही प्रेम, प्रेम ही परमात्मा

मैं अपनी बात शुरू करूं इसके पहले जानिये बब्बा क्या कह रहे हैं, कोई आध्यात्मिक गुरु, कोई ज्ञानी बात कहता है तो हम उसे जल्दी ग्रहण कर पाते हैं. लाओत्से कहता है, चलो, लेकिन ध्यान नाभि का रखो. बैठो, ध्यान नाभि का रखो. उठो, ध्यान नाभि का रखो. कुछ भी करो, लेकिन तुम्हारी चेतना नाभि […]

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प्रेम

मुंबई डायरी पलकों के नीचे जब पसरने लगती है उदासी तो जाते-जाते छोड़ जाती है सुरमे-सा काला रंग, हालांकि मैं नहीं सहेजना चाहती उदासी के बाद आँखों के नीचे बच गए इन गहरे काले निशानों को, पर इन्हीं उदासियों के साथ ही तो लिपटकर तुम्हारी यादें उतरती हैं मेरे हिस्से में…. मैं सोचती हूँ कि […]

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पण्डित राज और लवंगी : गंगा की गवाही कि प्रेम न हारा और धर्म भी जीता

सत्रहवीं शताब्दी का पूर्वार्ध था. दूर दक्षिण में गोदावरी तट के एक छोटे राज्य की राज्यसभा में एक विद्वान ब्राह्मण सम्मान पाता था, नाम था जगन्नाथ शास्त्री. साहित्य के प्रकांड विद्वान, दर्शन के अद्भुत ज्ञाता. इस छोटे से राज्य के महाराज चन्द्रदेव के लिए जगन्नाथ शास्त्री सबसे बड़े गर्व थे. कारण यह, कि जगन्नाथ शास्त्री […]

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कविताएं कुछ प्रेम पगी

उसके लिए भी, जिसका चेहरा स्मृति में धुंधला हो गया है, पर उसका राशिफल आज भी पढ़ता हूँ, और उसके लिए भी जो आभासी संसार मे रहती है, पर लगता है कि हमारी रेखाएं कहीं ना कहीं तो जुड़ती है. तुम वही हो ना, जो बदल सकती है, मौन को मुखर में, और छेड़ सकती […]

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प्रेम : कपूर टिकिया सा, जो ख़ुद अपनी गन्ध बिसरा के स्वयं बिसर जाए

प्रेम कोई कथ्य नहीं कोई विचार नहीं जिसे साझा किया जाए शब्दों में कभी कभी लगता है कि प्रेम अहसास भी नहीं. क्योंकि कैसे ही इसे महसूस करना शुरू करो यह खत्म होना शुरू हो जाता है. इसलिये इसे महसूस भी मत करना चाहिए. बस जी लेना चाहिए. प्रेम कोई फूल भी नहीं कि सदा […]

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ओ हंसिनी… कहाँ उड़ चली…

लड़की अठारह बरस की हुई थी पिछले महीने. लड़की अपनी दादी को बेहद प्यार करती थी और अपने स्कूल की सारी बातें उनको आकर बताया करती थी. लड़की की दादी बहुत प्यारी दादी थीं. सांवले चेहरे पर अनगिन झुर्रियों के बीच जब दादी आँखें मींच खिलखिलातीं तो लगता मानो देर रात बादलों से ढके समंदर […]

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सदमा : अंग्रेज़ी वर्णमाला का नौवां वर्ण ‘I’ यानी ‘मैं’ का खो जाना

प्रेम का नफरत में बदल जाना, प्रेम में धोखा खाना, यहाँ तक कि प्रेम का मर जाना भी बर्दाश्त हो जाता है… नीलकंठ की तरह कंठ में इस पीड़ा को धारण किये भी कभी कभी इंसान पूरा जीवन गुज़ार लेता है. कुम्भ के विशाल मेले में पिता की ऊंगली छूट जाने से खो गए किसी […]

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मैं दीपक… तुम ज्योति…

दीपक अंधेरे में बैठता है… ज्योति ढिंढोरा पीट आती है दूर तलक…… कि वहाँ कोने में, अंधेरे में दीपक रखा है. जैसे चाँद सुन्दर इसलिये है कि चाँदनी खबर लाती है. दीपक को व्याकरण ने ‘पुल्लिंग’ रखा है, ज्योति को ‘स्त्रीलिंग’. वैसे ही चाँद भी ‘पुल्लिंग’ की कतार में खड़ा होता है पर चाँदनी ….. […]

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