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Tag: Film Review

सदमा – 2 : मेरा कोई सपना होता…!

दुखांत प्रेम कहानियों पर बनने वाली फिल्मों में सदमा को मैं श्रेष्ठ मानता हूं। ऐसी फिल्मों में अकसर नायक-नायिका की दुखद मृत्यु हो जाती है। वे मिलते हुए बिछड़ जाते हैं। लेकिन सदमा का विछोह अपार है। वहां देह की मृत्यु नहीं है, आत्मा के लोक का लुंठन है। एक भयावह अंधकार है। स्याह अंधेरा.. […]

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127 Hours : जीवन को जीत लाने के लिए ज़रूरी है अब इस हाथ का धड़ से अलग होना

127 Hours… एक अंग्रेज़ी फिल्म है कुछ तीन चार साल पहले देखी थी. यूं तो अंग्रेज़ी फ़िल्में मैंने बहुत कम देखी हैं, लेकिन जितनी भी देखी हैं वो या तो जीवन और मृत्यु के बीच जीवन को बचा लाने की जिजीविषा पर आधारित रही या फिर मुझे वो इसलिए पसंद आई क्योंकि अंग्रेज़ी फ़िल्में अधिकतर […]

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बनारस : एक रहस्यमय आध्यात्मिक प्रेम कहानी

कुछ दिनों पहले फिल्म बनारस का अंत देखा, कुछ आधे एक घंटे की ही फिल्म देखी, कहानी ऐसी कि हर दृश्य पर आंसू निकलते रहे, दो कारणों से। पहला, बनारस की पृष्ठभूमि पर बनी एक रहस्यमयी प्रेम कथा को फिल्म चालबाज़ के निर्देशक पंकज पराशर ने बिलकुल ही चालबाज़ स्टाइल में बनाकर फुर्सत पा ली […]

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ऑक्टोबर : जीवन-अजीवन के महीन फ़र्क़ को सिखाती फिल्म

धुँध से उठती एक महीन धुन, शाख़ पर खिलता फूल, टूट कर बिखरता चाँद हो या फिर पत्तों की सरसराहट; दरअसल भाषायी संस्कारों में ये सभी प्रकृति की अद्भुत लीला के प्रतीक भर हैं. इस लीला से साक्षात्कार आपको अपनी ओर सिर्फ़ खींच ही नहीं लेता है वरन् बिठा लेता है अपने पास और जादू […]

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