Menu

Tag: Devanshu Jha

ओ हंसनी… कहाँ उड़ चली… – 2

सरधो दीदी नाम तो उनका शारदा था पर लोग उन्हें सरधो पुकारते थे। उसमें प्रेम का अपभ्रंश कितना हुआ था, कहना मुश्किल है। मेरे लिए वे सरधो दीदी थीं। जबसे मैंने सरधो दीदी की संज्ञा को समझना शुरू किया तब से उन्हें एकनिष्ठ देखा। वही सफेद धोती, वही धवल हास और शंभु भैया के लिए […]

Read More

कृष्ण : विरह का अनंत अनुराग

बरसों पहले देखा एक तैलचित्र अब तक मेरी स्मृति में सो रहा है । भगवान कृष्ण का वह चित्र महाभारत युद्ध के बाद का था, संभवत: राजा रवि वर्मा का बनाया हुआ । बात चूंकि बहुत पुरानी हो चुकी है इसलिए पक्के तौर पर नहीं कह सकता । चित्र अपनी गरिमा और गुणधर्म में रवि […]

Read More

सदमा – 2 : मेरा कोई सपना होता…!

दुखांत प्रेम कहानियों पर बनने वाली फिल्मों में सदमा को मैं श्रेष्ठ मानता हूं। ऐसी फिल्मों में अकसर नायक-नायिका की दुखद मृत्यु हो जाती है। वे मिलते हुए बिछड़ जाते हैं। लेकिन सदमा का विछोह अपार है। वहां देह की मृत्यु नहीं है, आत्मा के लोक का लुंठन है। एक भयावह अंधकार है। स्याह अंधेरा.. […]

Read More
error: Content is protected !!