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Tag: Bollywood

नदिया के पार वाले वास्तव में उस पार ही छूट गए

स्कूल के मित्र, इंजीनियरिंग के मित्र, MBA के मित्र, इंदौर के मित्र, निरमा के मित्र, अहमदाबाद के मित्र, बंगलोर के मित्र और अब फेसबुक के मित्र. इनके ऊपर रिश्तेदारों की पूरी फौज. परबाबा और परदादी वाली पीढ़ी के अलावा हर प्रकार का रिश्ता देखने समझने को परिवार में ही मिल गया. अभी कुछ दिन पहले […]

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मणिकर्णिका

आज कंगना राणावत की बहु चर्चित फिल्म मणिकर्णिका देखी। यद्यपि आजकल ज्यादा फ़िल्में नहीं देखती हूँ, किन्तु अव्वल तो इस फिल्म के नाम ने ध्यान आकर्षित किया था, दूजा, हाल में इसका ट्रेलर देखा बस उसी वक़्त मन बन चुका था कि देखूंगी अवश्य ही। राष्ट्रगान के साथ ही जब फिल्म शुरू होती है, मन […]

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तरानों से झांकते प्रेमप्रश्न

तरानों का संसार प्रेमियों का प्रकाश-लोक है. एक ऐसा लोक, जहाँ उनके सभी प्रश्नों के काव्यात्मक उत्तर रहते हैं. मसलन, प्रेमिका को पूछना हो कि जब हमारा साहचर्य नहीं होता तो आप क्या करते हैं? तो बरबस ही, स्मरण के किसी कोने में एक तराना चहक जाता है : “क्या करते थे साजना, तुम हमसे […]

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VIDEO : पिक्चर अभी बाकी है दोस्त

तो पिछले वीडियो में मैंने वादा किया था कि जीवन के एक स्वर्णिम नियम के बारे में बताऊंगी जो मैंने जीवन के व्यक्तिगत अनुभवों से जाना है… बाकी आपने बड़े बड़े ग्रंथों में पढ़ा होगा कि जीवन एक माया है… और मैं आप सबकी सुविधा के लिए इसे एक फिल्म कह देती हूँ. तो जीवन […]

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ओ साथी रे दिन डूबे ना : प्रणय का मनुहार गीत

जब भी तुझे आँख भर देखता हूँ एक बात भेजे में कौंधती है… क्या? ये के या तो तू बहुत बड़ी लुल्ल है या बहुत बड़ी चुड़ैल…. उत्तर प्रदेश की पृष्ठभूमि पर राजस्थान की महक वाले मिट्टी के सौंधे से घर के आँगन में दौड़ती दो देहों का यह गीत मुझे तब से बहुत आकर्षित […]

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मनमोहना… कान्हा सुनो ना…

प्रेम, प्रतीक्षा, प्रारब्ध और पीड़ा यात्रा है… और मिलन एक चमत्कार जो सिर्फ चयनित लोगों के लिए सुरक्षित स्थान है… एक ऐसा स्थान जो इस धरती पर नहीं, ब्रह्माण्ड में किसी ऐसे स्थान पर होता है जहाँ तक पहुँचने की असुरक्षित और टूट जाने तक की यात्रा में जीते हुए भी मनुष्य के अवचेतन में […]

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सदमा – 2 : मेरा कोई सपना होता…!

दुखांत प्रेम कहानियों पर बनने वाली फिल्मों में सदमा को मैं श्रेष्ठ मानता हूं। ऐसी फिल्मों में अकसर नायक-नायिका की दुखद मृत्यु हो जाती है। वे मिलते हुए बिछड़ जाते हैं। लेकिन सदमा का विछोह अपार है। वहां देह की मृत्यु नहीं है, आत्मा के लोक का लुंठन है। एक भयावह अंधकार है। स्याह अंधेरा.. […]

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मोहब्बत और अदा का संगम : प्यार ये जाने कैसा है

पहाड़ से नदी का उतरना, अटखेलियों के दस्तावेज पर स्पर्श की मोहर और मोहब्बत से अदा का संगम बस यही भाव उपजते हैं, जब भी मैं इस गीत में जैकी की बाहों से उर्मिला का फिसलना, और फिर उलझकर शर्माना देखती हूँ…. रंगीला… जवानी की दहलीज़ पर कदम रखते हुए जिसने भी यह फिल्म देखी […]

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मितवा : राग भूपाली का चुपके से आना राग पहाड़ी से मिलने

संगीत के रागों में मुझे संपूर्ण प्रकृति परिलक्षित होती दिखाई देती है. जैसे कोई थिरकती नदी हवाओं से संगत करे, जैसे कोई जलप्रपात कहरवा ताल में निबद्ध होकर घाटी में उतर जाए, जैसे गोपियों की लजाई पायल बज उठे. राग उतने ही प्राकृतिक हैं, जितनी कोई जंगली बूटी होती है. रागों का लेप अवसाद दूर […]

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अनोखी रात : क्या होगा कौन से पल में, कोई जाने ना

मैं तुम्हारे लिखे एक-एक अक्षर पर पाँव धर पार कर लेती हूँ हर वो कविता जो तुम विरह की रात में लिखकर बहा देते हो बनारस के घाट पर… ताकि मुझ तक पहुँच न सके… और उन्हीं अक्षरों को मैं यहाँ नर्मदा में पाँव डाले प्रतीक्षा की बेड़ी बना लेती हूँ… यही अंतिम बंधन है […]

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