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Tag: Bollywood

अनोखी रात : क्या होगा कौन से पल में, कोई जाने ना

मैं तुम्हारे लिखे एक-एक अक्षर पर पाँव धर पार कर लेती हूँ हर वो कविता जो तुम विरह की रात में लिखकर बहा देते हो बनारस के घाट पर… ताकि मुझ तक पहुँच न सके… और उन्हीं अक्षरों को मैं यहाँ नर्मदा में पाँव डाले प्रतीक्षा की बेड़ी बना लेती हूँ… यही अंतिम बंधन है […]

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जीवन का पूर्ण सत्य : आधा है चंद्रमा रात आधी

आसमान का नीला रंग चुराकर, प्रेम की नदी में घोल आने से नदी आसमानी हो जाती है. कामनाएं दुनियावी पैरहन उतारकर नीले रंग को देह पर मलती हैं, और जलपरियों की भांति क्रीड़ा करती हुई चाँद का गोला एक दूसरे पर उछालती हैं… गीले पानी में सूखे भाव भी, तेज़ी से भागती रात के साथ […]

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मंटो…

जब गुलाम थे तो आज़ादी का ख़्वाब देखते थे और अब आजाद हैं तो कौन सा ख्वाब देखें?? फिल्म ‘मंटो’ का ट्रेलर रिलीज़ हुआ है कुछ दिन पहले, जिसमें मंटो के किरदार में ‘नवाजुद्दीन सिद्दीक़ी’ हैं, फिल्म का डायरेक्शन ‘नंदिता दास’ ने किया है। ट्रेलर में ये 2 लाइन सुनकर ही समझ आता है कि […]

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सुरबहार : ओ सजना, बरखा बहार आई

ओ सजना, बरखा बहार आई, यह गीत साधना की सादगी के दिनों का सौंदर्य गीत है, एक नाज़ुक सी लड़की बारिश की रिमझिम में पिया मिलन की आस में गीत गूंथ रही है… यह उस समय का गीत है जब उसे अपने चौड़े माथे की सुंदरता किसी पैमाने पर कम न लगती थी, और साधना […]

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सूरज का प्रेम

प्रेम पर न जाने कितनी ही फ़िल्में बनी हैं लेकिन सूरज ने प्रेम को एक स्थायी चरित्र बना दिया, वो हर फिल्म में प्रेम ही रहा और उसने अपने इस चरित्र को बखूबी निभाया भी। जी हाँ हम बात कर रहे हैं सलमान की, जिनका ज़िक्र बाद में आता है उसके पहले उनकी असफल प्रेम […]

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धड़क-धड़क, जिया धड़क-धड़क जाए…

बादल और बारिश की आंख मिचौली में बनारस की सड़कें गीली हो चुकी हैं। भुट्टे के ठेले पर उठ चुके धुंए में और चाय के दड़बे में बैठ चुकी अंतहीन बहस में अचानक सावन उतर आया है। शाम सात बजने को है। काशी के अति व्यस्त गोदौलिया चौराहे से लक्सा रोड की तरफ बढ़ने पर […]

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बनारस : एक रहस्यमय आध्यात्मिक प्रेम कहानी

कुछ दिनों पहले फिल्म बनारस का अंत देखा, कुछ आधे एक घंटे की ही फिल्म देखी, कहानी ऐसी कि हर दृश्य पर आंसू निकलते रहे, दो कारणों से। पहला, बनारस की पृष्ठभूमि पर बनी एक रहस्यमयी प्रेम कथा को फिल्म चालबाज़ के निर्देशक पंकज पराशर ने बिलकुल ही चालबाज़ स्टाइल में बनाकर फुर्सत पा ली […]

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तुम आयीं जैसे छीमियों में धीरे-धीरे आता है रस!

“तुम आयीं जैसे छीमियों में धीरे-धीरे आता है रस!” ये श्री केदारनाथ सिंह हैं, और बड़े दिनों से इस कविता को गुनगुनाते हुए मेरे हृदय में बह रहे हैं। वही केदार, जिनके लिए “जाना” हिंदी की ख़ौफ़नाक क्रिया थी! वही केदारनाथ, जो स्वयं को नदियों में चम्बल और सर्दियों में बुढ़िया का कम्बल कहते थे! […]

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बंदिनी : मन की किताब से तुम मेरा नाम ही मिटा देना…

चारुचंद्र चक्रवर्ती की बांग्ला कहानी ‘तामसी’, पर आधारित बिमल रॉय की 1963 निर्मित फ़िल्म “बन्दिनी” हर बार मन में एक गहरा असर डालती है. हत्या के अपराध में सज़ा काट रही कल्याणी (नूतन) का विप्लवी, क्राँतिकारी बिकाश घोष(अशोक कुमार) के साथ प्रेम, डाह, बदले और समर्पण की अद्भुत कहानी है बन्दिनी. प्रेम में छल की […]

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गुड्डी मिली? : किरदार के भीतर और बाहर की दुनिया

जीवन में घटने वाली हर महत्वपूर्ण घटना एक फिल्म के समान होती है जिसकी स्क्रिप्ट नियति द्वारा पहले से लिख दी गयी है, साथ में आपका किरदार भी. अब ये आप पर निर्भर करता है कि आप अपना वास्तविक चरित्र उसमें लाए बिना उस किरदार को अपने अभिनय से कितना सशक्त बनाते हो. बावजूद इसके […]

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