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Tag: Bollywood

सदमा – 2 : मेरा कोई सपना होता…!

दुखांत प्रेम कहानियों पर बनने वाली फिल्मों में सदमा को मैं श्रेष्ठ मानता हूं। ऐसी फिल्मों में अकसर नायक-नायिका की दुखद मृत्यु हो जाती है। वे मिलते हुए बिछड़ जाते हैं। लेकिन सदमा का विछोह अपार है। वहां देह की मृत्यु नहीं है, आत्मा के लोक का लुंठन है। एक भयावह अंधकार है। स्याह अंधेरा.. […]

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मोहब्बत और अदा का संगम : प्यार ये जाने कैसा है

पहाड़ से नदी का उतरना, अटखेलियों के दस्तावेज पर स्पर्श की मोहर और मोहब्बत से अदा का संगम बस यही भाव उपजते हैं, जब भी मैं इस गीत में जैकी की बाहों से उर्मिला का फिसलना, और फिर उलझकर शर्माना देखती हूँ…. रंगीला… जवानी की दहलीज़ पर कदम रखते हुए जिसने भी यह फिल्म देखी […]

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मितवा : राग भूपाली का चुपके से आना राग पहाड़ी से मिलने

संगीत के रागों में मुझे संपूर्ण प्रकृति परिलक्षित होती दिखाई देती है. जैसे कोई थिरकती नदी हवाओं से संगत करे, जैसे कोई जलप्रपात कहरवा ताल में निबद्ध होकर घाटी में उतर जाए, जैसे गोपियों की लजाई पायल बज उठे. राग उतने ही प्राकृतिक हैं, जितनी कोई जंगली बूटी होती है. रागों का लेप अवसाद दूर […]

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अनोखी रात : क्या होगा कौन से पल में, कोई जाने ना

मैं तुम्हारे लिखे एक-एक अक्षर पर पाँव धर पार कर लेती हूँ हर वो कविता जो तुम विरह की रात में लिखकर बहा देते हो बनारस के घाट पर… ताकि मुझ तक पहुँच न सके… और उन्हीं अक्षरों को मैं यहाँ नर्मदा में पाँव डाले प्रतीक्षा की बेड़ी बना लेती हूँ… यही अंतिम बंधन है […]

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जीवन का पूर्ण सत्य : आधा है चंद्रमा रात आधी

आसमान का नीला रंग चुराकर, प्रेम की नदी में घोल आने से नदी आसमानी हो जाती है. कामनाएं दुनियावी पैरहन उतारकर नीले रंग को देह पर मलती हैं, और जलपरियों की भांति क्रीड़ा करती हुई चाँद का गोला एक दूसरे पर उछालती हैं… गीले पानी में सूखे भाव भी, तेज़ी से भागती रात के साथ […]

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मंटो…

जब गुलाम थे तो आज़ादी का ख़्वाब देखते थे और अब आजाद हैं तो कौन सा ख्वाब देखें?? फिल्म ‘मंटो’ का ट्रेलर रिलीज़ हुआ है कुछ दिन पहले, जिसमें मंटो के किरदार में ‘नवाजुद्दीन सिद्दीक़ी’ हैं, फिल्म का डायरेक्शन ‘नंदिता दास’ ने किया है। ट्रेलर में ये 2 लाइन सुनकर ही समझ आता है कि […]

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सुरबहार : ओ सजना, बरखा बहार आई

ओ सजना, बरखा बहार आई, यह गीत साधना की सादगी के दिनों का सौंदर्य गीत है, एक नाज़ुक सी लड़की बारिश की रिमझिम में पिया मिलन की आस में गीत गूंथ रही है… यह उस समय का गीत है जब उसे अपने चौड़े माथे की सुंदरता किसी पैमाने पर कम न लगती थी, और साधना […]

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सूरज का प्रेम

प्रेम पर न जाने कितनी ही फ़िल्में बनी हैं लेकिन सूरज ने प्रेम को एक स्थायी चरित्र बना दिया, वो हर फिल्म में प्रेम ही रहा और उसने अपने इस चरित्र को बखूबी निभाया भी। जी हाँ हम बात कर रहे हैं सलमान की, जिनका ज़िक्र बाद में आता है उसके पहले उनकी असफल प्रेम […]

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धड़क-धड़क, जिया धड़क-धड़क जाए…

बादल और बारिश की आंख मिचौली में बनारस की सड़कें गीली हो चुकी हैं। भुट्टे के ठेले पर उठ चुके धुंए में और चाय के दड़बे में बैठ चुकी अंतहीन बहस में अचानक सावन उतर आया है। शाम सात बजने को है। काशी के अति व्यस्त गोदौलिया चौराहे से लक्सा रोड की तरफ बढ़ने पर […]

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बनारस : एक रहस्यमय आध्यात्मिक प्रेम कहानी

कुछ दिनों पहले फिल्म बनारस का अंत देखा, कुछ आधे एक घंटे की ही फिल्म देखी, कहानी ऐसी कि हर दृश्य पर आंसू निकलते रहे, दो कारणों से। पहला, बनारस की पृष्ठभूमि पर बनी एक रहस्यमयी प्रेम कथा को फिल्म चालबाज़ के निर्देशक पंकज पराशर ने बिलकुल ही चालबाज़ स्टाइल में बनाकर फुर्सत पा ली […]

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