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Tag: Body

शरीर साधन है : पुरुष, जिस पुर में परमात्मा बसा है

शरीर को दोष देने वाला बिलकुल निर्बुद्धि है. उपनिषद की इस धारणा को समझकर, आप इस सूत्र में प्रवेश करें. सरल विशुद्ध ज्ञानस्वरूप अजन्मा परमेश्वर का ग्यारह द्वारों वाला मनुष्य शरीर नगर है, पुर है. इसलिए हमने मनुष्य को पुरुष कहा है. पुरुष का अर्थ है जिसके भीतर, जिस पुर में परमात्मा बसा है, जिस […]

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शरीर ने तुम्हें नहीं, तुमने शरीर को पकड़ा है : ओशो

उपनिषद के ऋषियों के मन में मनुष्य के शरीर की कोई भी निंदा नहीं है. मनुष्य के शरीर के प्रति बहुत सदभाव है, बहुत श्रद्धा भाव है, क्योंकि मनुष्य का शरीर वस्तुत: मंदिर है. उस परमात्मा का निवास जिसके भीतर है, उसकी निंदा तो कैसे की जा सकती है! परमात्मा जिसके भीतर बसा है, उस […]

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देह के सितार से निकलता सूक्ष्म प्राणों का गीत

संगीत और साहित्य अध्यात्म की जुड़वा संताने हैं… यूं तो जीवन में और जीवन के परे हो रहा हर कृत्य और कुकृत्य इसी मुखिया के गाँव की सरहद का हिस्सा है. उसके गाँव की सीमा पर जो दीवारें हैं उन पर जीवन की उत्पत्ति की प्राचीन कहानियां चित्रित हैं. उसके दरबार में प्रसन्नता कालबेलिया नृत्य […]

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