शरीर साधन है : पुरुष, जिस पुर में परमात्मा बसा है

शरीर को दोष देने वाला बिलकुल निर्बुद्धि है. उपनिषद की इस धारणा को समझकर, आप इस सूत्र में प्रवेश करें.…

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देह के सितार से निकलता सूक्ष्म प्राणों का गीत

संगीत और साहित्य अध्यात्म की जुड़वा संताने हैं… यूं तो जीवन में और जीवन के परे हो रहा हर कृत्य…

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