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Tag: Bhaskar Suhane

उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो, न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए

आज आपको आँखों सुनी और कानों देखी बात बताने जा रहा हूँ। जी हाँ! आपने सही देखा। अगर सुनने का साहस हो और तपाक से प्रतिउत्तर न देने की आदत हो तभी आगे पढ़े। ये मार्मिक वृतांत एक बुजुर्ग शख़्स के बारे में है, उनका नाम ‘कृष्ण लाल शर्मा’ है। इंदौर के शीतल नगर में […]

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मंटो…

जब गुलाम थे तो आज़ादी का ख़्वाब देखते थे और अब आजाद हैं तो कौन सा ख्वाब देखें?? फिल्म ‘मंटो’ का ट्रेलर रिलीज़ हुआ है कुछ दिन पहले, जिसमें मंटो के किरदार में ‘नवाजुद्दीन सिद्दीक़ी’ हैं, फिल्म का डायरेक्शन ‘नंदिता दास’ ने किया है। ट्रेलर में ये 2 लाइन सुनकर ही समझ आता है कि […]

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फ़ादर्स डे : एक था बचपन, बचपन के एक बाबूजी थे

फादर्स डे के बहाने… अपने पापा के साथ मैं बहुत दोस्ताना नहीं हूँ. पिता-पुत्र के संबंधों की प्रचलित गरिमा हमारे बीच मौजूद है. पापा से मुझे कुछ कहना होता है तो माँ जरिया बनती है और यही स्थिति पापा की भी है. हालांकि, अब कई बार संवाद सेतु की आवश्यकता नहीं होती है लेकिन स्थिति […]

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एक मुलाक़ात : डॉ. बशीर बद्र साहब से

न जी भर के देखा, न कुछ बात की, बड़ी आरज़ू थी मुलाकात की! डॉ. बशीर बद्र साहब की लिखी गई और चन्दन दास जी की आवाज़ में इस गज़ल की ये दो पंक्तियाँ; बशीर बद्र साहब के सामने पहुँचने के बाद, मेरे हाल को बख़ूबी दर्शा रही हैं. बशीर बद्र! नाम ही काफी है, […]

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