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Tag: Atul Kumar Rai

धड़क-धड़क, जिया धड़क-धड़क जाए…

बादल और बारिश की आंख मिचौली में बनारस की सड़कें गीली हो चुकी हैं। भुट्टे के ठेले पर उठ चुके धुंए में और चाय के दड़बे में बैठ चुकी अंतहीन बहस में अचानक सावन उतर आया है। शाम सात बजने को है। काशी के अति व्यस्त गोदौलिया चौराहे से लक्सा रोड की तरफ बढ़ने पर […]

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