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जब तक श्रम नहीं करेंगे, पाप नहीं धुलेंगे, जब तक पाप नहीं धुलेंगे, फैट नहीं घुलेंगे

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आधुनिक जीवन शैली ने हमें और कुछ दिया हो या ना दिया हो, एक बहुत ही आरामदायक ज़िंदगी ज़रूर दी है. बस एक बटन दबाओ और काम शुरू और इससे बड़ी बात काम ख़त्म होने पर बटन बंद करने जितनी मेहनत भी नहीं करना है.

फिर चाहे रसोई में माइक्रोवेव अवन का बटन हो या वाशिंग मशीन का, लिविंग रूम में टीवी रिमोट का बटन हो या ऑफिस में कम्प्यूटर का.

लेकिन क्या आप जानते हैं इस आराम तलब ज़िंदगी ने आपसे बदले में क्या छीन लिया? आपसे छीन लिया है आपका श्रम, हाथ पैर हिलाने की जगह, और बदले में दिया है मानसिक तनाव और मोटापा.

क्या आप जानते हैं आपके मोटापे का एक कारण मानसिक तनाव भी है, जितना आप तनाव में होते हैं उतना अधिक आप खाते हैं, जितना अधिक आप खाते हैं आपके शरीर पर ही नहीं आत्मा में भी भारीपन आता है. जितना आप खुश और स्वस्थ रहेंगे शरीर उतना ही हल्का होगा और शरीर ऊर्जा के लिए भोजन पर निर्भर नहीं रहेगा… आप सिर्फ सूर्य की किरणों से भी पर्याप्त ऊर्जा लेकर दिन भर ऊर्जावान रह सकते हैं.

व्यक्तिगत अनुभव के बिना मैं सिर्फ सुनी सुनाई बातों से या इन्टरनेट पर बिखरे पड़े ज्ञान के जाल से कुछ नहीं उठाती. हाँ, यदि मेरे अनुभवों की पुष्टि करती हुई कोई सारगर्भित जानकारी मिल जाती है तो इस बारे में आपको अवगत अवश्य करवाती हूँ.

सूर्य साधना की मदद से चार महीने में आठ किलो वज़न कम कर लेने के बाद जब यू ट्यूब पर डॉ विपिन गुप्ता के वीडियो देखें तो मेरी इस आस्था को बल मिला. क्योंकि तब तक मैंने सिर्फ सुना ही था, उसके पीछे का वैज्ञानिक कारण पता नहीं था कि सूर्य चिकित्सा से शरीर स्वस्थ होता है लेकिन एक डॉक्टर ने जब वैज्ञानिक प्रमाण के साथ यह बात कही तो लगा आपको भी इस बारे में बताऊँ.

तो इनसे मिलिए ये हैं डॉ विपिन गुप्ता. “सेहतवन” नाम से इनके वीडियोज़ यूट्यूब पर खूब प्रसिद्ध हैं. ये अपने वीडियो में प्राकृतिक रूप से शरीर को स्वस्थ बनाने की बहुत अच्छी जानकारी देते हैं.

डॉ गुप्ता कहते हैं कि “जब तक श्रम नहीं करेंगे पाप नहीं धुलेंगे, जब तक पाप नहीं धुलेंगे, फैट नहीं घुलेंगे”.

इनके इस कथन में एक बहुत ही गंभीर आध्यात्मिक सन्देश छुपा हुआ है जो मैं सूर्य साधना का तरीका बताते समय बताऊंगी. सबसे पहले डॉ साहब जो महत्वपूर्ण जानकारी वज़न घटाने के लिए बता रहे हैं वो पढ़िए.

डॉ साहब का कहना है एक आदर्श वज़न वह होता है –

1. जब आप अपने वज़न का एक चौथाई अपनी पीठ पर लादकर आधा किलोमीटर तक आसानी से चल पाते हैं.

2. यदि आप आसानी से उकड़ू बैठ पाते हैं.

3. यदि आपकी कमर का नाप आपकी लम्बाई के आधे से कम है.

4. 5 फीट के लिए आदर्श वज़न 45 से 50 किलो होता है और हरेक इंच के लिए डेढ़ से दो किलो जोड़ दें.

अब आते हैं उन तीन बातों पर जो हमारे वज़न को प्रभावित करती हैं –

1. फ़ूड
2. मूड
3. शारीरिक श्रम

फ़ूड के लिए लोग आपको बहुत सारे उपाय बताते हैं क्या खाना चाहिए क्या नहीं खाना चाहिए, लेकिन आप वास्तव में अपने शरीर के बढ़ते वज़न को लेकर चिंतित हैं तो कम से कम महीने में एक बार 72 घंटे तक लगातार आपको व्रत करना होगा यानी सिर्फ पानी पीना है और कुछ नहीं लेना है.

[जल उपवास किस तरह करना चाहिए इस विषय पर इस लिंक पर जाकर आप उमराव विवेक द्वारा लिखे लेख से विस्तृत जानकारी ले सकते हैं]

यदि मूड की बात की जाए तो आजकल की जो आधुनिक जीवन शैली है उसमें अधिकतर लोग तनाव में ही रहते हैं, ऐसे में आपको सन-बाथ लेना चाहिए. जो आपके मूड को बहुत जल्दी रिलैक्स मोड में लाता है. और दूसरा महत्वपूर्ण कारण है कि ये आपके शरीर के कोलेस्ट्रोल को विटामिन डी में बदल देता है. जिससे दो फायदे हैं. पहला कोलेस्ट्रोल कम होगा दूसरा विटामिन डी का स्तर बढ़ेगा.

तो उपरोक्त दोनों बातें मेरी सूर्य साधना की विधि को वैज्ञानिक प्रमाण देती है कि सूर्य की किरणें प्रत्यक्ष रूप से आपका वज़न कम करती है. आपका मूड ठीक रखती हैं, जिससे आप खुद को हल्का अनुभव करते हैं, जितना आप अन्दर से हल्का अनुभव करेंगे उतना ही भोजन की आवश्यकता कम से कम होगी और ऊर्जा भी बनी रहेगी. दूसरा, अतिरिक्त वसा को भी यह सूर्य की किरणें ख़त्म करती हैं, अर्थात उसको अन्य ऊर्जा में परिवर्तित कर देती है.

तो अब आते हैं सूर्य साधना की विधि पर –

सबसे पहले आपको सुबह सूर्योदय के कुछ देर पहले उठना है.
आँख खुलते ही ईश्वर को धन्यवाद देना है कि उसने आपको एक नई सुबह देखने का सौभाग्य दिया.
फिर मुंह धोकर ऐसे स्थान पर आ जाइए जहां से सूर्य की पहली किरण आप पर पड़े.
पहले आँखें खोल कर कुछ पल को प्रकृति को निहारिये और उसे धन्यवाद दीजिए कि उसने आपको इतनी सुन्दर सुबह देखने के लिए आँखें दी.
सुबह की सुगंध को अनुभव करते हुए उसके साथ एकाकार हो जाइए और धीरे धीरे आँखें बंद कर लीजिये.
अब आँखें बंद रखकर अनुभव कीजिये कि आकाश पर ऊगते सूर्य के साथ एक नया सूर्य आपके भीतर उग रहा है.
सांस लेते हुए ऊगते सूर्य की किरणों की ऊर्जा और ऊष्मा अपनी देह में प्रवेश करता अनुभव कीजिये. उस सांस को कुछ पल को अन्दर ही रखें, बिलकुल सहजता के साथ… ज़बरदस्ती नहीं करना है.

जब आप सांस को अंदर रोककर रखेंगे तो आपको अनुभव होगा कि सूर्य की ऊर्जा आपकी रक्तवाहिनियों में रक्त के साथ घुलकर आपकी देह के एक एक अंग को प्रकाशमान कर रही है, नई ऊर्जा से भर रही है. आप अन्दर से ही नहीं, बाहर से भी एक नए आभामंडल से खुद को घिरा पाएंगे, जो आपको दिन भर ऊर्जावान और आनंदित रखेगा.

अब सांस छोड़ने के साथ यह भाव लाना है कि आपके अन्दर जितनी भी नकारात्मकता है वो बाहर निकली सांस के साथ आपकी आत्मा से हमेशा के लिए विदा ले रही है.

पांच से दस बार इसे करना है और यहाँ कृतज्ञता का भाव और आनंद आना सबसे महत्वपूर्ण है. जिन लोगों को अस्तित्व के जादू पर विश्वास नहीं उन्हें प्रारम्भ में ये सब यांत्रिक लगेगा परन्तु आप देखेंगे कि दो चार दिनों में ही आप अस्तित्व के जादू को अनुभव करने लगेंगे. बस यह याद रखिये कि जो भी जादू हो रहा है आपके भाव के कारण है, हमारे अन्दर जो भी भावना आ रही है वही सबसे अधिक महत्वपूर्ण है.

[सूर्य साधना की यह विधि मैंने आध्यात्मिक गुरु दिनेश कुमार जी से ग्रहण की है जिनके बारे में आप उनके नाम पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं]

एक बार फिर आपको बता दूं यह भाव भी वज़न कम करने के उपायों से जुड़ा है. इसलिए ही कह रही हूँ. यहाँ एक भी बात मुख्य विषय से परे नहीं. तो आप यदि सुबह सूर्य साधना कर रहे हैं, तो आपका केवल सूर्य के सामने यंत्रवत बैठे रहना काम नहीं आयेगा, आपके अन्दर सकारात्मक भाव उपजना और उस भाव के फलस्वरूप आनंद अनुभव होना अनिवार्य है.

अब सुबह किसी पारिवारिक कारणवश समय नहीं निकाल पा रहे, बच्चे को डरा धमका कर सोने को कहकर या परिवार के किसी अन्य सदस्य को परेशानी में छोड़ यदि आप सूर्य साधना कर रहे हैं, तो मैं बता दूं आप पर कोई सकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा. आप दिन भर साधना में बैठे रहिये और आपकी वजह से दूसरे परेशानी उठायें तो आप पर कोई सकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा. यहाँ पूरा खेल आपका अपने प्रति, दूसरों के प्रति नज़रिया बदलने का है.

तो डॉ गुप्ता जब कहते हैं कि “जब तक श्रम नहीं करेंगे पाप नहीं धुलेंगे, जब तक पाप नहीं धुलेंगे, फैट नहीं घुलेंगे”. तो ध्यान ही एकमात्र ऐसी विधि है जो आपका भाग्य तक बदल सकती है. आपको अपने पूर्व कर्मों के परिणामों को तो हर हाल में वहन करना है, परन्तु ध्यान हमें उसको साक्षी भाव से देखते हुए उससे सकारात्मक परिणामों की ओर उन्मुख करता है.

तीसरा महत्वपूर्ण बिन्दु है श्रम. जो हमें वापस लेख के प्रारम्भ में ले जाता है कि इस आधुनिक जीवन शैली ने हमसे श्रम छीन लिया, बदले में हम कितना भी व्यायाम और योगासन कर लें लेकिन वास्तविक श्रम के बिना वज़न को नियंत्रित करना कठिन है.

सच यही है पहले घर में गृहणियां झाड़ू पोछा, बर्तन, कपड़े, आँगन बुहारना, लीपना खुद ही करती थीं, और अब हमें अपने ही घर का काम करने में शर्म आती है. डॉ गुप्ता का कहना है श्रम किये बिना वज़न कम नहीं होगा, सिर्फ अपने ही घर का नहीं बल्कि हो सके तो पड़ोसी के घर में भी झाडू पोछा कीजिये. इससे आपका स्वास्थ्य ही नहीं, आपके रिश्ते भी सुधरेंगे.

खैर ये तो हुई मज़ाक की बात, लेकिन मैं बता दूं, मैं अपने घर में झाडू-पोछा, कपड़े धोना खुद ही करती हूँ. क्योंकि मेरा अधिकतर समय कम्प्युटर पर काम करते बीतता है. मुझे अलग से व्यायाम का समय नहीं मिलता.

इसलिए उकड़ू बैठकर झाडू पोछा करने से शरीर को सबसे अधिक व्यायाम मिलता है. और डॉ साहब का कहना है आप यदि जिम जाते हैं, व्यायाम करते हैं, योगासन करते हैं, तब भी उसके पहले दो घंटे का शारीरिक श्रम आवश्यक है. और दो घंटे के शारीरिक श्रम करने से पहले कभी भी भोजन नहीं करना है.

और भी बहुत सारी बातें हैं जो जीवन में हम पीछे छोड़ आए हैं जिसे वापस अपनी जीवन शैली में लाना है. लेकिन तब तक इतना तो कीजिये. अगले भाग में उकडू बैठने के फायदे और कुछ भोजन सम्बंधित बातें साझा करूंगी जो आपको वज़न कम करने में मदद करेंगी.

और अंत में एक बात जो मैं हमेशा कहती हूँ कि आखिर आपकी देह भी तो एक मंदिर ही है जिसमें आपकी आत्मा रूपी दैवीय शक्ति वास करती है. तो आइये हम सब मिलकर शारीरिक श्रम के साथ सूर्य साधना प्रारम्भ करें और दैवीय शक्तियों से प्रार्थना करें कि वो हमारी देह के साथ आत्मा पर पड़े अतिरिक्त और अनावश्यक बोझ को भी हटा दें.

  • माँ जीवन शैफाली

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1 thought on “जब तक श्रम नहीं करेंगे, पाप नहीं धुलेंगे, जब तक पाप नहीं धुलेंगे, फैट नहीं घुलेंगे”

  1. Goldy verma says:

    सुंदर लेख

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